MP उज्जैन में ग्रीन फील्ड रोड परियोजना का विरोध: 90 गाँव के किसान जिला मुख्यालय की ओर हुए थे रवाना, प्रशासन बातचीत के बाद आंदोलन स्थगित

किसान संगठनों का कहना है कि विकास परियोजनाओं का वे विरोध नहीं कर रहे, लेकिन बिना पर्याप्त मुआवजा और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखे सड़क निर्माण स्वीकार्य नहीं होगा।
MP उज्जैन में ग्रीन फील्ड रोड परियोजना का विरोध: 90 गाँव के किसान जिला मुख्यालय की ओर हुए थे रवाना, प्रशासन बातचीत के बाद आंदोलन स्थगित
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भोपाल। उज्जैन-इंदौर और उज्जैन-जावरा प्रस्तावित ग्रीन फील्ड रोड परियोजनाओं के विरोध में करीब एक हजार किसान बुधवार को राशन और बिस्तर के साथ उज्जैन पहुंचने की तैयारी में थे। किसानों ने 150 से अधिक ट्रैक्टर-ट्रालियों के साथ कलेक्ट्रेट का घेराव कर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने की रणनीति बनाई थी। पिछले डेढ़ साल से मुआवजा और सड़क निर्माण की ऊंचाई को लेकर आंदोलनरत किसान इस बार आर-पार की लड़ाई के मूड में दिखाई दे रहे थे। हालांकि, प्रदर्शन से ठीक पहले प्रशासन द्वारा बातचीत की पहल किए जाने के बाद फिलहाल आंदोलन को स्थगित कर दिया गया है।

किसानों के उज्जैन कूच से पहले जिला प्रशासन ने किसान नेताओं को चर्चा के लिए बुलाया। उज्जैन कलेक्टर रोशन सिंह ने प्रतिनिधिमंडल के साथ विस्तृत बैठक की। बैठक के बाद कलेक्टर ने बताया कि इंदौर-उज्जैन प्रस्तावित ग्रीन फील्ड रोड से उज्जैन जिले के 8 गांव सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ चर्चा सकारात्मक और समाधान की दिशा में रही है तथा शाम तक अंतिम निर्णय लिए जाने की संभावना है।

कलेक्टर के अनुसार मुआवजे की राशि और अन्य मांगों पर सहमति बनने के आसार हैं। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि जावरा-उज्जैन ग्रीन फील्ड रोड से प्रभावित किसानों को भी उज्जैन-इंदौर रोड के किसानों के समान मुआवजा दिया जाएगा, जिससे किसी प्रकार का भेदभाव न हो।

किसान नेताओं ने रोका उज्जैन कूच

किसान नेता राजेश सोलंकी ने बताया कि किसानों ने अनिश्चितकालीन धरने की पूरी तैयारी कर ली थी। कई गांवों से किसान ट्रैक्टर-ट्रालियों में राशन, बिस्तर और जरूरी सामान लेकर निकलने वाले थे। लेकिन प्रशासन द्वारा वार्ता का प्रस्ताव दिए जाने और सकारात्मक आश्वासन मिलने के बाद आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि कलेक्टर ने संकेत दिया है कि मुआवजा किसानों की मांग के आसपास तय किया जा सकता है। साथ ही सड़क की ऊंचाई 15 से 20 फीट तक रखने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार कर इसे कम करने की मांग पर भी विचार किया जा रहा है। किसान नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा भी भोपाल में चर्चा के लिए बुलाने का आश्वासन दिया गया है, जिससे किसानों को उम्मीद जगी है।

डेढ़ साल से जारी है विरोध

किसानों का आरोप है कि वे पिछले लगभग डेढ़ साल से उचित मुआवजे और एक्सेस कंट्रोल प्लान के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया। प्रस्तावित ग्रीन फील्ड रोड को जमीन से 15 से 20 फीट ऊंचाई पर बनाने की योजना है, जिससे गांवों की आपसी कनेक्टिविटी और खेतों तक पहुंच प्रभावित होगी।

किसानों का कहना है कि यदि सड़क ऊंचाई पर बनी तो ग्रामीणों को लंबा चक्कर लगाकर आवागमन करना पड़ेगा और कृषि कार्य भी प्रभावित होंगे। उनकी मांग है कि सड़क को यथासंभव जमीन स्तर पर बनाया जाए और जिन किसानों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है, उन्हें बाजार दर के अनुरूप मुआवजा दिया जाए।

89 गांव परियोजना से प्रभावित

दोनों ग्रीन फील्ड रोड परियोजनाओं से कुल 89 गांव प्रभावित हो रहे हैं। इनमें उज्जैन जिले के 56, इंदौर के 20 और रतलाम के 13 गांव शामिल हैं। इतने बड़े दायरे में भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य के चलते हजारों परिवारों की आजीविका और आवागमन व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

किसान संगठनों का कहना है कि विकास परियोजनाओं का वे विरोध नहीं कर रहे, लेकिन बिना पर्याप्त मुआवजा और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखे सड़क निर्माण स्वीकार्य नहीं होगा। फिलहाल प्रशासन और किसानों के बीच बातचीत जारी है और शाम तक इस मामले में अंतिम निर्णय सामने आ सकता है। किसानों ने स्पष्ट किया है कि यदि आश्वासन के अनुरूप निर्णय नहीं हुआ तो वे दोबारा बड़े स्तर पर आंदोलन की राह अपनाएंगे।

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