तमिलनाडु: नांगुनेरी जातीय हिंसा के खूनी खेल में शामिल थे पुराने अपराधी, दलित और प्रवासी मजदूर की हुई थी हत्या

नांगुनेरी में दलित युवक और प्रवासी मजदूर की हत्या के मामले में 7 गिरफ्तार, 2023 के चिन्नदुरई हमले से भी जुड़े हैं दो आरोपियों के तार; डीएमके नेता का भतीजा भी शामिल।
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हत्यासाभार- इंटरनेट/ सांकेतिक फोटो
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नांगुनेरी (तमिलनाडु): तमिलनाडु के नांगुनेरी शहर में कथित जातीय हिंसा की खौफनाक घटना में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच में यह बात सामने आई है कि हालिया हमले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से दो पर कुछ साल पहले भी एक अन्य जातीय हमले का मामला दर्ज किया गया था। उस वक्त उनकी कम उम्र को देखते हुए किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act) के तहत उनकी पहचान गुप्त रखी गई थी।

2 मार्च को हुआ था खूनी संघर्ष

इस साल 2 मार्च को नांगुनेरी के पास पेरुमपाथु गांव में हथियारों (हंसिया) से लैस सात लोगों ने अचानक अंधाधुंध हमला कर दिया। इस बर्बर हमले में एक दिव्यांग दलित व्यक्ति और ओडिशा के एक प्रवासी मजदूर को अपनी जान गंवानी पड़ी। इसके अलावा, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदाय के लोगों सहित छह अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

सात आरोपी गिरफ्तार, सामने आए नाम

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान कन्नन (21 वर्ष), वसंथा कुमार (21 वर्ष), एंथोनी मिशेल (18 वर्ष), उचिमाहली उर्फ ​​मिट्टई (20 वर्ष), राजा उर्फ ​​इसाक्कीराजा (19 वर्ष), सुब्बैया उर्फ ​​सुभाष (19 वर्ष), कल्याणी (19 वर्ष) के रूप में हुई है.

हमले का असली मकसद और राजनीतिक कनेक्शन

शुरुआत में पुलिस ने हमले के पीछे के मकसद को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया था। लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया है कि इस हमले की साजिश मनबढ़ किस्म के कुछ युवकों ने रची थी, जिसका मुख्य उद्देश्य दलित युवाओं के मन में खौफ पैदा करना और उन्हें चुप कराना था।

इस मामले में एक राजनीतिक पहलू भी सामने आया है। गिरफ्तार आरोपियों में से एक सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके (DMK) के नांगुनेरी यूनियन सचिव आरएस सुदलाईकन्नू का भतीजा है। हालांकि, सुदलाईकन्नू ने मीडिया के सामने स्पष्ट किया है कि पिछले पांच सालों से उनके भतीजे के साथ उनका कोई संबंध या संपर्क नहीं है।

2023 के गहरे जख्म अभी भरे भी नहीं थे

नांगुनेरी का इलाका अभी पिछले जातीय हमले की दहशत से उबर भी नहीं पाया था कि यह नई घटना घट गई। गौरतलब है कि अगस्त 2023 में मारवर (अति पिछड़ा वर्ग) समुदाय के सात किशोरों ने नांगुनेरी शहर में ही घर के अंदर घुसकर चिन्नदुरई नाम के एक छात्र पर हंसिए से जानलेवा हमला किया था। वह बुरी तरह घायल हो गया था, लेकिन किसी तरह उसकी जान बच गई। अपने भाई की चीखें सुनकर उसे बचाने दौड़ी उसकी 13 वर्षीय बहन को भी हमलावरों ने घायल कर दिया था।

आरोप था कि हमलावर चिन्नदुरई के स्कूल में बेहतरीन शैक्षणिक प्रदर्शन से चिढ़े हुए थे। इस खौफनाक हमले से पहले लगातार चार साल तक चिन्नदुरई को जातीय उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था।

जस्टिस चंद्रू आयोग और ताजा हालात

2023 के उस हमले के बाद मचे भारी बवाल को देखते हुए, राज्य सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश के. चंद्रू की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग का गठन किया था। अपनी विस्तृत जांच के बाद, इस आयोग ने स्कूलों में छात्रों द्वारा अपनी जाति दर्शाने वाले रंगीन धागे पहनने और अन्य जातीय प्रतीकों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की थी।

हालिया घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है। पेरुमपाथु गांव के बीसी (BC) और दलित दोनों समुदायों के निवासियों ने इस हमले के खिलाफ कड़ा विरोध प्रदर्शन किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह ताजा हमला बीसी समुदाय और मारवर समुदाय के बीच चल रही पुरानी जातीय दुश्मनी का ही परिणाम है।

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