'प्रियदर्शिनी योजना' का असर: KSRTC बसों में महिला यात्रियों की संख्या 12 लाख के पार, मंत्री सी.पी. जॉन ने पेश किए ये आंकड़े

KSRTC की 'प्रियदर्शिनी योजना' से महिला यात्रियों की संख्या में 87% का भारी उछाल, वहीं परिवहन मंत्री सीपी जॉन ने अस्थायी कर्मचारियों की छंटनी की खबरों को बताया अफवाह।
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केरल की 'प्रियदर्शिनी योजना' का बड़ा असर! KSRTC बसों में महिला यात्रियों की संख्या में 87% का भारी उछाल।
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केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) की बसों में महिलाओं और ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए शुरू की गई 'प्रियदर्शिनी मुफ्त यात्रा योजना' के बेहद शानदार परिणाम सामने आए हैं। इस योजना के लागू होने के बाद, साधारण बसों में सफर करने वाली महिला यात्रियों की दैनिक संख्या 6.48 लाख से बढ़कर 12.12 लाख हो गई है। यह सीधे तौर पर 87 प्रतिशत की भारी वृद्धि है। गुरुवार को एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए परिवहन मंत्री सी.पी. जॉन ने बताया कि अब KSRTC की साधारण बसों की कुल क्षमता का लगभग दो-तिहाई हिस्सा महिला यात्रियों का है।

हालिया समीक्षा रिपोर्ट के आंकड़ों पर गौर करें तो, KSRTC की साधारण बसों में महिलाओं की हिस्सेदारी 50.9 प्रतिशत से उछलकर 66.6 प्रतिशत तक पहुंच गई है। केवल साधारण बसें ही नहीं, बल्कि सुपर-क्लास सेवाओं को मिलाकर KSRTC बसों में रोजाना सफर करने वाले कुल यात्रियों की औसत दैनिक संख्या भी 19.03 लाख से बढ़कर 24.53 लाख हो गई है। यह कुल यात्री संख्या में 28.9 प्रतिशत का जबरदस्त इजाफा है।

परिवहन मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह केवल मौजूदा यात्रियों की संख्या में बदलाव नहीं है, बल्कि सार्वजनिक परिवहन के लिए एक नई यात्रा मांग (इंड्यूस्ड डिमांड) का निर्माण है। खास बात यह है कि साधारण बसों में इस मुफ्त योजना के बावजूद पुरुष यात्रियों की संख्या लगभग स्थिर बनी हुई है। मंत्री के मुताबिक, यह आंकड़े साबित करते हैं कि महिलाओं की संख्या में हुई यह वृद्धि अन्य यात्रियों की कीमत पर नहीं हुई है। इन अतिरिक्त यात्रियों को मौजूदा बस नेटवर्क में ही समायोजित किया गया है, जिससे प्रति यात्री ईंधन की खपत में उल्लेखनीय कमी आई है और कार्बन उत्सर्जन भी घटा है।

वहीं दूसरी ओर, परिवहन मंत्री ने उन मीडिया रिपोर्ट्स और दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि KSRTC ने 200 अस्थायी कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। दरअसल, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी [CPI(M)] ने आरोप लगाया था कि कासरगोड, कोझिकोड और त्रिशूर जिलों में रोजगार कार्यालय के माध्यम से भर्ती किए गए 200 अस्थायी कर्मचारियों को निगम ने हटा दिया है। पार्टी का यह भी दावा था कि लगभग 6,000 अस्थायी कर्मचारियों को पिछले डेढ़ महीने से वेतन नहीं मिला है।

CPI(M) के अनुसार, अस्थायी कर्मचारियों का वेतन चुकाने के लिए KSRTC को हर महीने लगभग 12 करोड़ रुपये की आवश्यकता होती है, लेकिन अब तक केवल 3 करोड़ रुपये ही मंजूर किए गए हैं। पार्टी ने इन कथित छंटनियों के कारण अंतर-जिला सेवाओं सहित दैनिक बस संचालन के बुरी तरह प्रभावित होने का आरोप लगाया था। हालांकि, मंत्री सी.पी. जॉन ने कड़े शब्दों में यह साफ किया कि मौजूदा सरकार के सत्ता में आने के बाद से किसी भी अस्थायी कर्मचारी को नहीं निकाला गया है।

हालांकि, परिवहन मंत्री ने इस बात को जरूर स्वीकार किया कि कुछ कर्मचारियों के वेतन वितरण में देरी हुई है। उन्होंने कर्मचारियों को भरोसा दिलाया कि इस समस्या का जल्द ही समाधान कर लिया जाएगा। इसके साथ ही, मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि राज्य सरकार ने KSRTC डिपो के व्यापक विकास को सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक डिपो में एक 'परिवहन प्रबंधन समिति' (Transport Management Committee) के गठन को अपनी मंजूरी दे दी है।

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