इम्फाल: मणिपुर के कांगपोकपी जिले में मंगलवार 1 सितंबर को अज्ञात उग्रवादियों ने इम्फाल-तामेंगलोंग रोड पर स्थित चार लियांगमई नगा गांवों पर अचानक हमला कर दिया। यह हिंसक घटना उसी इलाके में तीन कुकी ग्रामीणों की हत्या के 24 घंटे से भी कम समय के भीतर हुई है, जिसने क्षेत्र में तनाव को और गहरा कर दिया है।
उखरुल स्थित समुदाय के शीर्ष संगठन, तांगखुल नगा लोंग (TNL) की कार्य समिति ने इस हमले को लेकर एक सनसनीखेज दावा किया है। संगठन के अनुसार, कुकी नेशनल फ्रंट-प्रेसिडेंशियल (KNF-P) ने कुकी नेशनल आर्मी (KNA) के साथ मिलकर इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया है।
हमलावरों ने तापोन गांव के पादरी लुइथुइबौ न्यूमई को निशाना बनाते हुए उन्हें गोली मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उग्रवादियों का आतंक यहीं नहीं रुका और उन्होंने दोपहर तक प्रभावित गांवों में कई घरों को आग के हवाले कर दिया।
TNL ने अपने आधिकारिक बयान में बताया कि इन चार नगा गांवों पर हुए सुनियोजित सशस्त्र हमलों का नेतृत्व जंगबोई किपगेन ने किया था। किपगेन मणिपुर में सक्रिय कुकी-जो उग्रवादी समूहों के मूल संगठन 'यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट' (UPF) का गृह सचिव है। इस हमले में KNF-P और KRA के कैडर भी शामिल थे।
संगठन ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि ये कुकी समूह केंद्र सरकार के साथ 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन' (SoO) समझौते के दायरे में आते हैं। TNL का आरोप है कि लियांगमई नगा समुदाय पिछले कुछ महीनों से लगातार कुकी उग्रवादियों के निशाने पर है और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।
TNL का दावा है कि कांगपोकपी जिले के अधिकार क्षेत्र में हो रहे इन लगातार हमलों का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में जनसांख्यिकीय बदलाव लाना है। उनका कहना है कि विस्थापित कुकी इस कार्यप्रणाली का इस्तेमाल करके नगाओं को उनके ही घरों से बेदखल कर उनकी पुश्तैनी जमीन पर अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहते हैं। संगठन ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए सरकार की तीखी आलोचना की और कहा कि प्रशासन SoO समझौते के तहत आने वाले इन कुकी समूहों पर लगाम कसने में पूरी तरह से विफल रहा है।
दूसरी ओर, इसी दिन यानी मंगलवार 1 सितंबर को मणिपुर के एक बड़े हिस्से, विशेषकर इम्फाल घाटी के पांच जिलों में सामान्य जनजीवन बुरी तरह ठप रहा। 'कैंपेन फॉर जस्टिस एंड फेयर डीलिमिटेशन' (JFD) द्वारा बुलाए गए 24 घंटे के बंद के कारण यह स्थिति पैदा हुई। यह हड़ताल तब बुलाई गई जब केंद्र सरकार ने सोमवार 31 अगस्त को राज्य में जनगणना अभियान को टालने का फैसला किया था।
JFD की स्पष्ट मांग है कि राज्य में जनगणना की प्रक्रिया शुरू करने से पहले सरकार राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) तैयार करे। केंद्र द्वारा जनगणना टालने की घोषणा के तुरंत बाद, मणिपुर सरकार ने JFD से अपनी हड़ताल वापस लेने की अपील की थी।
तमाम अपीलों के बावजूद संगठन अपनी जिद पर अड़ा रहा और उसने बंद को जारी रखा। JFD का तर्क है कि भारत के महापंजीयक को एक राजपत्र अधिसूचना (गजट नोटिफिकेशन) के माध्यम से जनगणना टालने की औपचारिक और कानूनी घोषणा करनी चाहिए।
इस बंदी के कारण समूचे इलाके में व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे और सार्वजनिक परिवहन तथा वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रुक गई। प्रदर्शनकारियों ने जगह-जगह सड़कें जाम कर दीं, हालांकि इस दौरान आवश्यक और आपातकालीन सेवाएं प्रदान करने वाले वाहनों को आवाजाही की छूट दी गई थी।
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