लखनऊ: शिक्षक भर्ती के लिए चिलचिलाती धूप में क्यों रेंगने को मजबूर हुए युवा दलित-पिछड़े?

लखनऊ में 69000 शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास के बाहर चिलचिलाती धूप में रेंगकर प्रदर्शन करने को मजबूर हुए OBC-SC अभ्यर्थी, सपा और कांग्रेस ने सरकार पर साधा कड़ा निशाना।
69000 Teacher Recruitment UP
यूपी में 69000 शिक्षक भर्ती को लेकर OBC-SC अभ्यर्थियों ने चिलचिलाती धूप में रेंगकर किया विरोध प्रदर्शन। अखिलेश यादव ने सरकार को घेरा।
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उत्तर प्रदेश: शिक्षक भर्ती का इंतजार कर रहे सैकड़ों उम्मीदवारों ने सोमवार (18 मई 2026) को लखनऊ में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास के बाहर एक अनोखा और मार्मिक प्रदर्शन किया। मुख्य रूप से अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अनुसूचित जाति (एससी) से ताल्लुक रखने वाले इन युवाओं ने चिलचिलाती धूप में जमीन पर लेटकर और रेंगकर अपनी नियुक्ति की गुहार लगाई। इस दर्दनाक प्रदर्शन के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।

आक्रोशित उम्मीदवारों का साफ कहना है कि वे अदालती मामलों में हो रही लंबी देरी से पूरी तरह टूट चुके हैं। उनका आरोप है कि यदि सरकार ने जल्द उनकी समस्या का समाधान नहीं किया, तो वे कोई भी सख्त कदम उठाने को मजबूर होंगे। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, चयन सूची तैयार करते समय आरक्षण के नियमों की घोर अनदेखी की गई थी, जिसके कारण ओबीसी और एससी वर्ग के योग्य उम्मीदवारों की सीटें कम हो गईं।

बाराबंकी के रहने वाले एक उम्मीदवार विश्वजीत प्रजापति ने इस पूरे मामले पर अपनी निराशा जाहिर की। उन्होंने बताया कि जब यह विवाद बढ़ा था, तब सरकार ने अपनी गलती मानी थी और 6,800 उम्मीदवारों की एक नई सूची भी जारी की थी। लेकिन, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उस सूची को रद्द करते हुए 69,000 उम्मीदवारों की एक नई सूची तैयार करने का आदेश दे दिया था।

विश्वजीत ने आगे बताया कि फिलहाल यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। प्रदर्शनकारी युवाओं का आरोप है कि राज्य सरकार शीर्ष अदालत में वरिष्ठ वकीलों के पैनल के माध्यम से उनका पक्ष मजबूती से नहीं रख रही है। प्रजापति ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि पिछले छह सालों से युवा सिर्फ प्रशासनिक कमियों का खामियाजा भुगत रहे हैं। वे न्याय की मांग कर रहे हैं क्योंकि सिस्टम ने उन्हें पूरी तरह निराश किया है।

इस प्रदर्शन के वायरल वीडियो सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने युवाओं के रेंगने का वीडियो साझा करते हुए कहा कि अब अन्याय की सभी हदें पार हो चुकी हैं।

उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि संविधान द्वारा दिए गए आरक्षण के अधिकार को खत्म करने वाले आज बहुत खुश होंगे कि सदियों से वंचित समाज के लोग आज भी उनके वर्चस्व के सामने झुकने और गिड़गिड़ाने को मजबूर हैं। यादव ने चेतावनी दी कि सत्ता के नशे में चूर नेताओं को याद रखना चाहिए कि जब इंसान की जिद हारती है, तो वह सारी हदें पार कर जाता है।

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता नसीर सलीम ने भी इस विकट स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि युवाओं का यह शांतिपूर्ण लेकिन दर्दनाक विरोध केवल उनकी हताशा नहीं, बल्कि उस व्यवस्था से उठ चुके विश्वास को भी दर्शाता है जिसका काम उनका समर्थन करना है।

सलीम ने सरकार से तत्काल, सहानुभूति और पूरी पारदर्शिता के साथ जवाब देने की मांग की। उन्होंने कहा कि ये युवा रोजगार के जरिए अपना सम्मान मांग रहे हैं, कोई टकराव नहीं। उन्होंने अधिकारियों से सार्थक संवाद करने की अपील की और साथ ही उम्मीदवारों से शांति बनाए रखने का आग्रह किया।

वहीं, कांग्रेस पार्टी ने इसे पूरी तरह से व्यवस्था की नाकामी करार दिया है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अनिल यादव ने कहा कि जब देश का भविष्य कहे जाने वाले युवा शिक्षा मंत्री के घर के सामने 70,000 शिक्षकों की भर्ती की मांग को लेकर पेट के बल रेंगने को मजबूर हों, तो समझ लेना चाहिए कि लोकतंत्र आईसीयू में है।

उन्होंने कहा कि विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाली सरकार की आज लखनऊ की सड़कों पर सबसे शर्मनाक और डरावनी तस्वीर सामने आई है। अनिल यादव ने आरोप लगाया कि इस सरकार की प्राथमिकता में ओबीसी, एससी, महिलाएं और आम लोग कभी थे ही नहीं।

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