13 साल का संघर्ष लाया रंग: कन्याकुमारी में डॉ. अंबेडकर की 9 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा का अनावरण करेंगे डिप्टी सीएम उदयनिधि

कन्याकुमारी में दलित अधिकार संगठन का 13 साल का संघर्ष हुआ सफल; डिप्टी सीएम उदयनिधि स्टालिन करेंगे डॉ. बीआर अंबेडकर की 9 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा का अनावरण।
Statue of Baba Saheb Dr. Ambedkar. Symbolic picture
बाबा साहब डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा. सांकेतिक तस्वीर
Published on

कन्याकुमारी: तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले के लिए यह शुक्रवार एक ऐतिहासिक दिन होने जा रहा है। एराचाकुलम के अरुलज्ञानपुरम में संविधान निर्माता डॉ. बीआर अंबेडकर की 9 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा का अनावरण राज्य के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन करेंगे। इसी के साथ 'तमिलनाडु दलित अधिकार संरक्षण आंदोलन' का वह 13 साल लंबा संघर्ष भी आखिरकार अपनी मंजिल तक पहुंच जाएगा, जो इस प्रतिमा की स्थापना के लिए लगातार प्रयास कर रहा था।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, शुरुआत में अधिकारियों ने संगठन को प्रतिमा स्थापित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके पीछे मुख्य कारण यह बताया गया था कि संगठन के पास ऐसा करने के लिए अपनी 'पट्टा भूमि' (निजी जमीन) नहीं थी।

लगातार किए गए 42 विरोध प्रदर्शन

संगठन के अध्यक्ष वई दिनकरन (Vai Dinakaran) ने इस लंबी लड़ाई के बारे में बताते हुए कहा कि पिछले 13 वर्षों में उन्होंने अपने अधिकार के लिए 42 बार विरोध प्रदर्शन किए। इन प्रदर्शनों में काले झंडे दिखाना, भूख हड़ताल और साल 2024 में एक महीने तक चलने वाला निरंतर धरना शामिल है।

दिनकरन ने बताया, "पिछली डीएमके (DMK) और एआईएडीएमके (AIADMK) दोनों ही सरकारों ने जमीन का पट्टा न होने का हवाला देकर हमें अनुमति देने से मना कर दिया था। इसके बाद हमने हार नहीं मानी और खुद 2.5 सेंट पट्टा भूमि खरीदी और वहां यह प्रतिमा स्थापित की। 13 साल के कड़े संघर्ष के बाद आखिरकार पिछले साल हमें जिला प्रशासन से इस 9 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा को स्थापित करने की आधिकारिक मंजूरी मिल गई।"

आगामी चुनावों में डीएमके को मिल सकता है फायदा

इस अनावरण के राजनीतिक महत्व पर बात करते हुए दिनकरन ने कहा कि उपमुख्यमंत्री द्वारा प्रतिमा का अनावरण किए जाने से डॉ. अंबेडकर के अनुयायियों में भारी खुशी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस कदम से आगामी विधानसभा चुनावों में सत्तारूढ़ डीएमके को जिले के दलित समुदाय का बड़ा समर्थन और वोट हासिल करने में काफी मदद मिलेगी।

Statue of Baba Saheb Dr. Ambedkar. Symbolic picture
तमिलनाडु: नांगुनेरी जातीय हिंसा के खूनी खेल में शामिल थे पुराने अपराधी, दलित और प्रवासी मजदूर की हुई थी हत्या
Statue of Baba Saheb Dr. Ambedkar. Symbolic picture
बरेली में वाल्मीकि समाज के साथ जातिगत भेदभाव: नाई ने बाल काटने से किया इनकार, गाली-गलौज!
Statue of Baba Saheb Dr. Ambedkar. Symbolic picture
केरल हाईकोर्ट ने किसे कहा 'बदकिस्मत पति'? महिला की तरह 'पुरुष के सम्मान' को लेकर एक अनोखा मामला | पूरी खबर

द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.

द मूकनायक की मदद करें

‘द मूकनायक’ जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है. अगर आप भी चाहते हैं कि ‘द मूकनायक’ हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज़ बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहे तो सपोर्ट करें.

यहां सपोर्ट करें
The Mooknayak - आवाज़ आपकी
www.themooknayak.com