बेटे ने की गलती, सजा मां को मिली: कर्नाटक में सामाजिक बहिष्कार ने छीनी 42 वर्षीय कमलम्मा की जिंदगी

कुछ महीने पहले शिल्लेक्याता समुदाय के नेताओं ने कमलम्मा के बेटे एरिस्वामी पर समुदाय की एक गर्भवती महिला के साथ अवैध संबंध का आरोप लगाया। आरोप सिद्ध होने पर समुदाय के पंचों ने कमलम्मा के पूरे परिवार को 10 साल के लिए सामाजिक बहिष्कार की सजा सुनाई।
इस घटना ने जातीय पंचायतों द्वारा थोपी जाने वाली क्रूर सजाओं और सामाजिक बहिष्कार की अमानवीयता पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस घटना ने जातीय पंचायतों द्वारा थोपी जाने वाली क्रूर सजाओं और सामाजिक बहिष्कार की अमानवीयता पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।सोशल मीडिया
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यादगीर- जिले में एक अत्यंत मार्मिक और दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है। जहां एक मां को बेटे पर लगे आरोप की सजा भुगतनी पड़ी और वह सामाजिक बहिष्कार व आर्थिक संकट से तंग आकर आत्महत्या कर बैठी। मृतका कमलम्मा (42), गिरिनगर, यादगीर की निवासी थीं। उनकी यह मौत 'सामाजिक न्याय' के नाम पर थोपी गई क्रूरता का जीता-जागता सबूत बन गई है।

कुछ महीने पहले शिल्लेक्याता समुदाय के नेताओं ने कमलम्मा के बेटे एरिस्वामी पर समुदाय की एक गर्भवती महिला के साथ अवैध संबंध का आरोप लगाया। आरोप सिद्ध होने पर समुदाय के पंचों ने कमलम्मा के पूरे परिवार को 10 साल के लिए सामाजिक बहिष्कार की सजा सुनाई। परिवार को अपना घर छोड़ने का आदेश दिया गया। उन्हें समुदाय के किसी भी व्यक्ति से बात करने, मिलने-जुलने की मनाही कर दी गई। इतना ही नहीं, यदि कोई समुदाय का सदस्य इस परिवार से बातचीत करता पाया गया तो उसे भी 10 साल के बहिष्कार का सामना करना पड़ता।

इस बहिष्कार ने परिवार की जिंदगी को नर्क बना दिया। कमलम्मा और उनके परिवार को लगातार मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। समुदाय के नेताओं ने उनके पारंपरिक व्यवसाय मछली पकड़ने और मछली बेचने पर भी पूरी तरह रोक लगा दी। इससे परिवार गंभीर आर्थिक संकट में फंस गया। रोजी-रोटी का कोई साधन नहीं बचा। ऊपर से परिवार पर 50,000 रुपये का भारी जुर्माना भी थोप दिया गया। कमलम्मा बार-बार यह सोचकर परेशान रहती थीं कि अब उनका परिवार कैसे गुजारा करेगा, बच्चे कैसे पलेंगे-बढ़ेंगे।

दुख और निराशा की इस चरम स्थिति में कमलम्मा अपने किसी रिश्तेदार के गांव जोलादादगी (वडगेरा तालुक) चली गईं। वहां भी शोक और व्यथा से व्याकुल होकर वे पास की भीमा नदी के पुल पर पहुंचीं। उन्होंने अपनी मंगलसूत्र को पुल पर रखा और गहन उदासी में नदी की गहराई में छलांग लगा दी। यह घटना शनिवार को हुई, लेकिन यह मामला हाल ही में सामने आया है।

सूचना मिलते ही वडगेरा पुलिस मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों की मदद से कमलम्मा का शव नदी से बाहर निकाला गया। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए यादगीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (वाईआईएमएस) की मोर्चरी में भेजा गया।

पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाने) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस सूत्रों ने पुष्टि की है कि जांच के दौरान अब तक दो लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है, जबकि तीन अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

इस घटना ने जातीय पंचायतों द्वारा थोपी जाने वाली क्रूर सजाओं और सामाजिक बहिष्कार की अमानवीयता पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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इस घटना ने जातीय पंचायतों द्वारा थोपी जाने वाली क्रूर सजाओं और सामाजिक बहिष्कार की अमानवीयता पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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