
चेन्नई – फिल्म निर्देशक पा. रंजीत द्वारा स्थापित नीलम सांस्कृतिक केंद्र ने मद्रास उच्च न्यायालय के हालिया आदेश की कड़ी आलोचना करते हुए इसे ‘अत्यधिक विरोधाभासी’ बताया है। केंद्र के अनुसार, यह आदेश बकरीद के दौरान गोवध पर प्रतिबंध लगाकर नागरिकों की खानपान स्वतंत्रता और धार्मिक आस्थाओं का हनन करता है।
जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और वी. लक्ष्मीनारायणन की पीठ ने यह आदेश हिंदू मुन्नानी के सदस्य सूर्य प्रसाद द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में केवल कॉयम्बटूर निगम सीमा के भीतर सार्वजनिक स्थानों पर बकरीद के दौरान गोवध को रोकने की मांग की गई थी। लाइसेंसी बूचड़खानों में गोवध पर प्रतिबंध या पूरे तमिलनाडु में बैन की कोई मांग याचिका में नहीं थी।
गुरुवार को जारी बयान में नीलम सांस्कृतिक केंद्र ने कहा कि आदेश के एक हिस्से में निर्देश दिया गया कि “गायों का वध केवल मान्यता प्राप्त बूचड़खानों में, तमिलनाडु पशु संरक्षण अधिनियम, 1958 और तमिलनाडु शहरी स्थानीय निकाय अधिनियम, 1998 के अनुसार, और उनमें निर्धारित प्रमाणपत्रों के साथ किया जाए ” जबकि उसी आदेश के निष्कर्ष में एक विरोधाभासी निर्देश देते हुए कहा गया कि “बकरीद के दिन या किसी अन्य दिन गायों का वध नहीं किया जाएगा।”
रंजीत ने जारी बयान में कहा, “ऐसा आदेश न केवल अल्पसंख्यक समुदायों की धार्मिक मान्यताओं में हस्तक्षेप करता है, बल्कि बहुसंख्यक आबादी के खानपान अधिकारों का भी उल्लंघन करता है। याचिका में उन वैधानिक प्रावधानों को चुनौती नहीं दी गई थी जो मान्यता प्राप्त बूचड़खानों में भोजन के लिए पशु वध की अनुमति देते हैं। न ही यह जांच की गई कि क्या वे विशेष प्रावधान संविधान का उल्लंघन करते हैं।”
रंजीत ने चिंता जताई कि अदालत ने 50 साल पुराने बिना दिनांक वाले सरकारी आदेश और संविधान के नीति निदेशक तत्वों का हवाला देते हुए, बिना विपक्षी वकील को बहस का अवसर दिए, यह भ्रमित करने वाला आदेश जारी कर दिया। केंद्र ने यह भी आशंका जताई कि पुलिस इस आदेश का गलत अर्थ निकालकर गोमांस की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा सकती है।
बयान में कहा गया, “अदालतों को जनता के खानपान पर मनमाने ढंग से निर्देश नहीं देने चाहिए।"
नीलम सांस्कृतिक केंद्र ने तमिलनाडु सरकार से तत्काल इस आदेश पर स्पष्टीकरण के लिए याचिका दायर करने का आग्रह किया है। केंद्र ने कहा कि अगर अदालत स्पष्टीकरण स्वीकार करने से इनकार करती है, तो सरकार को अपील दायर करनी चाहिए। साथ ही केंद्र ने जोर दिया कि लोगों के खानपान अधिकारों और अल्पसंख्यक समुदायों की धार्मिक मान्यताओं की रक्षा करना सरकार का कर्तव्य है।
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