उत्तर प्रदेश: हमीरपुर में एक 29 वर्षीय युवक के लिए अपना नाम एक वांछित आरोपी जैसा होना किसी भयानक सपने में तब्दील हो गया। गैर-जमानती वारंट के तहत पुलिस ने शनिवार को उसे गलती से हिरासत में ले लिया और कथित तौर पर थाने के अंदर उसकी जमकर पिटाई की।
पीड़ित का नाम शिवराज सिंह है। इंटरनेट पर सामने आए वीडियो में शिवराज के परिजनों ने आरोप लगाया है कि गलत तरीके से हिरासत में लेने के बाद पुलिस ने उसे बुरी तरह पीटा। परिजनों के मुताबिक, पुलिस को अपनी गलती का अहसास होने से पहले ही शिवराज गंभीर रूप से घायल हो चुका था।
दूसरी तरफ, हमीरपुर पुलिस ने मारपीट के इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पुलिस का दावा है कि यह 'गलतफहमी' इसलिए हुई क्योंकि जिस इलाके में असली आरोपी रहता था, उसी इलाके में यह युवक भी रहता है और दोनों का नाम शिवराज है।
पुलिस ने यह भी दावा किया कि शिवराज को जो चोटें आई हैं, वे उसने खुद को पहुंचाई हैं। पुलिस के अनुसार, जब शिवराज को इस गलतफहमी के बारे में पता चला, तो उसने गुस्से में अपना हाथ एक खिड़की पर दे मारा और अपना सिर दीवार पर पटक लिया।
इस पूरे मामले पर अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) अरविंद कुमार वर्मा ने बताया कि घटना की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। पुलिस स्टेशन में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि जांच के आधार पर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि फिलहाल शिवराज की हालत स्थिर है।
यह घटना हमीरपुर के सदर कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मेरापुर मोहल्ले की है, जहां का शिवराज निवासी है। इस घटना के बाद स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश फैल गया और उन्होंने कथित मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद यह प्रदर्शन समाप्त हुआ। आला अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया कि आरोपों की गहनता से जांच की जाएगी और यदि कोई भी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी।
यह बड़ी चूक कैसे हुई, इस पर हमीरपुर के क्षेत्राधिकारी (सीओ) यशपाल सिंह ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि उस इलाके में शिवराज नाम के दो व्यक्ति रहते हैं। कोर्ट के वारंट की कॉपी में वांछित व्यक्ति के पिता का नाम दर्ज नहीं था, जिसके चलते पुलिस टीम गलत शिवराज के घर पहुंच गई।
सीओ सिंह ने यह भी बताया कि जिस व्यक्ति को हिरासत में लिया गया था, उसके खिलाफ पहले से ही पांच आपराधिक मामले दर्ज थे। इस तथ्य ने पुलिस की गलतफहमी को और ज्यादा बढ़ा दिया।
हालांकि, जब पुलिस टीम उसे लेकर थाने पहुंची और वहां उसकी पहचान की बारीकी से जांच की गई, तब जाकर यह खुलासा हुआ कि वह वारंट में नामित व्यक्ति नहीं है।
पुलिस का कहना है कि गलत तरीके से पकड़े जाने की बात जानकर शिवराज भड़क गया। उसने थाने का एक शीशा तोड़ दिया, जिससे उसके हाथ में चोट लग गई और उसने अपना सिर भी टकराया। इसके बाद अधिकारी उसे इलाज के लिए तुरंत अस्पताल ले गए।
इसी बीच ऑनलाइन वायरल हो रहे एक कथित वीडियो में अस्पताल के बिस्तर पर लेटे हुए शिवराज ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उसने कहा कि पुलिस ने उसे एक ऐसे वारंट के आधार पर घर से उठाया जो उसके खिलाफ जारी ही नहीं हुआ था और फिर उसके साथ मारपीट की गई।
फिलहाल पीड़ित की मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। मामले में शिवराज के परिवार से टिप्पणी के लिए संपर्क नहीं हो सका है।
सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे एक अन्य वीडियो में शिवराज की मां ने आरोप लगाया है कि तीन पुलिसकर्मी उनके घर आए थे। उन्होंने यह कहते हुए उनके बेटे को जबरन उठा लिया कि कोर्ट ने उसके खिलाफ वारंट जारी किया है।
मां ने आगे आरोप लगाया कि थाने के भीतर उनके बेटे को बुरी तरह पीटा गया। उन्होंने दावा किया कि अब पुलिस वाले यह कह रहे हैं कि यह वारंट साल 2018 के एक मामले से जुड़ा है और एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के आदेश पर वे उसे थाने लेकर आए थे।
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