केरल हाईकोर्ट ने दलित और आदिवासी समूहों की हड़ताल पर शुरू की अवमानना की कार्रवाई, हड़ताल बुलाने वालों को भी नोटिस जारी

बीडीएस छात्र नितिन की मौत पर बुलाए गए बंद के दौरान हुई हिंसा पर अदालत का कड़ा रुख, राज्य के डीजीपी से तलब की विस्तृत रिपोर्ट।
Kerala High Court
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नई दिल्ली: केरल उच्च न्यायालय ने बीडीएस छात्र नितिन की मौत के मामले में मंगलवार, 28 को आहूत हड़ताल पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने दलित और आदिवासी संगठनों द्वारा बुलाए गए इस बंद पर स्वतः संज्ञान लेते हुए अवमानना की कार्रवाई शुरू कर दी है।

न्यायालय ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) को सख्त निर्देश दिए हैं। डीजीपी को विभिन्न जिलों में हुई कथित हिंसक घटनाओं और यातायात बाधित होने के मामलों पर उसी दिन शाम तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

इसके अलावा, अदालत ने इस मामले में उन सभी पक्षों को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जिन्होंने मुख्य रूप से इस हड़ताल का आह्वान किया था।

यह ध्यान देने योग्य है कि केरल उच्च न्यायालय ने पहले भी अपने कई महत्वपूर्ण फैसलों में यह स्पष्ट किया है कि हड़ताल या बंद के दौरान आम जनता और सरकारी संपत्ति को होने वाला कोई भी नुकसान पूरी तरह से अवैध और असंवैधानिक माना जाएगा।

न्यायालय ने यह पहले ही तय कर दिया था कि इस तरह की कोई भी तोड़फोड़ की गतिविधि सीधे तौर पर अदालत की अवमानना की श्रेणी में आएगी और ऐसा करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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