
नई दिल्ली: तमिलनाडु के शिवगंगा जिले में इस साल की शुरुआत में हुई एक 26 वर्षीय दलित युवक की पुलिस हिरासत में मौत के मामले में बड़ा कदम उठाया गया है। सीबी-सीआईडी (CB-CID) ने इस खौफनाक घटना के सिलसिले में छह पुलिस अधिकारियों के खिलाफ औपचारिक रूप से चार्जशीट दायर कर दी है।
जिन पुलिसकर्मियों को इस आरोप पत्र में नामजद किया गया है, उनमें इंस्पेक्टर दिलीपन और सब-इंस्पेक्टर गुगन शामिल हैं। इनके अलावा मदगुपट्टी थाने के हेड कांस्टेबल पलानी, शिवगंगा टाउन थाने के देवेन्द्रन, मनामदुरै थाने के ग्रेड 1 कांस्टेबल कलीस्वरन और थिरुप्पुवनम थाने के महेंद्रन के नाम भी चार्जशीट में दर्ज किए गए हैं।
यह पूरा मामला मनामदुरै के कृष्णराजपुरम के रहने वाले आकाश डेलिसन की मौत से जुड़ा है। पुलिस ने डेलिसन को 5 मार्च को हत्या के प्रयास के एक मामले में हिरासत में लिया था। हिरासत के दौरान आई गंभीर चोटों के कारण 8 मार्च को मदुरै के सरकारी राजाजी अस्पताल में इलाज के दौरान इस युवक ने दम तोड़ दिया।
इस घटना के बाद स्थानीय पुलिस और मृतक के परिवार के दावों में भारी विरोधाभास देखने को मिला। शुरुआत में पुलिस ने कहानी बनाई कि युवक भागने की कोशिश करते समय एक पुल से कूद गया था, जिससे उसके पैर में गंभीर फ्रैक्चर हो गया। वहीं, डेलिसन के परिवार ने आरोप लगाया कि पुलिस हिरासत में उसे बेरहमी से प्रताड़ित किया गया और यह एक हत्या है।
परिजनों के इन गंभीर आरोपों को उस वक्त और बल मिला जब एक न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए डेलिसन के 'मृत्यु पूर्व बयान' की बात सामने आई। इसमें बताया गया कि पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने उसके पैरों पर लोहे की रॉड से बुरी तरह पीटा था।
बाद में फोरेंसिक विशेषज्ञों ने भी शुरुआती मेडिकल रिपोर्ट में कई अहम खामियां उजागर कीं। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि शरीर के अंदरूनी ऊतकों को जो भारी नुकसान पहुंचा है, वह महज किसी पुल से गिरने के कारण संभव नहीं है।
इस निर्मम मौत के बाद पूरे इलाके में भारी आक्रोश फैल गया और पीड़ित परिवार लंबे धरने पर बैठ गया। दोषी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए परिजनों ने 100 से अधिक दिनों तक डेलिसन का शव लेने से इनकार कर दिया।
यह लंबा गतिरोध तब जाकर खत्म हुआ जब मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने मामले में सीधा हस्तक्षेप किया। इसके बाद भारी पुलिस सुरक्षा के बीच राज्य सरकार द्वारा शव का अंतिम संस्कार करवाया गया।
लगातार बढ़ते जन आक्रोश और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच सीबी-सीआईडी को सौंप दी गई थी। जांच एजेंसी ने कड़ी कार्रवाई करते हुए पहले इन सभी शामिल अधिकारियों को निलंबित किया और अब उनके खिलाफ अदालत में औपचारिक रूप से चार्जशीट पेश कर दी है, जिससे पीड़ित परिवार को न्याय की एक नई किरण दिखाई दी है।
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