नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने गोरखपुर के सांसद और प्रख्यात अभिनेता रविन्द्र शुक्ला उर्फ 'रवि किशन' के पक्ष में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने एकपक्षीय अंतरिम निषेधाज्ञा (Ex-Parte Ad Interim Injunction) पारित करते हुए उनके व्यक्तित्व और प्रचाराधिकारों को व्यापक कानूनी संरक्षण प्रदान किया है। इस आदेश के तहत उनके नाम, छवि, आवाज़ और अन्य विशिष्ट पहचान के किसी भी प्रकार के व्यावसायिक शोषण या अनधिकृत उपयोग पर सख्त रोक लगा दी गई है।
न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने 2 जुलाई 2026 को यह आदेश पारित किया। यह वाद रवि किशन के व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा व्यापार चिह्न अधिनियम 1999 और कॉपीराइट अधिनियम 1957 के तहत वैधानिक संरक्षण पाने के लिए दायर किया गया था। अभिनेता ने अपने तीन दशक के शानदार करियर में 750 से अधिक फिल्मों में काम किया है और वर्तमान में वे एक जन प्रतिनिधि के रूप में भी पूरी तरह सक्रिय हैं।
याचिका के माध्यम से न्यायालय को अवगत कराया गया कि डिजिटल मंचों पर रवि किशन की छवि को नुकसान पहुंचाने का सुनियोजित प्रयास किया जा रहा था। कई असामाजिक तत्वों द्वारा उनके नाम से अश्लील, अभद्र और अशोभनीय सामग्री प्रकाशित की गई। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), जनरेटिव एआई, मशीन लर्निंग और डीपफेक जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करके उनकी पहचान का दुरुपयोग किया गया। इस कृत्य से वर्षों की कड़ी मेहनत से अर्जित की गई उनकी प्रतिष्ठा और सार्वजनिक छवि को अपूरणीय क्षति पहुंच रही थी।
इस वाद के परिप्रेक्ष्य में व्यक्तित्व और प्रचाराधिकारों को स्पष्ट किया गया। व्यक्तित्व अधिकार किसी भी व्यक्ति को उसके नाम, चित्र, आवाज़ और सार्वजनिक पहचान पर विशेष कानूनी नियंत्रण देते हैं। कोई भी संस्था या व्यक्ति पूर्व अनुमति के बिना इन विशेषताओं का उपयोग विज्ञापन या डीपफेक निर्माण में नहीं कर सकता। इसी तरह, प्रचाराधिकार किसी प्रसिद्ध व्यक्ति की प्रसिद्धि और पहचान के आर्थिक एवं व्यावसायिक उपयोग पर उनका विशेषाधिकार सुनिश्चित करते हैं।
न्यायालय ने अपने आदेश में माना कि प्रथम दृष्टया रवि किशन का पक्ष मजबूत है और तत्काल संरक्षण न मिलने पर उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। अदालत ने ज्ञात और अज्ञात प्रतिवादियों को रवि किशन के नाम (रविन्द्र शुक्ला या रवि किशन), आवाज़ या छवि का व्यावसायिक या व्यक्तिगत लाभ के लिए उपयोग करने से स्पष्ट रूप से रोक दिया है। यह प्रतिबंध एआई और डीपफेक सहित सभी आधुनिक तकनीकों तथा भौतिक व आभासी माध्यमों पर लागू रहेगा। इसके साथ ही अश्लील सामग्री के प्रसारण पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
उच्च न्यायालय ने इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स (पूर्व में ट्विटर) और यूट्यूब जैसी वेबसाइटों पर मौजूद तमाम आपत्तिजनक लिंक को तीन दिन के भीतर हटाने के सख्त निर्देश दिए हैं। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि संबंधित प्रतिवादी ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो इंटरनेट मध्यस्थों जैसे मेटा प्लेटफ़ॉर्म्स इंक, गूगल एलएलसी और एक्स कॉर्प को समयसीमा के भीतर सामग्री हटानी होगी।
अदालत ने अपने निर्णय में जयकिशन काकुभाई साराफ और ऐश्वर्या राय बच्चन से जुड़े पूर्व निर्णयों का भी हवाला दिया। इस मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।
डिजिटल युग में सार्वजनिक हस्तियों की पहचान सुरक्षित करने के लिहाज से यह एक अहम मील का पत्थर है। बिना अनुमति किसी व्यक्ति की पहचान के व्यावसायिक उपयोग पर यह आदेश स्पष्ट दिशा-निर्देश देता है। इस महत्वपूर्ण मामले में रवि किशन का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन और संजय उपाध्याय के नेतृत्व में वकीलों की एक टीम ने किया, जिसमें कृष्ण कुमार शुक्ला, नीरज ग्रोवर, माधव आनंद, एल्विन एंटनी, प्रणव प्रसून और मानसी बचानी शामिल थे।
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