
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में गांधी मेडिकल कॉलेज से जुड़ी MBBS की आदिवासी छात्रा रोशनी की संदिग्ध मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। अलीराजपुर की रहने वाली रोशनी का शव शहर के कोहेफिजा इलाके स्थित एक निजी हॉस्टल के बाथरूम में मिला था। घटनास्थल से एसिड की बोतल मिलने की बात सामने आने के बाद पुलिस ने प्रारंभिक जांच आत्महत्या की दिशा में शुरू की थी, लेकिन अब परिवार और समाज के लोगों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रोशनी के पिता ने साफ कहा कि उनकी बेटी आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठा सकती। उनका दावा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में एसिड पीने की पुष्टि नहीं हुई है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि शव पर चोट के निशान और गले पर दाग जैसे संकेत मिले हैं, जो किसी साजिश की ओर इशारा करते हैं। परिवार का कहना है कि यदि एसिड पीने से मौत होती, तो उसके स्पष्ट मेडिकल प्रमाण होते, जबकि अब तक सामने आए तथ्यों से मामला संदिग्ध लग रहा है।
परिजनों ने प्रशासन से स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग 2की है। उनका कहना है कि जब तक पूरी सच्चाई सामने नहीं आती, वे शांत नहीं बैठेंगे।
मामले की जांच कर रहे पुलिस अधिकारी अनिल बाजपेई ने बताया कि पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि फोरेंसिक रिपोर्ट, पोस्टमार्टम निष्कर्ष और CCTV फुटेज की गहन जांच की जा रही है। अधिकारी के अनुसार, जल्द ही तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट होगी और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मृतिका के पिता बन्तर सिंह ने द मूकनायक से बातचीत में आरोप लगाया कि उनकी बेटी रोशनी की हत्या की गई है, लेकिन पुलिस इसे आत्महत्या बताने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों को सजा मिल
रोशनी की मौत ने आदिवासी समाज में व्यापक आक्रोश पैदा कर दिया है। लोगों का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक छात्रा की मौत नहीं, बल्कि आदिवासी युवतियों की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा सवाल बन गया है। समाज के प्रतिनिधियों का आरोप है कि हाल के वर्षों में आदिवासी छात्रों और युवतियों के साथ अन्याय की घटनाएं बढ़ी हैं, लेकिन उनकी शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं होती।
आदिवासी संगठनों ने प्रशासनिक कार्रवाई में देरी पर नाराजगी जताई है। आदिवासी विकास परिषद के कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने रास्ते में ही रोक दिया। परिषद का कहना है कि घटना को पांच दिन से अधिक समय बीत चुका है, फिर भी न तो ठोस कार्रवाई हुई और न ही जांच की स्थिति स्पष्ट की गई।
संगठन के नेताओं का कहना है कि यदि जल्द निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। उनके अनुसार, यह लड़ाई केवल रोशनी के लिए नहीं, बल्कि पूरे आदिवासी समाज की अस्मिता, सुरक्षा और न्याय की लड़ाई है।
नीरज बारिवा, प्रदेश अध्यक्ष (छात्र विभाग), आदिवासी विकास परिषद ने द मूकनायक से बातचीत में कहा कि उन्होंने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी, जिस पर पुनः जांच के लिए एसीपी स्तर की कमेटी गठित की गई है। उन्होंने आशंका जताई कि छात्रा की हत्या हुई हो सकती है। उन्होंने प्रशासन को मंगलवार तक का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि तब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन शुरू किया जाएगा।
मामले में कई अहम सवाल अब भी अनुत्तरित हैं और उनकी सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी। सबसे बड़ा सवाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अंतिम निष्कर्ष को लेकर है कि वह क्या बताती है। साथ ही शरीर पर मिले चोटों और गले के निशानों का कारण क्या था, यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है। घटनास्थल पर मिली एसिड की बोतल कहां से आई और उसका स्रोत क्या है, इसकी जांच भी बाकी है। इसके अलावा हॉस्टल के CCTV फुटेज में क्या दिखाई देता है, यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है। इन सभी सवालों के जवाब ही तय करेंगे कि मामला आत्महत्या का है या फिर किसी बड़ी साजिश से जुड़ा हुआ।
मामले के तूल पकड़ने के साथ ही प्रशासन पर पारदर्शी जांच का दबाव बढ़ गया है। सामाजिक संगठनों, छात्र समूहों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने मांग की है कि यदि जरूरत पड़े तो मामले की जांच उच्चस्तरीय एजेंसी से कराई जाए, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।
द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.