कर्नाटक: 56,000 सरकारी भर्तियों में आंतरिक आरक्षण पर कांग्रेस में रार, दलित नेताओं में ठनी

कर्नाटक में 56,000 सरकारी भर्तियों पर घमासान, आंतरिक आरक्षण (Internal Reservation) को लेकर कांग्रेस के दलित गुट आमने-सामने।
Karnataka Internal Reservation
कर्नाटक में 56,000 सरकारी नौकरियों में आंतरिक आरक्षण लागू न होने से कांग्रेस के दलित नेताओं में बगावत। जानें क्या है लेफ्ट-राइट गुटों का यह पूरा विवाद।(Ai Image)
Published on

बेंगलुरु: कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता की खींचतान के बीच एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। राज्य में 56,000 सरकारी पदों पर होने वाली आगामी भर्तियों में 'आंतरिक आरक्षण' (Internal Reservation) लागू न करने के सरकार के रुख ने पार्टी के भीतर ही अनुसूचित जाति (SC) के 'लेफ्ट-हैंड' (Left-hand) और 'राइट-हैंड' (Right-hand) समुदायों के बीच गहरी खाई पैदा कर दी है।

दलित लेफ्ट-हैंड समुदाय के नेताओं ने इस पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उन्हें डर है कि अगर मौजूदा कोटे के भीतर आंतरिक आरक्षण की व्यवस्था लागू नहीं की गई, तो उनके अवसरों में भारी कमी आ सकती है। इस पूरे घटनाक्रम ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर सियासी दबाव काफी बढ़ा दिया है।

विवाद की असल जड़ क्या है?

इससे पहले, कर्नाटक सरकार ने जस्टिस एच. एन. नागमोहन दास समिति की सिफारिशों को मानते हुए अनुसूचित जाति के लिए आरक्षण बढ़ाकर 17 प्रतिशत करने का फैसला किया था। लेकिन, इस कदम से कुल आरक्षण 50 प्रतिशत की सीमा को पार कर लगभग 56 प्रतिशत हो गया, जिसके चलते एक कानूनी अड़चन आ गई। इसके बाद, भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने इस बढ़े हुए कोटे के कार्यान्वयन पर रोक लगा दी।

दूसरी तरफ, धारवाड़ में खाली पड़े सरकारी पदों पर तुरंत भर्ती की मांग को लेकर नौकरी के इच्छुक युवाओं ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए। इसके दबाव में आकर राज्य कैबिनेट ने मौजूदा 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा के तहत ही लगभग 56,000 पदों को भरने का फैसला लिया।

हालांकि, विवाद तब गहरा गया जब सरकार ने कथित तौर पर भर्ती प्रक्रिया के दौरान अनुसूचित जाति के लिए निर्धारित 15 प्रतिशत कोटे के भीतर आंतरिक आरक्षण न देने का मन बनाया। इसका सीधा मतलब यह है कि भर्तियां एससी श्रेणी के तहत एक सामान्य वितरण के माध्यम से की जाएंगी।

'आंतरिक कोटा लागू करे सरकार' - दलित नेताओं की मांग

सरकार के इस संभावित फैसले ने दलित लेफ्ट-हैंड समुदाय के नेताओं को आक्रोशित कर दिया है। उनकी स्पष्ट मांग है कि 15 प्रतिशत एससी कोटे के भीतर हर हाल में आंतरिक आरक्षण लागू किया जाए। उनका तर्क है कि पदों का बंटवारा उसी पैटर्न पर होना चाहिए, जो पहले 17 प्रतिशत आरक्षण ढांचे के तहत प्रस्तावित था।

इन नेताओं का मानना है कि यदि 15 प्रतिशत कोटे के भीतर आंतरिक आरक्षण लागू नहीं होता है, तो अनुसूचित जाति समुदाय के भीतर आने वाली कई उप-जातियों को उनका उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाएगा। इस मुद्दे ने कांग्रेस के भीतर भी राजनीतिक तनाव पैदा कर दिया है। लेफ्ट-हैंड समुदाय के नेताओं का सीधा आरोप है कि आंतरिक आरक्षण लागू करने में हो रही देरी दरअसल राइट-हैंड समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले मंत्रियों के दबाव का नतीजा है।

अलग-अलग बैठकें और बढ़ता राजनीतिक दबाव

इस बढ़ते विवाद के बीच, दोनों गुटों के नेताओं ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से अलग-अलग मुलाकात कर अपनी चिंताएं जाहिर की हैं। उन्होंने मांग रखी है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान 15 प्रतिशत कोटे के वितरण में आंतरिक आरक्षण सुनिश्चित किया जाए।

आर. बी. तिम्मापुर और के. एच. मुनियप्पा जैसे वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों ने आंतरिक आरक्षण को तुरंत लागू करने का जोरदार समर्थन किया है। वहीं, राइट-हैंड दलित समुदाय के मंत्रियों ने अभी तक इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है, जिससे दूरियां और बढ़ रही हैं। इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता गोविंद करजोल ने भी मांग की है कि सरकार आगामी कैबिनेट बैठक में आंतरिक आरक्षण लागू करने के स्पष्ट आदेश जारी करे।

अहम कैबिनेट बैठक पर टिकी निगाहें

गुरुवार शाम को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अध्यक्षता में कैबिनेट की एक महत्वपूर्ण बैठक होनी है, जिसमें आंतरिक आरक्षण के इस गरमागरम मुद्दे पर चर्चा होने की पूरी संभावना है। सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे दोनों ने दलित मंत्रियों को यह सलाह दी है कि अंतिम निर्णय लिए जाने से पहले वे आपस में आम सहमति बनाएं।

पिछली कैबिनेट बैठक में 50 प्रतिशत आरक्षण ढांचे के आधार पर भर्ती के दिशा-निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन उसमें आंतरिक आरक्षण को शामिल नहीं किया गया था। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार अपने दिशा-निर्देशों में संशोधन कर आंतरिक आरक्षण को जगह देगी।

आगामी कैबिनेट बैठक में लिया गया फैसला न केवल कर्नाटक कांग्रेस के आंतरिक समीकरणों, बल्कि राज्य भर के अनुसूचित जाति समुदायों के बीच बड़े और महत्वपूर्ण राजनीतिक मायने रखेगा।

Karnataka Internal Reservation
तेलंगाना के सिद्धपेट में अंबेडकर प्रतिमा का चबूतरा तोड़े जाने पर भड़के दलित कार्यकर्ता, पुलिस की मौजूदगी में किया नया निर्माण
Karnataka Internal Reservation
राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस ने हरियाणा से दलित कार्यकर्ता कर्मवीर सिंह बौद्ध को चुना, जानिए पार्टी ने क्यों जताया भरोसा?
Karnataka Internal Reservation
13 साल का संघर्ष लाया रंग: कन्याकुमारी में डॉ. अंबेडकर की 9 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा का अनावरण करेंगे डिप्टी सीएम उदयनिधि

द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.

द मूकनायक की मदद करें

‘द मूकनायक’ जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है. अगर आप भी चाहते हैं कि ‘द मूकनायक’ हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज़ बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहे तो सपोर्ट करें.

यहां सपोर्ट करें
The Mooknayak - आवाज़ आपकी
www.themooknayak.com