
नई दिल्ली: मणिपुर में हिंसा का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार, 31 अगस्त को अज्ञात हमलावरों ने कांगपोकपी जिले में तीन कुकी ग्रामीणों को मौत के घाट उतार दिया। इस गोलीबारी में दो महिलाओं की भी जान चली गई, जबकि चार अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। यह खौफनाक घटना उसी सड़क पर हुई जहां कुछ ही दिन पहले, 27 अगस्त 2026 दिन गुरुवार को चार लियांगमई नागा नागरिकों की हत्या कर दी गई थी।
कुकी-जो संगठनों से मिली जानकारी के अनुसार, यह ताजा वारदात सुबह करीब 9:30 बजे घटी। आरोप है कि दो नागा उग्रवादी गुटों के संदिग्ध सदस्यों ने आईटी रोड के समीप स्थित एन. तेइखांग कुकी गांव पर अचानक धावा बोल दिया। हमलावरों ने न केवल अंधाधुंध गोलियां बरसाईं, बल्कि कई घरों को भी आग के हवाले कर दिया।
इस अमानवीय हमले में जान गंवाने वालों की पहचान 40 वर्षीय तिंगनेइचिन ल्होवुम, 21 वर्षीय होईनेनेंग ल्होजेम और 36 वर्षीय लामतिनथांग ल्होजेम के रूप में हुई है। वहीं, हमले में घायल हुए चार लोगों में दो महिलाएं भी शामिल हैं, जिनका फिलहाल इलाज चल रहा है।
हैरानी की बात यह है कि एन. तेइखांग कुकी गांव मकुई अशांग गांव के बिल्कुल करीब स्थित है। यह वही इलाका है जिसके पास चार दिन पहले कथित तौर पर कुकी उग्रवादियों ने चार नागा लोगों की जान ले ली थी। इस घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।
हमले के बाद त्वीलांग एरिया सीएसओ वर्किंग कमेटी ने एक बयान जारी कर इस बर्बर घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इस खून-खराबे के लिए सीधे तौर पर नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (इसाक-मुइवा) यानी एनएससीएन (आई-एम) और जेलियांग्रोंग यूनाइटेड फ्रंट (कामसोन) या जेडयूएफ (के) को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक इन दोनों नागा समूहों की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
कमेटी ने अपने बयान में कहा कि निर्दोष नागरिकों और खासकर निहत्थी महिलाओं की हत्या करना तथा उनके घरों को जलाना घोर कायरता, क्रूरता और नैतिक पतन का प्रमाण है। इसे मानव गरिमा, कानून के शासन और मानवीय जीवन के प्रति सम्मान पर एक सीधा हमला करार दिया गया है। समिति ने स्पष्ट किया कि कोई भी राजनीतिक या क्षेत्रीय मांग किसी पूरे गांव को आतंकित करने या नागरिकों की हत्या को सही नहीं ठहरा सकती।
कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन सदर हिल्स ने भी इस हिंसक घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। संगठन का कहना है कि यह अत्याचार सुरक्षा बलों और सरकार की एक बड़ी और प्रणालीगत विफलता को उजागर करता है। उन्होंने सवाल उठाया है कि एनएससीएन (आई-एम) और जेडयूएफ (के) जैसे राष्ट्रविरोधी तत्वों को इतनी छूट कैसे मिली हुई है कि वे इस तरह की घटनाओं को बेखौफ अंजाम दे रहे हैं।
गौरतलब है कि मणिपुर 3 मई, 2023 से ही जातीय हिंसा की आग में जल रहा है। यह विवाद मुख्य रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले कुकी-जो समुदाय और इंफाल घाटी के गैर-आदिवासी मैतेई लोगों के बीच शुरू हुआ था। लेकिन इस साल फरवरी से यह संघर्ष पहाड़ियों में कुकी-जो और नागा समुदायों के बीच भी फैल चुका है।
कुकी और नागा समुदायों के बीच लगातार हो रहे इन हमलों और जवाबी हमलों में अब तक कई मासूमों की जान जा चुकी है, और बड़ी संख्या में लोगों के घर राख में तब्दील हो चुके हैं। प्रशासन लगातार स्थिति को नियंत्रण में लाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन जमीन पर तनाव अब भी बरकरार है।
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