मध्य प्रदेश: अक्षय तृतीया पर पुलिस ने रुकवाए आठ बाल विवाह, प्रदेश भर की फॉलोअप रिपोर्ट मांगेगा बाल आयोग

मप्र बाल आयोग के सदस्य ओंकार सिंह ने कहा, बाल विवाह के मामलों में बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) को बच्चे के बालिग होने तक फॉलोअप लेना चाहिए। हम पूरे प्रदेश के सभी जिलों रिपोर्ट मांगेंगे की कितने मामले सामने आए और कितने मामलों में फॉलोअप लिया गया।
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भोपाल। हमारे देश में बाल विवाह के खिलाफ सख्त कानून बनाए गए हैं लेकिन इसके बाद भी देश के कई हिस्सों में बाल विवाह के मामले सामने आते हैं। बाल विवाह एक सामाजिक कुरीति है, मगर समाज में आज भी यह कुरीति फल-फूल रही है। हाल ही में मध्य प्रदेश के ग्वालियर अंचल में शुक्रवार को अक्षय तृतीया के मौके पर आठ वाल विवाह प्रशासन की टीमों ने रुकवाए हैं।

इनमें डबरा में तीन, ग्वालियर के लक्कड़ खाना पर एक और ग्वालियर के मांडरे की माता मंदिर पर विश्वकर्मा समाज के सामूहिक विवाह सम्मेलन में 4 बाल विवाह रुकवाए गए हैं। जब प्रशासन की टीम यहां पहुंची और दूल्हा-दुल्हन नाबालिग दिखने पर दस्तावेज मांगे तो संस्था उम्र से संबंधित कोई दस्तावेज नहीं दिखा सकी। जिस पर चार जोड़ों की शादी रुकवाई गई है।

इसके अलावा एक दिन पहले लक्कड़खाना पर जिस बाल विवाह को रुकवाया गया और मेहगांव से बारात नहीं आई थी, उस बालिका को अब बालिका गृह में भेज दिया गया है। इस बालिका को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया जाएगा। डबरा में जेल रोड स्थित श्रीराम वाटिका में जांच करने तहसीलदार व अन्य अधिकारियों की टीम पहुंची। यहां ओम साईं जनजागृति संस्था नाबालिग लड़की का विवाह शिवपुरी के 19 वर्षीय युवक के साथ करा रही थी।

इसी वाटिका में नंदिनी इंदौरिया सामाजिक विकास समिति, दतिया के जौनिया की एक 16 वर्षीय लड़की की शादी पलायक्षा के युवक के साथ करा रही थी। इसी तरह हेल्पलाइन नंबर पर ग्राम सालबई में एक नाबालिग लड़के की शादी की सूचना मिली। जिसकी जांच करने पहुंची टीम को लड़के की उम्र 17 साल मिली, ये शादी भी रुकवा दी गई।

जब जिला प्रशासन की टीम को पता लगा कि मांडरे की माता मंदिर पर विश्वकर्मा समाज का सामूहिक विवाह समारोह चल रहा है, तो टीम वहां जांच के लिए पहुंची। 16 जोड़ों की शादी हो रही थी। टीम को यहां चार जोड़े नाबालिग लगे। सभी के दस्तावेज दिखाने के लिए कहा गया। संस्था ने 12 के उम्र संबंधित दस्तावेज दिखा दिए, लेकिन चार जोड़ों के दस्तावेज पेश नहीं कर सके। जिस पर टीम ने चार शादियों को रुकवा दिया।

बाल आयोग करेगा कार्रवाई

द मूकनायक से बातचीत करते हुए मध्य प्रदेश राज्य बाल संरक्षण आयोग के सदस्य ओंकार सिंह ने बताया कि बाल विवाह के मामले पूरे प्रदेश से सामने आते रहते हैं। इन मामलों में पुलिस परिजनों को समझाइश दे देती है, और शादी रुकवा दी जाती है। लेकिन नजर हटते परिवारजन शादी कर देते हैं। आयोग के सदस्य ओंकार सिंह ने कहा, "इन मामलों में बाल कल्याण समिति को बच्चे के बालिग होने तक फॉलोअप लेना चाहिए। हम पूरे प्रदेश के सभी जिलों से रिपोर्ट मांगेंगे की कितने मामले सामने आए और कितने मामलों में फॉलोअप लिया गया"

नाबालिग से जन्मे बच्चे हो सकते हैं कुपोषित!

बाल विवाह के कारण आने वाली पीढ़ी के स्वास्थ्य पर भी गहरा असर पड़ता है। डॉक्टर्स कहते हैं कि, नाबालिग बच्चों से जन्मी संतान कुपोषित या कमजोर हो सकती है। द मूकनायक से बातचीत करते हुए भोपाल की प्रसूति विज्ञानी-स्‍त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. निधि जैन ने बताया कि यदि कोई नाबालिग किसी बच्चे को जन्म देती है, तब बच्चा और और प्रसूता दोंनो ही कमजोर हो सकते है। उन्होंने कहा, "जब माँ का ही शारीरिक विकास और मानसिक विकास पूरा नहीं हुआ है तो ऐसी स्थति में उनसे जन्मा बच्चा कमजोर होगा। इसके साथ ही भविष्य में माँ और बच्चे को कई बीमारियां भी हो सकती है। बच्चे के कुपोषित होने की भी आशंका रहती है।"

समाज के लिए खतरा

भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय समाज शास्त्र विभाग के शोध छात्र इम्तियाज़ खान ने द मूकनायक को बताया कि बाल विवाह समाज के लिए खतरा है। किसी भी पुरुष या महिला के जीवन पर बाल विवाह का काफी गहरा प्रभाव पड़ता है। कम उम्र में हुए विवाह के कारण महिला का विकास रुक जाता है, और आने वाली पीढ़ी शिक्षा से दूर हो सकती है।

बाल विवाह रोकने के लिए कानून

बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत - एक बच्चे को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में परिभाषित किया गया है, जो यदि पुरुष है, तो इक्कीस वर्ष की आयु पूरी नहीं की है, और यदि महिला है, तो अठारह वर्ष की आयु पूरी नहीं की है। यह अधिनियम यह भी घोषित करता है कि कानूनी आयु सीमा से कम उम्र के बच्चों के बीच किया गया कोई भी विवाह अमान्य है। यह अधिनियम नाबालिगों के बीच बाल विवाह की अनुमति देने या आयोजित करने या वयस्कों के साथ नाबालिगों की शादी करने के लिए विभिन्न अपराधों के लिए दंड का भी प्रावधान करता है। इसके बावजूद, बाल विवाह अभी भी पूरे देश में व्यापक रूप से फैला हुआ है।

बाल विवाह के दुष्प्रभाव।

बाल विवाह के कारण बच्चे अपने अधिकारों से वंचित रह जाते हैं। जल्दी शादी होने के कारण महिलाएं कम उम्र में अपने सारे सपनों को पीछे छोड़कर घर के काम सीखने को मजबूर हो जाती हैं। ऐसे में लड़के और लड़कियों पर कई तरह की जिम्मेदारी डाल दी जाती हैं, जिसके लिए वो तैयार नहीं होते और इसके कारण उनका मानसिक एवं भावनात्मक विकास नहीं हो पाता है। इसके साथ वह शिक्षा से भी दूर हो जाते हैं। जिसका प्रभाव आगामी पीढ़ी पर भी पड़ता है।

छोटी उम्र में लड़कियों का विवाह कर दिया जाता हैं, तो इससे वे कई तरह की बीमारी का शिकार हो सकती हैं। कई मामलों में देखा गया है कि कम उम्र में विवाह होने के कारण वे कम उम्र में ही गर्भवती भी हो जाती हैं। जिससे उनके स्वास्थ्य पर कई तरह के प्रभाव पड़ते हैं।

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