
उत्तर प्रदेश: कौशांबी जिले में शुक्रवार, 19 जून की सुबह एक बेहद निंदनीय घटना सामने आई। जिले के जजौली और उसके आसपास के गांवों में उस वक्त भारी तनाव फैल गया, जब कुछ असामाजिक तत्वों ने संविधान निर्माता डॉ. बी.आर. आंबेडकर की प्रतिमा को नुकसान पहुंचाया। इस घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में दलित समुदाय के लोग मौके पर इकट्ठा हो गए और धरने पर बैठ गए। आक्रोशित ग्रामीणों ने जमकर नारेबाजी की और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की।
हालात को बिगड़ता देख भारी पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुंच गया। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझा-बुझाकर शांत किया और उन्हें न्याय का ठोस आश्वासन दिया। प्रशासन की मदद से डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा को उसी स्थान पर दोबारा स्थापित कर दिया गया है। पुलिस ने ग्रामीणों से वादा किया है कि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होने दी जाएगी। एहतियात के तौर पर इलाके में अभी भी बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।
पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत केस दर्ज कर लिया है। दोषियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए इलाके के सीसीटीवी फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को खंगाला जा रहा है।
कौशांबी के सर्कल ऑफिसर (सीओ) जनेश्वर प्रसाद पांडेय ने घटना के संबंध में आधिकारिक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने पश्चिम शरीरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इस घटनास्थल का मुआयना किया है। अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और पुलिस की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। प्रतिमा की पुनर्स्थापना की पुष्टि करते हुए सीओ ने कहा कि पुलिस की टीमें अपराधियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी के लिए लगातार काम कर रही हैं।
इस घटना ने अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। विपक्षी दलों ने इसे एक गहरी साजिश का हिस्सा बताते हुए सत्ता पक्ष पर तीखा हमला बोला है।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय कुमार लल्लू ने इस कृत्य की कड़ी निंदा की। उन्होंने इसे सामंती ताकतों की एक घिनौनी चाल बताते हुए कहा कि इस तोड़फोड़ का असली मकसद हाशिए पर पड़े समुदायों को यह संदेश देना है कि उनके प्रतीकों और उनके आत्मसम्मान को कुचल दिया जाएगा। लल्लू ने आरोप लगाया कि भाजपा शासित उत्तर प्रदेश में डॉ. आंबेडकर की मूर्तियों पर ऐसे हमले कोई नई बात नहीं हैं।
उनके अनुसार, भाजपा की विभाजनकारी राजनीति से उत्साहित सामंती तत्व बहुजन समाज को हाशिए पर धकेलने और उन्हें दोयम दर्जे का नागरिक बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
गाजीपुर से लोकसभा सांसद और समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता अफजाल अंसारी ने भी राज्य सरकार की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार की निष्क्रियता के कारण ही ऐसे असामाजिक और आपराधिक तत्वों के हौसले बुलंद हैं।
अंसारी ने इस घटना को दलितों और अन्य वंचित समुदायों का मनोबल तोड़ने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया। उन्होंने इसे सत्ताधारी पार्टी द्वारा फैलाई जा रही नफरत और सामंती तत्वों के पलटवार का परिणाम बताया। उन्होंने ध्यान दिलाया कि उत्तर प्रदेश में पहले भी डॉ. आंबेडकर की मूर्तियों पर हमले हो चुके हैं और अकेले गाजीपुर में ऐसी तीन घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
अंसारी ने जोर देकर कहा कि सामंती तत्व दलितों के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण आदर्श की मूर्ति को नुकसान पहुंचाकर उन पर गहरा भावनात्मक प्रहार कर रहे हैं।
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