प्रतापगढ़ का फर्जी वकील एमके त्रिपाठी: दुश्मनों के नाम FIR में डलवाकर करता था लाखों की वसूली, पुलिस का ख़ुलासा पढ़िए

प्रतापगढ़ में फर्जी वकील का भंडाफोड़: पुरानी रंजिश निकालने के लिए दूसरों की FIR में जुड़वाता था दुश्मनों के नाम, मुकदमों से बचाने के नाम पर ऐंठता था मोटी रकम।
fake lawyer MK Tripathi Pratapgarh
प्रतापगढ़ में एक शातिर फर्जी वकील का भंडाफोड़। दुश्मनों का नाम झूठी FIR में डलवाकर करता था लाखों की वसूली।(Ai Image)
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उत्तर प्रदेश: प्रतापगढ़ जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक शातिर व्यक्ति फर्जी वकील बनकर न सिर्फ आम लोगों को ठग रहा था, बल्कि अपनी निजी दुश्मनी निकालने के लिए विरोधियों को झूठे मुकदमों में फंसाकर उनसे मोटी रकम भी ऐंठ रहा था।

इस पूरे गोरखधंधे का पर्दाफाश फतनपुर थाने में दर्ज एक एफआईआर की जांच के दौरान हुआ। पुलिस को तफ्तीश में पता चला कि मामले में नामजद किए गए एक आरोपी का शिकायतकर्ता या विवाद से दूर-दूर तक कोई नाता ही नहीं था। जब इस कड़ी को आगे जोड़ा गया, तो शक की सूई खुद को वकील बताने वाले एमके त्रिपाठी पर जाकर टिक गई।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि एमके त्रिपाठी ने अपनी रंजिश निकालने के लिए अलग-अलग थानों में दर्ज शिकायतों में बड़ी चालाकी से अपने एक प्रतिद्वंद्वी और उसके पिता का नाम जुड़वा दिया था। इस तरह उसने उन्हें कम से कम दो से तीन आपराधिक मामलों में फंसाया।

अब पुलिस ने एक नई शिकायत के आधार पर फतनपुर थाने में त्रिपाठी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है और मामले की गहरी छानबीन शुरू कर दी है।

पुलिस के मुताबिक, यह शिकायत कैलीडीह गांव के रहने वाले जीपी तिवारी ने दर्ज कराई है। तिवारी ने आरोप लगाया है कि उनके ही गांव का रहने वाला एमके त्रिपाठी फतनपुर और अन्य थानों में आने वाले लोगों के लिए अक्सर शिकायतें और प्रार्थना पत्र लिखने का काम करता है। इसी पहुंच का फायदा उठाकर उसने अपनी निजी दुश्मनी साधने की साजिश रची।

जीपी तिवारी का कहना है कि एक सड़क विवाद को लेकर त्रिपाठी उनसे पुरानी खुन्नस रखता था। इसी खुन्नस में और पैसे ऐंठने की नीयत से उसने दूसरों की आपराधिक शिकायतों में तिवारी और उनके पिता का नाम डलवा दिया। इसके चलते पुलिस केस बने और पूरे परिवार को काफी मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।

शिकायतकर्ता ने बताया कि इन झूठे मुकदमों से अपना नाम हटवाने के लिए उन्हें मजबूरी में त्रिपाठी को दो अलग-अलग मौकों पर 15,000 रुपये और 10,000 रुपये की रिश्वत देनी पड़ी। इसके बावजूद आरोपी का लालच कम नहीं हुआ और उसने एक तीसरे फर्जी मामले से नाम हटाने के एवज में 50,000 रुपये की और डिमांड कर दी।

तिवारी ने पुलिस को यह भी बताया कि त्रिपाठी ने पैसे न देने पर उन्हें और उनके पिता को और भी कई झूठे मुकदमों में फंसाकर बर्बाद करने की धमकी दी थी।

अपनी शिकायत में तिवारी ने यह अहम खुलासा भी किया है कि एमके त्रिपाठी के पास वकालत करने का कोई लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन मौजूद नहीं है। वह भोले-भाले लोगों को फंसाने और जबरन वसूली के अपने धंधे को चलाने के लिए सिर्फ एक वकील होने का चोला पहने हुए था। पुलिस अब इस फर्जी वकील के अन्य कारनामों की भी कुंडली खंगाल रही है।

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