मणिपुर: कांगपोकपी में हाईवे शटडाउन ने लिया हिंसक रूप, सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों की झड़प में 3 गंभीर रूप से घायल

नेशनल हाईवे-37 पर कुकी प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हिंसक झड़प, 3 लोग गंभीर रूप से घायल; KISW-SH ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी।
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कोहिमा से मणिपुर रास्ते के बीच का एक पहाड़ी क्षेत्र(सांकेतिक तस्वीर)
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नई दिल्ली: मणिपुर के कांगपोकपी जिले में तनाव एक बार फिर से गहरा गया है। सोमवार, 22 जून को नेशनल हाईवे-37 पर आपातकालीन शटडाउन लागू कर रहे कुकी प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच तीखी झड़प हो गई।

न्यू कीथेलमनबी इलाके में हुए इस टकराव ने जल्द ही हिंसक रूप ले लिया। बताया जा रहा है कि इस घटना में कम से कम तीन लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

कांगपोकपी में कुकी नागरिक समाज संगठनों द्वारा बुलाया गया यह शटडाउन लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी मुख्य रूप से कुकी-ज़ो बहुल गांवों में चलाए जा रहे चयनात्मक सुरक्षा अभियानों का कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि सुरक्षाबलों द्वारा केवल उनके इलाकों को ही निशाना बनाया जा रहा है।

अपनी मांगों को लेकर भारी संख्या में प्रदर्शनकारी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इम्फाल-जिरीबाम हाईवे पर जमा हो गए थे। उन्होंने हाईवे पर वाहनों की आवाजाही को पूरी तरह से रोक दिया था। उनकी प्रमुख मांग है कि इन इलाकों में चल रहे सुरक्षा अभियानों पर तुरंत रोक लगाई जाए।

स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्थिति तब बेकाबू हो गई जब सुरक्षाकर्मियों ने भीड़ को तितर-बितर करने और हाईवे को फिर से खोलने का प्रयास किया।

प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए सुरक्षाबलों ने कथित तौर पर ब्लैंक फायरिंग और स्मोक बम जैसे दंगा-रोधी उपायों का इस्तेमाल किया। इस पुलिसिया कार्रवाई से प्रदर्शनकारियों के बीच भारी दहशत और अशांति फैल गई।

कुकी इनपी साउथ वेस्ट सदर हिल्स (KISW-SH) ने सुरक्षाबलों की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। संगठन का आरोप है कि शटडाउन में शांतिपूर्ण तरीके से भाग ले रहे लोगों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए, ब्लैंक फायरिंग की गई और लाठीचार्ज किया गया।

एक बयान जारी करते हुए संगठन ने सुरक्षाबलों के इस कदम को अत्यधिक और अनुचित करार दिया है। उन्होंने दावा किया है कि इस अंधाधुंध कार्रवाई के कारण ही उनके तीन लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

संगठन का कहना है कि प्रशासन जनता की चिंताओं को दूर करने में पूरी तरह से विफल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक लोकतांत्रिक विरोध को कुचलने के लिए सीधे तौर पर बल प्रयोग किया गया।

KISW-SH ने स्पष्ट किया कि इस आपातकालीन शटडाउन का मुख्य उद्देश्य कुकी-बहुल इलाकों में चलाए जा रहे भेदभावपूर्ण 'कॉम्बिंग ऑपरेशंस' का विरोध करना था। उनका साफ तौर पर मानना है कि ये कार्रवाइयां पूरी तरह से पक्षपाती हैं।

इसके अलावा, संगठन ने यह भी गंभीर आरोप लगाया है कि मौजूदा जातीय तनाव के तार एनएससीएन-आईएम (NSCN-IM) और इसके कथित छद्म गुट जेडयूएफ-कमसन (ZUF-Kamson) से जुड़े हुए हैं। उन्होंने इन गुटों को जिम्मेदार ठहराते हुए प्रशासन से इनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

भविष्य में और अधिक लामबंदी की चेतावनी देते हुए KISW-SH ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक यह गतिरोध खत्म नहीं होगा। उनका कहना है कि अगर प्रशासन उनकी चिंताओं पर ध्यान देकर जवाबदेही तय नहीं करता है, तो विरोध प्रदर्शन आगे भी जारी रहेंगे।

यह हालिया टकराव कांगपोकपी जिले के कुछ हिस्सों में लगातार बने हुए तनाव को उजागर करता है। सुरक्षा अभियानों को लेकर लग रहे इन गंभीर आरोपों के कारण इलाके में हाईवे जाम, शटडाउन और बड़े पैमाने पर जन-प्रदर्शन का दौर लगातार जारी है।

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