मवाना में दिव्यांगों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग तेज हो गई है। इसे लेकर जन सहभागिता फाउण्डेशन ट्रस्ट की ओर से उपजिलाधिकारी संतोष कुमार सिंह के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया है।
ट्रस्ट ने ज्ञापन में इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई है कि नगर निकायों में नामित 2802 सदस्यों में से एक भी दिव्यांग नहीं है। इसे बेहद निंदनीय बताते हुए आगामी चुनावों में दिव्यांगों को राजनीतिक आरक्षण प्रदान करने की मांग की गई है ताकि उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व तय हो सके।
जन सहभागिता फाउण्डेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष एम बिलाल मंसूरी के नेतृत्व में यह ज्ञापन दिया गया। उन्होंने संगठन के एक सर्वे का हवाला देते हुए बताया कि 81 प्रतिशत दिव्यांग किसी भी राजनीतिक दल को अपना हितैषी नहीं मानते हैं।
सर्वे के अन्य आंकड़ों के अनुसार, 55 प्रतिशत प्रतिभागी किसी भी पार्टी के दिव्यांग उम्मीदवार को वोट देने के इच्छुक हैं। वहीं, 94 प्रतिशत लोग दिव्यांगों को राजनीतिक आरक्षण दिए जाने के प्रबल समर्थक हैं।
बिलाल मंसूरी ने कहा कि राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और तमिलनाडु जैसे राज्य दिव्यांगों को नामित कर उनके राजनीतिक समावेशन पर प्रमुखता से काम कर रहे हैं। इसके विपरीत, उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 54 लाख दिव्यांग होने के बावजूद उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है।
ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 243 (R) 3 का भी हवाला दिया गया है। इसमें कहा गया है कि जिस वर्ग का प्रतिनिधित्व न हो, उसे नामित करके उसकी भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए, लेकिन दिव्यांग वर्ग की उपेक्षा की जा रही है।
ट्रस्ट ने सरकार से पुरजोर अपील की है कि दिव्यांगों को नगर निकायों में नामित किया जाए और आगामी चुनावों में उनके लिए सीटें आरक्षित की जाएं।
इस ज्ञापन को सौंपने के दौरान मुख्य रूप से रियाजउद्दीन मलिक, एडवोकेट सतीश, अराफात अंसारी और अभिषेक नागर आदि मौजूद रहे।
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