मणिपुर में शांति की कोशिशों के बीच एक बार फिर तनाव गहरा गया है। गुरुवार को राज्य के पहाड़ी जिलों में स्थिति उस समय बेकाबू हो गई जब कांगपोकपी जिले में तीन चर्च नेताओं और नोनी जिले में एक चिरू नागा की बेरहमी से हत्या कर दी गई। इन हत्याओं के बाद अपहरण और बंद की घटनाओं ने पूरे क्षेत्र में जनजीवन को ठप कर दिया है।
मणिपुर पुलिस के मुताबिक, चर्च नेताओं की जान अज्ञात बंदूकधारियों द्वारा की गई बिना किसी उकसावे की गोलीबारी में गई। इस घटना ने पूरे राज्य में डर और गुस्से का माहौल पैदा कर दिया है, जिससे विभिन्न समुदायों के बीच अविश्वास की खाई और चौड़ी हो गई है।
राज्य के गृह मंत्री गोविंददास कोंथौजम ने मीडिया से बात करते हुए एक चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि अलग-अलग स्थानों पर प्रतिद्वंद्वी समूहों ने नागा और कुकी-ज़ो समुदायों के 38 से अधिक लोगों को बंधक बना रखा है। इनमें से 23 लोगों को सेनापति जिले के ताफौ कुकी गांव से अगवा किया गया था।
राहत की बात यह रही कि गुरुवार शाम तक तीन बंधकों को रिहा कर दिया गया। रिहा किए गए लोगों में एक 18 वर्षीय लड़की, एक 40 वर्षीय बीमार व्यक्ति और एक मैतेई शामिल हैं। नागा विलेज गार्ड ने इन तीनों को सुरक्षित सेनापति पुलिस के हवाले कर दिया है, लेकिन बाकी लोगों की सुरक्षा को लेकर अभी भी संशय बना हुआ है।
कांगपोकपी जिले के कोनसाखुल गांव में स्थिति और भी तनावपूर्ण दिखी, जहां नागा महिलाओं ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि संदिग्ध उग्रवादियों ने नागा और अन्य समुदायों के कम से कम 18 लोगों को बंधक बनाया है। ग्राम प्राधिकरण के अनुसार, इन लोगों को बुधवार सुबह लेइलोन वैपेई इलाके से अगवा किया गया था।
गृह मंत्री कोंथौजम ने आश्वासन दिया है कि सरकार बंधकों की सुरक्षित रिहाई के लिए नागरिक समाज संगठनों और राजनीतिक नेताओं के साथ लगातार संपर्क में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले की जानकारी केंद्रीय गृह मंत्रालय को दे दी गई है। मंत्री ने आशंका जताई कि कुछ असामाजिक तत्व नहीं चाहते कि मणिपुर में शांति वापस लौटे।
हिंसा का सिलसिला यहीं नहीं थमा। बुधवार को कांगपोकपी की घटना के कुछ ही घंटों बाद नोनी जिले में विल्सन थंगा नामक एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जबकि उनकी पत्नी इस हमले में घायल हो गईं। गृह मंत्री ने तीन नागा विधायकों के साथ पीड़ित परिवार से मुलाकात की और हालात का जायजा लिया।
इन वारदातों के विरोध में कुकी-ज़ो और नागा संगठनों द्वारा बुलाए गए बंद का असर कांगपोकपी, चुराचांदपुर और चंदेल जिलों में व्यापक रूप से देखा गया। बाजार पूरी तरह बंद रहे और सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। सार्वजनिक परिवहन ठप होने और स्कूलों में छात्रों की नगण्य उपस्थिति के कारण सामान्य गतिविधियां पूरी तरह रुक गईं।
कुकी इन्पी मणिपुर ने तीन थाडौ चर्च नेताओं की हत्या के खिलाफ गुरुवार आधी रात से 48 घंटे के बंद का आह्वान किया है। प्रदर्शनकारियों ने इंफाल-दीमापुर जैसे महत्वपूर्ण मार्ग को अवरुद्ध कर दिया है, जिससे आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और यात्रियों की आवाजाही पर बुरा असर पड़ा है। वहीं, चंदेल में भी नागा संगठनों ने विल्सन थंगा की हत्या के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।
इस बीच, राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ओकराम इबोबी सिंह ने सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि कोटलेन-कोटज़िम और नोनी में हुई हिंसक घटनाएं राज्य में कानून और व्यवस्था के पूरी तरह ध्वस्त होने का प्रमाण हैं।
इबोबी सिंह ने केंद्र और राज्य सरकार दोनों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वे स्थिति को नियंत्रित करने में विफल रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राज्य का आम नागरिक असुरक्षित महसूस कर रहा है, तब केंद्र सरकार मौन क्यों है? उन्होंने यह भी पूछा कि केंद्रीय सुरक्षा बलों को हिंसा रोकने के बजाय मुख्य रूप से चुनाव ड्यूटी में क्यों लगाया जा रहा है।
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