"आबुआ दिशोम आबुआ राज" के संकल्प के साथ मनाया विश्व आदिवासी दिवस, सेंगेल अभियान ने उठाई आदिवासी अधिकारों की आवाज

9 अगस्त 1982 को जेनेवा में विश्व में आदिवासियों की घटती आबादी पर चिंता व्यक्त करते हुए एक ऐतिहासिक बैठक हुई थी। वर्ष 1994 में हुई घोषणा के अनुसार 1995 से प्रति वर्ष 9 अगस्त को पूरे विश्व में विश्व आदिवासी दिवस मनाया जाता है।
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर बोकारो जिले के चास प्रखंड अंतर्गत आदिवासी गांव बरुआटांड़ में आदिवासी सेंगेल अभियान के तहत एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया।
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर बोकारो जिले के चास प्रखंड अंतर्गत आदिवासी गांव बरुआटांड़ में आदिवासी सेंगेल अभियान के तहत एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया।
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बरुआटांड़/बोकारो- आज विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर बोकारो जिले के चास प्रखंड अंतर्गत आदिवासी गांव बरुआटांड़ में आदिवासी सेंगेल अभियान के तहत एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा घोषित "आबुआ दिशोम आबुआ राज" को स्थापित करने हेतु संकल्प एवं एकता प्रार्थना की गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता चास प्रखंड युवा मोर्चा अध्यक्ष कालीचरण किस्कू ने की, जबकि संचालन सेंगेल सरना धर्म मंडवा बोकारो जिला अध्यक्ष भीम मुर्मू ने किया। सेंगेल बोकारो जिला अध्यक्ष सह बोकारो जोनल हेड ने कहा कि आज पूरे विश्व में 32वां विश्व आदिवासी दिवस मनाया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि 9 अगस्त 1982 को जेनेवा में विश्व में आदिवासियों की घटती आबादी पर चिंता व्यक्त करते हुए एक ऐतिहासिक बैठक हुई थी। वर्ष 1994 में हुई घोषणा के अनुसार 1995 से प्रति वर्ष 9 अगस्त को पूरे विश्व में विश्व आदिवासी दिवस मनाया जाता है। दुख की बात है कि अब तक आदिवासियों की घटती आबादी पर कोई प्रभावी रोक नहीं लग सकी है।

आदिवासी सेंगेल अभियान एक सामाजिक संगठन है, जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व सांसद सालखन मुर्मू हैं। उनके नेतृत्व में भारत के 7 राज्यों - बिहार, बंगाल, असम, उड़ीसा, झारखंड, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश तथा भारत से बाहर नेपाल, भूटान और बांग्लादेश में भी आदिवासी अस्तित्व को बचाने हेतु संघर्ष जारी है।

प्रधानमंत्री से की गई छह प्रमुख मांगें

कार्यक्रम में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम आदिवासियों की रक्षा एवं अधिकारों को लेकर छह सूत्री मांग पत्र प्रस्तुत किया गया:

1. संताली को प्रथम राजभाषा का दर्जा- संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित विश्व आदिवासी भाषा दशक (2022-2032) के तहत राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त (22.12.2003) सबसे बड़ी आदिवासी भाषा संताली को झारखंड में संविधान के अनुच्छेद 345 के तहत प्रथम राजभाषा का दर्जा देकर पठन-पाठन, सरकारी कार्य और रोजगार में उपयोग किया जाए। इस संबंध में पूर्व सांसद सालखन मुर्मू द्वारा राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र का सकारात्मक उत्तर पत्र संख्या 11034/01/2020 दिनांक 5.8.2020 भी संलग्न है।

2. सरना धर्म कोड की मान्यता- देश के लगभग 15 करोड़ आदिवासी हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई आदि नहीं हैं बल्कि प्रकृति पूजक हैं। उन्हें संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत स्वतंत्र धार्मिक मान्यता अर्थात सरना धर्म कोड दिया जाए। इस हेतु भेजे गए पत्र का सकारात्मक उत्तर पत्र संख्या 24013/2021-CSR, दिनांक 6.9.2021 भी संलग्न है।

3. असम व अंडमान के झारखंडी आदिवासियों को ST का दर्जा- असम और अंडमान में बसे झारखंडी आदिवासियों को अविलंब अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिया जाए।

4. CNT/SPT कानून का कड़ाई से अनुपालन- CNT/SPT कानून को सख्ती से लागू किया जाए।

5. आदिवासी स्वशासन व्यवस्था में सुधार- परंपरा के नाम पर चल रही वंशवादी स्वशासन व्यवस्था में सुधार कर संविधान, कानून और जनतंत्र को लागू किया जाए।

6. झारखंडी स्थानीय नीति- झारखंड में झारखंडी स्थानीय नीति/प्रखंडवार नियोजन नीति लागू की जाए।

सेंगेल अभियान की ओर से लगातार कार्यक्रम, आन्दोलन, पुतला दहन, रेल/सड़क रोको, चक्का जाम आदि किए जाते रहे हैं। आयोजकों ने उम्मीद जताई कि विश्व आदिवासी दिवस पर प्रधानमंत्री आदिवासियों के हित में इन मांगों पर गंभीरता से विचार करेंगे। कार्यक्रम के अवसर पर झारखंड प्रदेश संयोजक जयराम सोरेन, कनारी पंचायत सेंगेल परगना सह वार्ड सदस्य राखो किस्कू, नकुल सोरेन, पिताम्बर सोरेन, शिवराम किस्कू, दीपक हेम्बरम, अमर सोरेन, संजूल मुर्मू, मनोज किस्कू, बलबीर किस्कू, रवि कुमार किस्कू, कोशल सोरेन, मुंगेश्वर साथ सोरेन, फागु बेसरा, सावित्री मुर्मू, रीता किस्कू, शिवानी किस्कू, मीरा सोरेन, भूमि हांसदा, खूशबू मुर्मू, जीया सोरेन, अनिता हांसदा, पूजा कुमारी सहित बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग उपस्थित थे।

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