
नाशिक: महाराष्ट्र के नाशिक में सोमवार को गणतंत्र दिवस 2026 के मुख्य समारोह के दौरान एक अप्रत्याशित और चौंकाने वाली घटना देखने को मिली। पुलिस परेड ग्राउंड पर आयोजित इस सरकारी कार्यक्रम में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब वन विभाग की एक महिला अधिकारी ने मंच पर भाषण दे रहे राज्य के ग्राम विकास मंत्री गिरीश महाजन के संबोधन में टोक दिया। महिला अधिकारी ने मंत्री पर आरोप लगाया कि उन्होंने अपने भाषण में संविधान निर्माता डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर का नाम नहीं लिया।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना ध्वजारोहण समारोह के ठीक बाद घटी। मंत्री गिरीश महाजन जब सभा को संबोधित कर रहे थे, तभी दर्शकों के बीच मौजूद वन विभाग की अधिकारी, जिनकी पहचान माधुरी जाधव के रूप में हुई है, ने अपनी नाराजगी जाहिर करनी शुरू कर दी। उन्होंने दहाड़ते हुए मंत्री के भाषण पर आपत्ति जताई और सवाल किया कि आखिर उन्होंने डॉ. बी.आर. अंबेडकर का जिक्र क्यों नहीं किया। जाधव ने चिल्लाते हुए पूछा, "आपने डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर का नाम क्यों नहीं लिया?"
समारोह में मची खलबली
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, माधुरी जाधव अचानक अपनी सीट से उठीं और विरोध जताते हुए मैदान की तरफ दौड़ने लगीं। इस अचानक हुए वाकये से वहां मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों, पुलिस कर्मियों और आम जनता के बीच कुछ पलों के लिए भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। कार्यक्रम में व्यवधान उत्पन्न होता देख वहां तैनात सुरक्षाकर्मी तुरंत हरकत में आ गए।
मौके पर मौजूद महिला पुलिसकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए माधुरी जाधव को रोका और उन्हें हिरासत में ले लिया, ताकि समारोह सुचारू रूप से संपन्न हो सके। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से स्थिति को कुछ ही मिनटों में नियंत्रित कर लिया गया।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
इस घटना के बाद माधुरी जाधव के विरोध का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वह काफी आक्रोशित नजर आ रही हैं और यह कहते हुए सुनी जा सकती हैं कि उन्हें निलंबन (सस्पेंशन) का कोई डर नहीं है, लेकिन वे अन्याय पर चुप नहीं रहेंगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि समानता और न्याय के संवैधानिक मूल्य डॉ. अंबेडकर के कार्यों की देन हैं, ऐसे में गणतंत्र दिवस के अवसर पर उनका नाम न लिया जाना स्वीकार्य नहीं है।
मंत्री ने दी सफाई: 'यह जानबूझकर नहीं हुआ'
समारोह में हुए इस हंगामे के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया था। हालांकि, मंत्री गिरीश महाजन ने बाद में इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि भाषण के दौरान डॉ. बी.आर. अंबेडकर का नाम छूट जाना महज एक संयोग था और इसके पीछे कोई गलत मंशा नहीं थी। महाजन ने स्पष्ट किया, "नाम अनजाने में छूट गया था, यह जानबूझकर नहीं किया गया।"
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