
बालासोर- जिले के खैरा थाना क्षेत्र के हरिपुर गांव में 11 मई को दो पड़ोसी परिवारों के बीच लंबे समय से चले आ रहे जमीन विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। निर्माण कार्य के दौरान पड़ोसियों के बीच झगड़ा शुरू हुआ, जिसमें एक परिवार के सदस्यों ने फावड़े, बेलचे, हथौड़े और धारदार हथियारों से हमला कर दिया। इस हमले में 39 वर्षीय कमला सेठी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनकी भाभी शकुंतला सेठी गंभीर रूप से घायल हो गईं और उन्हें कटक के SCB मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया।
परिवार का आरोप है कि विवाद पिछले पांच साल से चला आ रहा था और उन्होंने कई बार पुलिस व सरपंच को शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
हत्या के बाद भी मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी का आरोप लगाते हुए परिजनों ने सोमवार रात शव को घर लाने के बाद मंगलवार को साइकिल पर रखकर करीब 12-15 किलोमीटर की दूरी तय कर खैरा पुलिस थाने पहुंचाया। उन्होंने थाने के बाहर शव रखकर धरना दिया, सड़क जाम किया और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, मुआवजे तथा जमीन विवाद के समाधान की मांग की। इस दौरान सड़क यातायात प्रभावित रहा और गांववासियों ने भी समर्थन दिया।
परिवार का आरोप है कि घटना को तीन दिन बीत गए, लेकिन पुलिस ने मुख्य आरोपियों को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया। गुस्साए परिजनों ने कमला सेठी का शव साइकिल पर रखकर 15 किलोमीटर दूर खैरा पुलिस थाने तक मार्च निकाला।
बालासोर के एसपी प्रत्युष दिवाकर समेत वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने केस दर्ज कर लिया । एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि दो अन्य फरार हैं और उनकी तलाश जारी है। पुलिस ने परिवार को एंबुलेंस की पेशकश की थी, लेकिन परिजनों ने विरोध जारी रखा। एसपी ने आश्वासन दिया कि बाकी आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा, जांच चल रही है और यदि पुलिस की ओर से कोई लापरवाही पाई गई तो कार्रवाई होगी।
यह घटना ग्रामीण इलाकों में पुलिस की निष्क्रियता, लंबित विवादों के समाधान और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर व्यापक बहस छेड़ गई है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने आक्रोश जताया। ट्राइबल आर्मी ने घटना का क्लिप पोस्ट करते हुए लिखा, " ओडिशा के बालासोर में एक आदिवासी परिवार को एक महिला का शव 15 किलोमीटर तक साइकिल पर ढोकर पुलिस स्टेशन ले जाना पड़ा, ताकि वे कथित तौर पर जमीन विवाद से जुड़े हत्या मामले में पुलिस की निष्क्रियता के खिलाफ विरोध दर्ज करा सकें। बालासोर जिले में यह घटना कानून-व्यवस्था और पुलिस जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या न्याय पाने के लिए अब मृत शरीर को भी सड़कों पर उतारना पड़ेगा?"
परिवार ने न्याय की मांग करते हुए कहा कि शव ढोकर थाने जाना उनके लिए विवशता थी ताकि आवाज सुनी जाए। प्रशासन ने जमीन विवाद के कानूनी समाधान का भी आश्वासन दिया है। यह मामला राज्य में पुलिस सुधार और ग्रामीण न्याय व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है।
द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.
‘द मूकनायक’ जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है. अगर आप भी चाहते हैं कि ‘द मूकनायक’ हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज़ बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहे तो सपोर्ट करें.
यहां सपोर्ट करें