
भोपाल। मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले के डबरा में एशिया के सबसे बड़े नवग्रह मंदिर बताए जा रहे नवग्रह मंदिर के दस दिवसीय प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के पहले ही दिन बड़ा हादसा हो गया। कलश यात्रा के दौरान मची भगदड़ में एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गई, जबकि सात अन्य महिलाएं घायल बताई जा रही हैं। हादसे के बाद प्रशासन और पुलिस की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि आयोजन को लेकर लाखों श्रद्धालुओं के आने का दावा पहले से किया जा रहा था।
मृतका की पहचान रति देवी साहू के रूप में हुई है। वे अपनी बहू और मोहल्ले की अन्य महिलाओं के साथ सुबह नौ बजे ही कार्यक्रम स्थल स्टेडियम पहुंच गई थीं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, गेट खुलने से पहले ही हजारों महिलाएं वहां मौजूद थीं, लेकिन भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए न तो पर्याप्त बैरिकेडिंग थी और न ही कतार बनवाने की कोई ठोस व्यवस्था।
भीड़ और अव्यवस्था से हुआ हादसा
आयोजन समिति के अनुसार कलश यात्रा में 20 हजार महिलाओं को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया था। इसके लिए 25 हजार कलश मंगवाए गए थे और करीब 20 हजार महिलाओं का रजिस्ट्रेशन कर उन्हें पीली साड़ी वितरित की गई थी। बताया जा रहा है कि जिन महिलाओं का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ था, लेकिन उनके पास पीली साड़ी थी, वे भी कलश लेने पहुंच गईं। इससे अचानक भीड़ का दबाव बढ़ गया और कलश वितरण स्थल पर धक्का-मुक्की शुरू हो गई।
सुबह 11 बजे से कलश वितरण शुरू होना था, लेकिन महिलाएं दो घंटे पहले ही पहुंच गई थीं। जैसे ही वितरण प्रारंभ हुआ, भीड़ बेकाबू हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि एक महिला के गिरते ही हालात बिगड़ गए और देखते ही देखते कई महिलाएं एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़ीं। चीख-पुकार और अफरातफरी के बीच घायल महिलाओं को लोगों ने गोद में उठाकर बाहर निकाला।
कई दिन से तैयारी में थीं महिला
रति देवी की बहू रीना साहू ने बताया कि उनकी सास पिछले कई दिनों से स्थापना समारोह में शामिल होने की तैयारी कर रही थीं। वे कहती थीं कि ऐसा मौका भगवान के आशीर्वाद से मिलता है और इसे चूकना नहीं चाहिए। उन्होंने मोहल्ले की अपनी उम्र की महिलाओं को भी साथ चलने के लिए तैयार किया था।
रीना के अनुसार, “हम लोग सुबह नौ बजे ही स्टेडियम पहुंच गए थे। वहां पहले से हजारों महिलाएं थीं। न कोई लाइन लगवा रहा था और न ही कोई दिशा-निर्देश दे रहा था। जैसे-तैसे मैं अम्मा का हाथ पकड़कर आगे बढ़ी, तभी धक्का-मुक्की शुरू हो गई। अम्मा गिरकर बेहोश हो गईं। थोड़ी देर में कई महिलाएं जमीन पर गिरी पड़ी थीं।”
परिजनों का आरोप है कि घटनास्थल पर पर्याप्त पुलिस बल मौजूद नहीं था और अस्पताल में भी समय पर ऑक्सीजन नहीं दी गई। उनका कहना है कि रति देवी आधे घंटे तक तड़पती रहीं और फिर उनकी मौत हो गई। दोपहर में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
प्रशासन की हाईलेवल मीटिंग, लेकिन चुप्पी बरकरार
हादसे के बाद कलेक्टर रुचिका चौहान ने एसपी धर्मवीर सिंह यादव और आईजी अरविंद सक्सेना के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। हालांकि, बैठक में क्या निर्णय लिए गए, इस पर प्रशासन और पुलिस की ओर से आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।
पुलिस का दावा है कि पूरे दस दिवसीय आयोजन में करीब 15 लाख से अधिक लोगों के आने की संभावना है और सुरक्षा-व्यवस्था के लिए 1500 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। इसके बावजूद पहले ही दिन ऐसी घटना ने सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है।
डबरा में आयोजित इस नवग्रह मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के मुख्य आयोजक प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा हैं। हादसे के समय वे मंदिर परिसर में मौजूद थे। यह दस दिवसीय कार्यक्रम 20 फरवरी तक चलेगा।
मुख्यमंत्री ने की आर्थिक सहायता की घोषणा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मृतका के परिजन को 4 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों को 1-1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए हैं। सरकार की ओर से हादसे की जांच और जिम्मेदारी तय करने की बात कही जा रही है, हालांकि अभी तक किसी अधिकारी या आयोजन समिति पर प्रत्यक्ष कार्रवाई की सूचना नहीं है।
सुरक्षा प्रबंधन पर उठे सवाल
पहले ही दिन हुए इस हादसे ने बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ नियंत्रण, मेडिकल इमरजेंसी और प्रशासनिक समन्वय की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब लाखों लोगों के आने का दावा हो, तो प्रवेश और निकास मार्गों की स्पष्ट व्यवस्था, बैरिकेडिंग, अलग-अलग वितरण काउंटर और मेडिकल टीम की तैनाती अनिवार्य होती है। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आस्था के बड़े आयोजनों में सिर्फ अनुमानित संख्या बताना पर्याप्त नहीं, बल्कि उस अनुपात में जमीनी तैयारी और नियंत्रण तंत्र भी उतना ही मजबूत होना चाहिए।
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