छत्रपति संभाजीनगर: आदिवासी छात्रों के हक के लिए सड़कों पर उतरी NSUI, 'उलगुलान' मार्च निकालकर बुलंद की आवाज

छात्रवृत्ति में देरी और हॉस्टल की समस्याओं पर सरकार को घेरा, कलेक्टर के माध्यम से सौंपा 12 सूत्रीय ज्ञापन
NSUI Protest, Ulgulan March
छत्रपति संभाजीनगर में NSUI ने आदिवासी छात्रों के हक में निकाला 'उलगुलान' मार्च। स्कॉलरशिप और हॉस्टल के मुद्दों पर प्रशासन को सौंपा ज्ञापन। पूरी खबर पढ़ें।(Ai Image)
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छत्रपति संभाजीनगर/औरंगाबाद: आदिवासी छात्रों की समस्याओं की लगातार हो रही अनदेखी के विरोध में कांग्रेस से जुड़े छात्र संगठन ‘नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया’ (NSUI) ने बुधवार को जोरदार प्रदर्शन किया। संगठन ने आदिवासी विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए शाहगंज स्थित गांधी भवन से जिला कलेक्टर कार्यालय तक 'उलगुलान' मार्च निकाला। इस दौरान छात्रों की नारेबाजी से पूरा परिसर गूंज उठा और रैली का समापन प्रशासन को ज्ञापन सौंपने के साथ हुआ।

योजनाओं में देरी से छात्रों का भविष्य अधर में

NSUI के प्रदेश महासचिव एडवोकेट सुभाष गावित के नेतृत्व में निकाले गए इस मार्च में छात्रों का गुस्सा साफ दिखाई दिया। संगठन का आरोप है कि शिक्षा, छात्रवृत्ति, छात्रावास और अन्य कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने में हो रही देरी का सीधा असर आदिवासी छात्रों के भविष्य पर पड़ रहा है। कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया है कि 'पंडित दीनदयाल स्वयं योजना' के तहत किए गए कई आवेदन अभी भी लंबित पड़े हैं, जिससे जरूरतमंद छात्र इस योजना के लाभ से वंचित हो रहे हैं।

DBT और हॉस्टल प्रवेश को लेकर उठी मांग

संगठन ने प्रशासन के सामने स्पष्ट मांग रखी है कि लंबित आवेदनों को तत्काल मंजूरी दी जाए और छात्रों को डीबीटी (DBT) प्रणाली के माध्यम से सीधे आर्थिक सहायता मुहैया कराई जाए। साथ ही, डीबीटी के तहत मिलने वाली राशि में बढ़ोतरी की भी मांग की गई है। NSUI ने सुझाव दिया कि यदि ऐसा संभव नहीं है, तो पात्र छात्रों को सरकारी छात्रावासों में बिना किसी शर्त के सीधे प्रवेश दिया जाए।

कॉलेजों की मनमानी पर रोक लगाने की अपील

प्रदर्शनकारी छात्रों ने एक गंभीर मुद्दा उठाते हुए कहा कि कुछ कॉलेज स्कॉलरशिप के प्रावधानों के बावजूद आदिवासी छात्रों से अतिरिक्त फीस वसूल रहे हैं। संगठन ने ऐसे संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। इसके अलावा, यूजीसी (UGC) के नियमों को कड़ाई से लागू करने, छात्रावासों में सुविधाओं को बेहतर बनाने और अनुदानित व गैर-अनुदानित स्कूलों की जांच की भी मांग उठाई गई।

12 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा

आंदोलन के अंत में, इन सभी मुद्दों को शामिल करते हुए 12 मांगों का एक विस्तृत ज्ञापन जिला कलेक्टर के माध्यम से आदिवासी विकास विभाग, नासिक के आयुक्त को भेजा गया। इस प्रदर्शन में डॉ. शादाब शेख, जिला अध्यक्ष अभिषेक शिंदे, सृजन गावड़े और रोहित जाधव सहित बड़ी संख्या में छात्र और पदाधिकारी मौजूद रहे।

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