उत्तर प्रदेश: बलिया जिले से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक दलित महिला ने अपने ही मालिक पर शादी का झूठा वादा करके सालों तक दुष्कर्म करने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़िता का यह भी कहना है कि आरोपी उस पर लगातार धर्म बदलने का दबाव बना रहा था। पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, 24 वर्षीय आरोपी जलालुद्दीन ने पीड़िता के अनाथ और गरीब होने का फायदा उठाया। उसने घरेलू काम के बहाने उसे अपने घर पर रख लिया। महिला का आरोप है कि काम के दौरान ही आरोपी ने उसके साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी और धीरे-धीरे उसे अपनी हवस का शिकार बना लिया। पीड़िता के अनुसार, उसके साथ साल 2017 से ही जबरन शारीरिक संबंध बनाए जा रहे थे।
शिकायत में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा भी हुआ है। पीड़िता का कहना है कि जब उसने इस ज्यादती के खिलाफ आवाज उठाने की धमकी दी, तो जलालुद्दीन ने उसे शांत करने के लिए एक चाल चली। उसने 10 अगस्त 2021 को पीड़िता के साथ एक 'लिखित समझौता' किया और कथित तौर पर शादी का दिखावा किया। उस वक्त लड़की की उम्र महज 17 साल थी।
इस लिखित समझौते के दौरान पीड़िता को यह भरोसा दिलाया गया था कि जब वह 20 साल की हो जाएगी, तो आरोपी उससे बाकायदा विधिवत निकाह करेगा। इसके साथ ही उसे अपनी संपत्ति में भी हिस्सा देने का लालच दिया गया। हालांकि, जैसे-जैसे समय बीता, यह वादे सिर्फ एक धोखा साबित हुए।
तहरीर के अनुसार, जब महिला ने जलालुद्दीन पर वादे के मुताबिक विधिवत शादी करने का दबाव बनाया, तो उसने धर्म परिवर्तन की शर्त रख दी। आरोप है कि जब पीड़िता ने अपना धर्म बदलने से साफ इनकार कर दिया, तो उसे जान से मारने की धमकियां दी जाने लगीं। इतना ही नहीं, महिला का यह भी दावा है कि आरोपी अब किसी दूसरी लड़की से शादी करने की फिराक में है।
रसड़ा के क्षेत्राधिकारी (सीओ) रजनीश ने बताया कि पीड़िता की शिकायत के आधार पर शनिवार को जलालुद्दीन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की दुष्कर्म से जुड़ी धाराओं के साथ-साथ पॉक्सो (POCSO) और एससी/एसटी (SC/ST) एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।
फिलहाल पुलिस इस पूरे प्रकरण की गहराई से तफ्तीश कर रही है। बलिया की एक स्थानीय अदालत में पीड़िता का बयान दर्ज कराने की कानूनी प्रक्रिया भी चल रही है।
सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों और यौन उत्पीड़न के मामलों में निजता के अधिकार का पालन करते हुए पीड़िता की पहचान को पूरी तरह से गुप्त रखा गया है।
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