16वें दिन भी जारी CJP का प्रदर्शन, भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक का वजन 6 किलो घटा

नीट पेपर लीक और परीक्षा धांधली को लेकर जंतर-मंतर पर छात्रों का गुस्सा बरकरार, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग के बीच जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल ने आंदोलन को दी नई धार।
Sonam Wangchuk hunger strike
नीट परीक्षा धांधली के खिलाफ जंतर-मंतर पर CJP का विरोध 16वें दिन जारी। अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक का वजन 6 किलो घटा।फोटो साभार- @Cockroachisback
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नई दिल्ली: कथित परीक्षा धांधली और पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का विरोध प्रदर्शन रविवार, 5 जुलाई को 16वें दिन में प्रवेश कर गया। आंदोलनकारी लगातार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग पर अड़े हुए हैं। इस बीच, चर्चित जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का यह आठवां दिन था। इस कठिन उपवास के कारण अब तक उनका करीब छह किलो वजन कम हो चुका है।

डॉक्टरों द्वारा जारी किए गए हेल्थ बुलेटिन के अनुसार, लेटते समय श्री वांगचुक का रक्तचाप 112/70 mm Hg दर्ज किया गया है। उनके हृदय की गति 72 बीट्स प्रति मिनट और ब्लड शुगर लेवल 67 mg/dL बना हुआ है।

मेडिकल रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि उनके शरीर में पानी की मात्रा (हाइड्रेशन) ठीक है और वह मानसिक रूप से पूरी तरह सतर्क हैं। हालांकि, उनका वर्तमान वजन गिरकर 60.95 किलोग्राम हो गया है, जो सात दिनों में लगभग छह किलो की गिरावट को दर्शाता है।

CJP लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रही है। उनका आरोप है कि बार-बार होने वाली परीक्षा में अनियमितताओं और पेपर लीक ने अनगिनत छात्रों व उनके परिवारों का जीवन तबाह कर दिया है।

इसी कड़ी में CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी दी कि रविवार (5 जुलाई) को नीट अभ्यर्थी रिया कुमारी थापा के माता-पिता विरोध स्थल पर पहुंचे थे। संगठन का दावा है कि कथित पेपर लीक के कारण रिया के सपने टूट गए थे, जिसके बाद उसकी दुखद मौत हो गई।

श्री दिपके ने बताया कि रिया के पिता एक पूर्व सैनिक हैं और वह इस गुहार के साथ विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए कि किसी अन्य परिवार को वह दर्द न सहना पड़े जो उनके परिवार ने झेला है। उन्होंने केंद्र सरकार से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

एक अन्य पोस्ट में CJP ने स्पष्ट किया कि वह इस दुख की घड़ी में थापा के माता-पिता के साथ मजबूती से खड़ी है और उस भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगी जिसने उनकी बेटी को निराश किया।

मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (NEET) 3 मई को आयोजित की गई थी। लेकिन पेपर लीक के गंभीर आरोपों के बीच इसे रद्द कर दिया गया था। इसके बाद 21 जून को दोबारा परीक्षा (री-टेस्ट) आयोजित की गई थी।

दूसरी ओर, संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने पहले ही CJP के इस आंदोलन को अपना समर्थन दे दिया है। अब यह किसान संगठन 7 जुलाई को जंतर-मंतर पर अपना एक प्रतिनिधिमंडल भेजने जा रहा है। इससे पहले SKM ने CJP को लिखे अपने पत्र में कहा था कि उनका प्रतिनिधिमंडल रविवार (6 जुलाई) को विरोध स्थल का दौरा करेगा।

किसान निकाय ने आंदोलनरत छात्रों और युवाओं के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा है कि पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय परीक्षा प्रणाली हर छात्र का मौलिक अधिकार है और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार का कर्तव्य है।

विरोध स्थल पर एक अलग मंच पर वामपंथी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के कई सदस्य भी अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर डटे हुए हैं। शनिवार (4 जुलाई) को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (JNUSU) की संयुक्त सचिव दानिश अली को राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

भूख हड़ताल के सातवें दिन उनका ब्लड शुगर लेवल खतरनाक रूप से गिरकर 46 mg/dL तक पहुंच गया था।

इस बीच, विरोध स्थल पर नेहा, मनीष, ऋषिकेश, दीपक कुमार वर्मा और आमीन का अनिश्चितकालीन उपवास लगातार जारी है। देश की परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं को लेकर 20 जून से शुरू हुए CJP के इस विरोध प्रदर्शन को अब तक कई बड़े राजनीतिक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज के सदस्यों का व्यापक समर्थन मिल चुका है।

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