मणिपुर में बंधकों की अदला-बदली से तनाव में कमी, बाकी लोगों को छुड़ाने की कोशिशें जारी

मणिपुर में कुकी और नागा समुदायों के बीच बंधकों की रिहाई शुरू, 28 नागरिक सुरक्षित घर लौटे, लापता लोगों की तलाश के लिए प्रशासन मुस्तैद।
Manipur. New Lamka Area
मणिपुर के पहाड़ी क्षेत्र का न्यू लमका रोड फोटो- राजन चौधरी, द मूकनायक
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नई दिल्ली: मणिपुर के सेनापति और कांगपोकपी जिलों में पिछले कई घंटों से जारी भारी गतिरोध के बाद शुक्रवार तड़के राहत की खबर आई है। प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि अलग-अलग स्थानों पर बंधक बनाए गए 28 नागरिकों को सुरक्षित रिहा कर दिया गया है। फिलहाल अन्य लापता लोगों की तलाश और उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए सरकारी स्तर पर प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

राज्य में कुकी और नागा समुदायों के बीच उपजे हालिया तनाव के कारण बुधवार को दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के ग्रामीणों को बंधक बना लिया था। इस स्थिति को लेकर गुरुवार को दिन भर अनिश्चितता बनी रही। मणिपुर के गृह मंत्री गोविंददास कोंथौजम ने बताया था कि दोनों समुदायों के कम से कम 38 लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिसके बाद सुरक्षा बल सक्रिय हुए।

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार शुक्रवार सुबह दोनों पक्षों की ओर से 14-14 लोगों को मुक्त किया गया। इस प्रकार अब तक कुल 28 लोग अपने घरों को लौट चुके हैं। इन लोगों को तीन से चार अलग-अलग स्थानों पर रिहा किया गया ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके।

हालांकि प्रशासन के लिए चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है। अधिकारी ने बताया कि अभी भी कुछ लोग विभिन्न स्थानों पर बंधक हो सकते हैं। सही संख्या स्पष्ट न होने के कारण बचाव अभियान में कठिनाई आ रही है, लेकिन राज्य के उच्च अधिकारी इस मामले के अगले चरण के समाधान पर काम कर रहे हैं।

कुकी इन्पी मणिपुर के सूचना सचिव जंघाओसुन हाओकिप ने बताया कि उनके समुदाय के 14 लोग अब भी लापता हैं। वहीं नागा समूहों का कहना है कि उनके पक्ष के कम से कम छह लोग अभी तक वापस नहीं आए हैं। हाओकिप ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा बलों के साथ चर्चा के बाद उन्होंने अपने कब्जे वाले लोगों को सौंप दिया है और अब गेंद प्रशासन के पाले में है।

यह रिहाई उस समय हुई है जब गुरुवार रात दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को कड़ा अल्टीमेटम दिया था। समुदायों की ओर से चेतावनी दी गई थी कि यदि उनके लोगों को समय पर नहीं छोड़ा गया, तो स्थिति और भी हिंसक हो सकती है। इन धमकियों के बाद राज्य में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई थी।

इस पूरे विवाद की जड़ बुधवार सुबह हुई वह दुखद घटना है जिसमें थाडौ बैपटिस्ट एसोसिएशन के तीन चर्च नेताओं की हत्या कर दी गई थी। रेवरेंड वुमथांग सितल्हो, रेवरेंड कैगौलेन ल्हौवम और पादरी पाोगौलेन सितल्हो उस समय हमले का शिकार हुए जब वे चुराचांदपुर से कांगपोकपी की यात्रा कर रहे थे।

चर्च नेताओं पर हुए इस हमले की खबर फैलते ही पूरे राज्य में सनसनी फैल गई। इसी दिन शाम को नोनी जिले में एक और हमला हुआ जिसमें विल्सन थंगा नामक नागरिक की मौत हो गई। इन घटनाओं के बाद कुकी समूहों ने सशस्त्र नागा समूहों पर हत्याओं का आरोप लगाया, जिसके बाद अपहरण का दौर शुरू हुआ।

बुधवार सुबह कांगपोकपी जिले के कोन्साखुल गांव से करीब 18 नागा निवासियों को बंधक बनाया गया था। इसके जवाब में नागा समूहों ने सेनापति जिले और कांगपोकपी के अन्य हिस्सों से कम से कम 23 लोगों को अपने कब्जे में ले लिया था। प्रशासन अब दोनों पक्षों के बीच शांति बहाली के लिए निरंतर संवाद कर रहा है।

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