मणिपुर में कुकी-नागा शांति के लिए चर्च संस्थाओं ने की मध्यस्थता की पेशकश, क्या निकल पाएगा हल?

मणिपुर में पूर्ण बंद और आर्थिक नाकाबंदी के बीच कुकी-नागा समुदाय में शांति बहाली के लिए चर्च संगठनों ने की मध्यस्थता की पेशकश, मुख्यमंत्री से मिलकर सुलह की नई उम्मीद जगाई।
मणिपुर में भारी तनाव, पूर्ण बंद और नाकाबंदी के बीच कुकी-नागा समुदाय में शांति बहाली के लिए चर्च संगठनों ने मध्यस्थता की बड़ी पेशकश की है।
मणिपुर में भारी तनाव, पूर्ण बंद और नाकाबंदी के बीच कुकी-नागा समुदाय में शांति बहाली के लिए चर्च संगठनों ने मध्यस्थता की बड़ी पेशकश की है।Picture: X/@CMO_MANIPUR_
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मणिपुर में चल रहे जातीय संघर्ष के बीच शांति बहाल करने के लिए दो चर्च संगठनों ने आगे आकर मध्यस्थता का प्रस्ताव दिया है। वर्तमान में राज्य एक "पूर्ण बंद" और "आर्थिक नाकाबंदी" का सामना कर रहा है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है।

नॉर्थ ईस्ट इंडिया के बैपटिस्ट चर्च काउंसिल (CBCNEI) और मणिपुर बैपटिस्ट कन्वेंशन (MBC) का प्रतिनिधित्व करने वाले 10 सदस्यीय दल ने सोमवार (18 मई, 2026) को मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह से मुलाकात की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों आदिवासी समुदायों के बीच व्याप्त तनावपूर्ण स्थिति को सुलझाने पर चर्चा करना था।

इस अहम बैठक में उपमुख्यमंत्री लोसी दिखो भी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री कार्यालय के एक अधिकारी के अनुसार, चर्च के नेताओं ने दोनों गुटों के बीच शांति वार्ता को सुविधाजनक बनाने की स्वेच्छा से पेशकश की है। इसके लिए उन्होंने दो अलग-अलग टीमें गठित करने का सुझाव दिया है ताकि दोनों पक्षों से संवाद स्थापित किया जा सके।

तय योजना के तहत, एक टीम कुकी-बहुल कांगपोकपी जिले का दौरा करेगी। वहीं, दूसरी टीम नागालैंड की सीमा से लगे नागा-बहुल सेनापति जिले में जाकर स्थिति का जायजा लेगी।

यह नई पहल 13 मई को हुई उस हिंसक घटना के बाद हुई है जब अज्ञात बंदूकधारियों ने कांगपोकपी जिले में कोटलेन और कोटजिम गांवों के बीच 'जीरो पॉइंट' पर घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में थडौ समुदाय के तीन चर्च नेताओं की हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद 40 से अधिक नागा और कुकी लोगों को बंधक बना लिया गया था।

गौरतलब है कि थडौ समुदाय का एक वर्ग खुद को कुकी के रूप में पहचाने जाने का विरोध करता है। कई गैर-कुकी लोग इस जनजाति समूह को गैर-स्वदेशी मानते हैं।

मुख्यमंत्री ने बंधक संकट से उत्पन्न स्थिति को शांत करने के लिए चर्च के नेताओं द्वारा निभाई जा रही भूमिका की कड़ी सराहना की। उन्होंने सीबीसीएनईआई और एमबीसी को दोनों समुदायों के नेताओं को समझाने के लिए प्रोत्साहित किया।

सीबीसीएनईआई के एक प्रवक्ता ने अपनी रणनीति स्पष्ट करते हुए कहा कि मानवीय आधार पर दोनों पक्षों के बंधकों को तुरंत रिहा करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि उनकी टीम कुकी समुदाय और चर्च के नेताओं से बात करने के अलावा तीन मृत चर्च नेताओं के परिजनों से मिलने कांगपोकपी जाएगी।

इसके बाद, शांति वार्ता दल सेनापति जिले की यात्रा करेगा। वहां वे मौजूदा तनावपूर्ण स्थिति और बंधक संकट पर चर्चा करने के लिए नागा चर्च के नेताओं और नागरिक समाज संगठनों के प्रमुख सदस्यों से विस्तार से मुलाकात करेंगे।

ज्ञात हो कि 15 मई को, विभिन्न कुकी और नागा समूहों ने 28 बंधकों को रिहा कर दिया था, जिनमें दोनों समुदायों के 14-14 लोग शामिल थे। दोनों पक्षों के परिवार और संगठन स्थायी शांति बहाली के लिए शेष बंदियों की रिहाई की लगातार मांग कर रहे हैं।

राजमार्गों पर फंसे ट्रक चालकों की अपील

राज्य में तनाव का सीधा और गहरा असर यातायात पर पड़ा है। कुकी संगठन द्वारा 13 मई को "पूर्ण बंद" लागू किए जाने के बाद से इंफाल घाटी और सेनापति जिले के राजमार्गों पर सैकड़ों मालवाहक और खाली ट्रक बुरी तरह फंसे हुए हैं।

स्थिति तब और भी गंभीर हो गई जब एक नागा संगठन ने रविवार शाम को नागा-बहुल इलाकों में "आर्थिक नाकाबंदी" लागू कर दी।

राष्ट्रीय राजमार्ग 2 (NH-2), जिसे मणिपुर की जीवन रेखा माना जाता है, सेनापति और कांगपोकपी जिलों से होकर गुजरता है। यह राजमार्ग ही इंफाल को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है।

फंसे हुए वाणिज्यिक वाहनों के चालकों के एक समूह ने अपनी व्यथा साझा की। उन्होंने बताया कि वे पिछले पांच दिनों से एक ही जगह पर फंसे हुए हैं और भोजन तथा पीने के पानी की भारी कमी का सामना कर रहे हैं। कुछ स्थानीय लोगों ने चावल और दाल देकर उनकी मदद जरूर की है, लेकिन लंबी अवधि के लिए यह बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं है।

अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित इन चालकों ने मणिपुर सरकार से उन्हें सुरक्षित निकालने की गुहार लगाई है। उन्होंने अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए सरकारी सुरक्षा बलों (एस्कॉर्ट्स) की भी मांग की है।

कुकी समुदाय के शीर्ष निकाय, कुकी इनपी मणिपुर ने चर्च के नेताओं की हत्या के विरोध में पूर्ण बंद का आह्वान किया है। उनका सीधा आरोप है कि सरकार कथित तौर पर नागा क्षेत्रों में उनके 14 लोगों को अपहरणकर्ताओं से छुड़ाने में पूरी तरह विफल रही है।

दूसरी ओर, मणिपुर के नागाओं के शीर्ष निकाय, यूनाइटेड नागा काउंसिल ने आर्थिक नाकाबंदी के साथ जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। वे सरकार पर छह नागा नागरिकों को रिहा कराने का दबाव बना रहे हैं, जिनमें दो पादरी भी शामिल हैं। आरोप है कि इन सभी को कुकी उग्रवादियों ने बंधक बना रखा है।

मणिपुर सरकार के एक प्रवक्ता ने हालात पर अद्यतन जानकारी देते हुए कहा कि सुरक्षा बलों द्वारा लापता व्यक्तियों की तलाश युद्धस्तर पर जारी है। कांगपोकपी और सेनापति दोनों जिलों में सघन तलाशी अभियान चलाए जा रहे हैं ताकि जल्द से जल्द शांति स्थापित की जा सके।

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