नई दिल्ली: बिहार के सीवान में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़प के एक दिन बाद पुलिस ने हवाई फायरिंग करने की बात कबूल की है। पुलिस का आरोप है कि शनिवार को हुई इस हिंसा के दौरान उपद्रवियों ने उन पर सीधा हमला किया था। हालांकि, इस पूरी घटना में गोली लगने से घायल हुए एक शख्स की कहानी बेहद चौंकाने वाली है। पीड़ित का कहना है कि वह अपने गांव से सीवान महज एक प्रमाण पत्र बनवाने आया था और जिलाधिकारी (डीएम) कार्यालय जाते समय उसके पैर में गोली लग गई।
यह पूरा बवाल नीट (NEET) पेपर लीक मामले और दिल्ली में छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में शनिवार को बुलाए गए बिहार बंद के दौरान हुआ। सीवान जिले में प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया, जिसमें तीन लोगों को गोली लगी है। इसके अलावा सीवान के पुलिस अधीक्षक (एसपी) पूरन कुमार झा समेत दर्जनों पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। हालात को काबू में करने के लिए पुलिस ने 400 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है।
रविवार को घटना की विस्तृत जानकारी देते हुए एसपी पूरन कुमार झा ने बताया कि अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि तीनों घायलों को पुलिस की गोली लगी है या किसी और की। उन्होंने इस बात की पुष्टि जरूर की कि घायल बुलेट कुमार गोंड को पुलिस फायरिंग के दौरान ही पैर में गोली लगी थी। हालांकि, एसपी ने यह भी कहा कि बाकी दो घायलों को जिन स्थानों पर गोली लगी, वहां पुलिस की कोई तैनाती नहीं थी।
गरौली थाना क्षेत्र के डुमरहर बुजुर्ग गांव के रहने वाले बुलेट कुमार गोंड ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि वह अपने दोस्त के कहने पर जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सीवान आए थे। स्टेशन पर उतरने के बाद उन्होंने हर तरफ झड़प होते देखी। गोंड के मुताबिक, वह डीएम कार्यालय की तरफ जा ही रहे थे कि तभी एक गोली उनके पैर के आर-पार हो गई।
गोलीबारी का शिकार हुए अन्य दो युवकों की पहचान आकाश और आरिफ के रूप में हुई है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इनमें से एक के कंधे पर और दूसरे को कंधे और गर्दन के बीच गोली लगी है। गनीमत यह रही कि तीनों युवक सुरक्षित हैं और उनकी हालत में तेजी से सुधार हो रहा है। पुलिस अब इस बात की गहनता से जांच कर रही है कि इन दोनों को गोलियां आखिर कहां से लगीं।
फायरिंग का ब्योरा देते हुए एसपी झा ने बताया कि हालात बिगड़ने पर मजबूरन हवाई फायरिंग करनी पड़ी। पुलिस की ओर से लंबी दूरी के हथियारों से चार राउंड और पिस्तौल से तीन राउंड फायर किए गए। कुल मिलाकर लगभग आठ से दस राउंड गोलियां चली हैं। बाकी गोलियां कहां से और किसने चलाईं, इसकी भी जांच की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि उग्र भीड़ ने सरकारी और सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया है।
इससे पहले शनिवार को पुलिस ने स्पष्ट किया था कि केवल एक ही गुट को प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी, लेकिन गांधी मैदान में कई गुट इकट्ठा हो गए। देखते ही देखते ये गुट आपस में ही भिड़ गए, जिसके बाद पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा और आंसू गैस के छह से सात गोले दागने पड़े। अधिकारियों के अनुसार, सीवान के जेपी चौक, सदर अस्पताल मोड़, कागजी मोहल्ला, गोपालगंज मोड़ और कचहरी रेलवे क्रॉसिंग पर प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ जमा होकर उग्र हो गई थी।
पथराव शुरू होने के बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया और भीड़ को तितर-बितर करने का प्रयास किया। लाठीचार्ज के बाद उग्र भीड़ ने गोपालगंज मोड़ से सीवान कचहरी रेलवे क्रॉसिंग की ओर बढ़ते हुए पुलिस बैरिकेड्स तोड़ दिए। इस भीषण हिंसा के दौरान 19 सरकारी और एक निजी वाहन को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया। झड़प में 58 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं और कुल 423 लोगों को हिरासत में लेकर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
इस घटना के बाद राज्य का सियासी पारा भी चढ़ गया है। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आरोप लगाया कि पुलिस ने छात्रों पर फायरिंग की है और इसमें एके-47 राइफल का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, उनके इस गंभीर दावे की अभी तक किसी भी स्वतंत्र स्तर पर कोई पुष्टि नहीं हो पाई है। पुलिस का स्पष्ट कहना है कि बल प्रयोग केवल तभी किया गया जब प्रदर्शनकारियों ने जवानों पर हमला किया।
हिंसा को देखते हुए बिहार सरकार ने तुरंत कड़ा कदम उठाते हुए सीवान जिले में इंटरनेट और मैसेजिंग सेवाओं को 24 घंटे के लिए निलंबित कर दिया था। यह प्रतिबंध 25 जुलाई की शाम 5:30 बजे से 26 जुलाई की शाम 5:30 बजे तक लागू रहा। गृह विभाग ने असामाजिक तत्वों द्वारा अफवाह फैलाने और भड़काऊ सामग्री साझा करने की आशंका के चलते यह आदेश जारी किया था।
हालांकि, बैंकिंग, रेलवे और जरूरी सरकारी संचार सेवाओं को इस रोक से मुक्त रखा गया था। सीवान के अलावा पटना और छपरा में भी छिटपुट हिंसा की खबरें सामने आई हैं, जबकि राज्य के अन्य हिस्सों में बंद शांतिपूर्ण रहा।
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