लखनऊ के KGMU में नॉन-वेज पर बैन से बवाल, विपक्ष ने इसे बताया संघ का 'हिडन एजेंडा'

केजीएमयू प्रशासन के हॉस्टल में मांसाहारी भोजन पर पूरी तरह रोक लगाने के बाद राजनीति गरमाई, कांग्रेस और सपा ने इसे बताया छात्रों की स्वतंत्रता पर प्रहार।
KGMU Lucknow
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू), लखनऊ
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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने सभी हॉस्टलों में मांसाहारी भोजन पकाने और परोसने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। बुधवार, 15 जुलाई 2026 को इस फैसले के सामने आते ही विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी।

विपक्ष ने इसे केवल खान-पान की आदतों को नियंत्रित करने का प्रयास नहीं, बल्कि छात्रों और समाज पर हिंदुत्ववादी विचारधारा थोपने की एक बड़ी साजिश करार दिया है। यह फैसला 14 जुलाई को जारी किए गए एक आधिकारिक नोटिस के जरिए लागू किया गया है।

इस नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कुलपति के मौखिक निर्देशों के अनुसार, किसी भी हॉस्टल की मेस या कैंटीन में अब कोई मांसाहारी भोजन नहीं पकाया जाएगा। प्रशासन ने नोटिस में यह भी जोड़ा है कि छात्रों के शरीर में प्रोटीन की जरूरत को पूरा करने के लिए शाकाहारी विकल्पों का उचित उपयोग किया जाना चाहिए।

इस विवादित कदम को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल के हालिया केजीएमयू दौरे से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि उनके कैंपस भ्रमण के तुरंत बाद ही प्रशासन ने यह सख्त रुख अपनाया है।

इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अनिल यादव ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मांसाहार पर प्रतिबंध लगाना आरएसएस शासन की उस कोशिश का हिस्सा है, जिसके तहत वे अपनी संकीर्ण सोच के हिसाब से समाज को ढालना चाहते हैं। यादव ने आरोप लगाया कि देश का एक बड़ा वर्ग मांसाहार पसंद करता है, लेकिन सत्ताधारी दल 'मनुस्मृति' के विचारों से प्रेरणा लेते हुए हाशिए पर रहने वाले लोगों पर पाबंदियां थोप रहा है।

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि उच्च संवैधानिक पद पर बैठीं राज्यपाल लगातार एक ऐसा नैरेटिव सेट करने की कोशिश कर रही हैं, जो महिलाओं, खान-पान, रीति-रिवाजों और परंपराओं के मामले में मौजूदा सत्ताधारी दल को सूट करता है।

वहीं, मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) ने भी इस प्रतिबंध को पूरी तरह से गलत ठहराया है। सपा का स्पष्ट कहना है कि किसी भी विश्वविद्यालय के अंदर छात्रों को अपनी व्यक्तिगत पसंद के अनुसार भोजन करने की पूरी आजादी होनी चाहिए और ऐसा कोई भी फरमान थोपना अनुचित है।

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अमीक जामेई ने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सरकार एक बड़ी आबादी को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने में पूरी तरह विफल रही है। चिकित्सा ढांचे की कमियों को दूर करने के बजाय सरकार छात्रों की खाने की पसंद पर नियंत्रण कर रही है, जो उनकी संकीर्ण मानसिकता को उजागर करता है।

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