
झारखंड की राजधानी रांची में शुक्रवार को एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई। यहां की एक मुखर और तेजतर्रार आदिवासी नेत्री निशा कुमारी भगत का उनके आवास पर संदिग्ध परिस्थितियों में शव मिला है। मौत से महज कुछ घंटे पहले ही उन्होंने फेसबुक पर लाइव आकर सरकारी तंत्र और भू-माफियाओं से मिल रही धमकियों का जिक्र किया था। पुलिस इसे शुरुआती तौर पर आत्महत्या मान रही है, लेकिन मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सघन जांच शुरू कर दी गई है।
शुक्रवार को अपने घर में फंदे से लटकने से पहले निशा कुमारी भगत ने अपने फेसबुक प्रोफाइल से करीब 11 मिनट का एक लाइव वीडियो किया था। इस वीडियो में वह बुरी तरह रोती हुई नजर आ रही थीं।
उन्होंने अपनी जान को खतरा बताते हुए साफ शब्दों में कहा था कि हेमंत सोरेन सरकार और उनके जमीन दलालों के खिलाफ आवाज उठाने का सीधा मतलब अपनी मौत को बुलावा देना है। यह वीडियो अचानक से तब बंद हो गया, जब कैमरे के सामने कथित तौर पर कोई हरे रंग की वस्तु आ गई।
रांची सिटी के पुलिस अधीक्षक (एसपी) पारस राणा ने इस दुखद घटना की जानकारी देते हुए बताया कि निशा का शव उनके कमरे में सीलिंग फैन से लटकता हुआ पाया गया। कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए तुरंत राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) भेज दिया है।
एक अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह सोशल मीडिया पर लाइव आने के बाद आत्महत्या का मामला प्रतीत होता है। मौत के असली कारणों तक पहुंचने के लिए पुलिस की एक विस्तृत जांच टीम हर एंगल से सबूत जुटा रही है।
इस घटना के बाद राज्य की सियासत में भारी उबाल आ गया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने युवा नेत्री की मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी अधिकारों की मुखरता से रक्षा करने के कारण निशा को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था।
मरांडी ने दावा किया कि अपने आखिरी वीडियो में निशा कुमारी भगत ने अपनी इस हालत के लिए सीधे तौर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, पिठोरिया थाना प्रभारी और अजय तिर्की को जिम्मेदार ठहराया है।
सोशल मीडिया पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए मरांडी ने इस घटना को बेहद शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के हक के लिए लड़ने वाली एक युवा महिला को इस हद तक परेशान किया गया कि उसे अपनी जान देने के लिए मजबूर होना पड़ा।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से तत्काल इस्तीफे की मांग की है। इसके साथ ही, भाजपा नेता ने मृतका द्वारा नामजद किए गए सभी लोगों की अविलंब गिरफ्तारी और पूरे मामले की एक निष्पक्ष जांच की पुरजोर वकालत की है।
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