सिद्धपेट (तेलंगाना): तेलंगाना के सिद्धपेट जिले में स्थित वर्ंगल मंडल के वेलूर गांव में डॉ. बीआर अंबेडकर की प्रतिमा लगाने को लेकर भारी विवाद खड़ा हो गया है। सड़क एवं भवन (R&B) विभाग के अधिकारियों द्वारा मूर्ति स्थापना के लिए बनाए गए एक चबूतरे को तोड़े जाने के बाद बुधवार को दलित कार्यकर्ताओं ने उग्र प्रदर्शन किया।
दलित अधिकार कार्यकर्ताओं के मुताबिक, गांव के दलित और पिछड़े वर्ग के लोगों ने करीब एक सप्ताह पहले बाबासाहेब की मूर्ति स्थापित करने के लिए एक चबूतरा और उसके चारों ओर पिलर का निर्माण किया था। लेकिन, R&B विभाग के अधिकारियों ने इस निर्माण पर यह कहते हुए रोक लगाने की कोशिश की कि वह जमीन विभाग की संपत्ति है। वहीं, स्थानीय लोगों का दावा है कि मूर्ति स्थापना का यह स्थल मुख्य सड़क से कम से कम 50 फीट की दूरी पर स्थित है।
मामले ने तब तूल पकड़ लिया जब R&B अधिकारियों की शिकायत पर गौड़ाराम पुलिस ने 14 दलितों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। इसके बाद, मंगलवार रात को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में अधिकारियों ने नव-निर्मित चबूतरे को ध्वस्त कर दिया और मूर्ति लगाने के प्रयासों को विफल कर दिया।
मंगलवार रात की इस घटना की खबर पूरे जिले में आग की तरह फैल गई। इसके विरोध में बुधवार को वेलूर गांव में बड़ी संख्या में दलित कार्यकर्ता और स्थानीय लोग इकट्ठा हो गए। विभाग की कार्रवाई का कड़ा विरोध करते हुए, भीड़ ने पुलिस सुरक्षा के बीच उसी स्थान पर फिर से एक नया चबूतरा खड़ा कर दिया।
इस मौके पर दलित बहुजन फ्रंट (DBF) के सचिव शंकर ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि डॉ. अंबेडकर के सम्मान में किए जा रहे उनके प्रयासों में किसी भी तरह की बाधा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
शंकर ने कहा, "जो लोग भी मूर्ति लगाने के काम को रोकने की कोशिश करेंगे, हम उनका डटकर सामना करेंगे। डॉ. बीआर अंबेडकर भारतीय संविधान के मुख्य निर्माता हैं। उनकी प्रतिमा स्थापित करना हमारा अधिकार है और इसके लिए हमें किसी से भी अनुमति लेने की कतई आवश्यकता नहीं है।"
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