महाराष्ट्र: अहिल्यानगर जिले से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। यहाँ NEET-UG परीक्षा के कटऑफ में कुछ अंकों से पिछड़ने के बाद 19 साल की एक मेडिकल छात्रा ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। इस घटना ने एक बार फिर देश की कठिन मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं से जुड़े भारी मानसिक दबाव को उजागर किया है।
मृतका की पहचान अंकिता सुरेश सांगले के रूप में हुई है। वह कर्जत तालुका के जलालपुर गांव की रहने वाली थी। पुलिस को घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी मिला है। इस खत से साफ पता चलता है कि परीक्षा परिणामों को लेकर अंकिता गहरे मानसिक तनाव से गुजर रही थी।
घटना की सूचना मिलते ही कर्जत पुलिस स्टेशन की एक टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इंस्पेक्टर हनुमान गायकवाड़ ने बताया कि शुरुआती जांच और सुसाइड नोट से स्पष्ट है कि अंकिता अपने परीक्षा प्रदर्शन के कारण भारी डिप्रेशन में थी। फिलहाल पुलिस ने एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (ADR) दर्ज कर ली है और मामले की आगे की जांच की जा रही है।
अंकिता के पिता एक किसान हैं और परिवार में उसके माता-पिता के अलावा एक भाई है। शनिवार, 25 जुलाई की दोपहर जब उसके पिता और भाई पंढरपुर दर्शन के लिए गए हुए थे और मां घर के कामों में व्यस्त थीं, तभी अंकिता अपने कमरे में चली गई। शाम करीब 4.30 बजे जब मां उसे देखने गई, तब इस खौफनाक कदम के बारे में पता चला। उसी रात अंकिता का अंतिम संस्कार भी कर दिया गया।
अंकिता के चाचा अन्ना सांगले ने मीडिया से बातचीत में परीक्षा प्रक्रिया और इसके मानसिक असर की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अंकिता ने पहली बार 3 मई को NEET-UG की परीक्षा दी थी और वह अपने प्रदर्शन को लेकर काफी आश्वस्त थी। लेकिन पेपर लीक के कारण परीक्षा रद्द होने के बाद, उसे 21 जून को फिर से परीक्षा देनी पड़ी।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 16 जुलाई को NEET-UG रीटेस्ट के नतीजे घोषित किए थे। अंकिता के चाचा ने बताया कि उसे इस परीक्षा में 166 अंक मिले, जो उसकी कैटेगरी के कटऑफ 177 से थोड़ा ही कम थे। कटऑफ पूरा न कर पाने के बाद से ही वह लगातार तनाव महसूस कर रही थी।
यह कोई इकलौता मामला नहीं है जब किसी छात्र ने इस परीक्षा के दबाव में हार मान ली हो। हालिया मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, NEET-UG 2026 के रद्द होने और 21 जून को हुए राष्ट्रव्यापी रीटेस्ट के बीच के कुछ हफ्तों में ही, देशभर में कम से कम 12 छात्रों ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। यह आंकड़े छात्रों पर परीक्षा के जानलेवा दबाव की भयावह तस्वीर पेश करते हैं।
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