
कोकराझार: असम के कोकराझार जिले में मंगलवार को भड़की हिंसा के बाद बुधवार को पूरे इलाके में एक अजीब सी 'तनावपूर्ण शांति' देखने को मिली। सुरक्षा के लिहाज से सैकड़ों लोगों को अपना घर छोड़कर अस्थायी आश्रय स्थलों (राहत शिविरों) में शरण लेनी पड़ी है।
बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन (BTR) के कोकराझार जिले में सोमवार रात एक भीड़ द्वारा बोडो समुदाय के युवक की हत्या के बाद, बोडो और आदिवासी समुदायों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था।
क्या थी घटना?
पुलिस के मुताबिक, यह पूरा विवाद सोमवार रात करीगांव गांव के पास शुरू हुआ। एक वाहन ने संथाल आदिवासी समुदाय के दो लोगों को टक्कर मार दी थी। इसके बाद गुस्से में आई भीड़ ने उस वाहन पर हमला कर दिया जिसमें वह बोडो युवक यात्रा कर रहा था। इस हमले में युवक की जान चली गई। वहीं, दुर्घटना में घायल हुए लोगों में से एक, सुनील मुर्मू ने भी बाद में दम तोड़ दिया।
इस घटना के बाद दोनों समुदायों के बीच तनाव तेजी से बढ़ा। मंगलवार को इलाके में विरोध प्रदर्शन, पथराव और आगजनी की घटनाएं देखी गईं, जिससे हालात बिगड़ गए।
प्रशासन की सख्त कार्यवाही और इंटरनेट बंद
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मंगलवार शाम तक पुलिस और सीआरपीएफ के अलावा सेना (Army) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को भी तैनात कर दिया गया। एहतियात के तौर पर कोकराझार और उससे सटे चिरांग जिले में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को निलंबित कर दिया गया है।
हालांकि, मंगलवार शाम तक हिंसा और प्रदर्शनों में कमी आई, लेकिन डर का माहौल बना हुआ है। करीगांव में रहने वाले कई आदिवासी परिवार हिंसा भड़कने के डर से रात में ही अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए।
2,900 लोग राहत शिविरों में
कोकराझार के उपायुक्त (DC) पंकज चक्रवर्ती ने बताया, "आसपास के इलाकों के स्कूलों में पांच राहत केंद्र बनाए गए हैं। बुधवार दोपहर तक करीगांव से कुल 2,900 लोगों ने यहां शरण ली थी। चूंकि अब क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण में है, इसलिए उम्मीद है कि उनमें से कुछ लोग आज ही अपने घरों को लौट सकते हैं।"
डीसी चक्रवर्ती ने यह भी जानकारी दी कि शांति बहाली के लिए बुधवार दोपहर कोकराझार में विभिन्न हितधारकों के साथ एक अहम बैठक आयोजित की गई।
गिरफ्तारियां और पुलिस की मुस्तैदी
आईजीपी (BTAD) विवेक राज सिंह ने पत्रकारों को बताया कि पुलिस ने सोमवार रात के भीड़ के हमले (मॉब लिंचिंग) के सिलसिले में अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि मंगलवार को हुई हिंसा के संबंध में तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इलाके में पुराने जातीय तनावों (fault lines) को देखते हुए प्रशासन पूरी सावधानी बरत रहा है। उन्होंने कहा, "मंगलवार देर दोपहर तक स्थिति काफी हद तक काबू में आ गई थी, लेकिन एहतियातन सेना, आरएएफ और सीआरपीएफ की तैनाती जारी है। डीजीपी (DGP) खुद मंगलवार को दिल्ली से सीधे घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।"
संघर्ष का इतिहास
इस क्षेत्र में पहले भी जातीय संघर्ष का खूनी इतिहास रहा है, जिस कारण प्रशासन कोई भी जोखिम नहीं लेना चाहता। बीटीआर (BTR) क्षेत्र ने 1996 में और फिर 2014 में बोडो समूहों और संथालों के बीच भीषण जातीय संघर्ष देखा था। 2014 की हिंसा में सोनीतपुर और कोकराझार जिलों में बोडो उग्रवादियों द्वारा 62 आदिवासियों की हत्या कर दी गई थी।
क्षेत्र में अस्थिरता के दौर में 'आदिवासी कोबरा मिलिट्री ऑफ असम' जैसे कई आदिवासी उग्रवादी समूह भी बने थे, जिन्होंने अब सरकार के साथ समझौतों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।
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