
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का आठवां दिन कई अहम मुद्दों को लेकर तीखे राजनीतिक टकराव का गवाह बना। सदन में निराश्रित गोवंश से किसानों को हो रही परेशानी, सिंगरौली में कोल माइंस के लिए पेड़ कटाई, इंदौर के मास्टर प्लान में देरी और प्रदेश में लगातार सामने आ रहे पुल टूटने के मामलों को लेकर कांग्रेस और भाजपा विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। विपक्ष ने जहां सरकार को किसानों, आदिवासियों और शहरी विकास के मुद्दों पर घेरा, वहीं सत्तापक्ष ने आरोपों को खारिज करते हुए विकास और वैकल्पिक व्यवस्थाओं का हवाला दिया।
फसल बचाएं या गोवंश भगाएं?
कार्यवाही के दौरान कांग्रेस विधायक अजय सिंह ने निराश्रित गोवंश की समस्या को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई हिस्सों में किसान रात-रात भर खेतों में टॉर्च लेकर गोवंश को भगाने के लिए मजबूर हैं। फसलें बर्बाद हो रही हैं और यातायात भी प्रभावित होता है। उन्होंने सवाल उठाया कि किसान अपनी फसल की रखवाली करें या बेसहारा गोवंश को ढूंढते फिरें?
कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे ने स्थिति की गंभीरता बताते हुए कहा कि कई किसान अपनी फसल बचाने के लिए खेतों में करंट लगा देते हैं, जिससे गोवंश की मौत हो जाती है और कई बार बच्चे भी इसकी चपेट में आ जाते हैं। उन्होंने इसे प्रशासनिक विफलता बताया और ठोस समाधान की मांग की।
इस पर पशुपालन मंत्री लखन पटेल ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि 25 जिलों में गौशालाओं के लिए स्थान चिह्नित किए गए हैं। जबलपुर, रायसेन, दमोह, सागर, अशोकनगर, खरगोन और रीवा में टेंडर जारी हो चुके हैं। प्रत्येक स्थान पर कम से कम 5 हजार गोवंश रखने की व्यवस्था की जाएगी। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 10 लाख निराश्रित गोवंश हैं, जिनमें से 4 लाख को नई व्यवस्था के तहत सुरक्षित किया जा सकेगा।
नीलगाय पर भी सियासत, अभयारण्य बनाने का सुझाव
भाजपा विधायक राजेंद्र पांडे ने चर्चा के दौरान नीलगाय की समस्या का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि नीलगाय किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं। जिस तरह शेर और बाघों के लिए अभयारण्य बनाए जाते हैं, उसी प्रकार नीलगाय के लिए भी बड़े स्तर पर अभयारण्य बनाए जाने चाहिए ताकि किसान और वन्यजीव दोनों सुरक्षित रह सकें।
सिंगरौली में पेड़ कटाई पर आरोप-प्रत्यारोप
सिंगरौली में अदाणी समूह को कोल माइंस आवंटन और उसके लिए पेड़ कटाई का मुद्दा भी सदन में गरमाया। कांग्रेस विधायक सेना पटेल ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जंगलों और आदिवासियों को उजाड़ना चाहती है। उन्होंने कहा कि कोल माइंस के नाम पर बड़े पैमाने पर पेड़ काटे जा रहे हैं, जिससे पर्यावरण और स्थानीय समुदायों पर गंभीर असर पड़ेगा।
कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने कहा कि भाजपा अदाणी के पास गिरवी रखी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी कांग्रेस नेता अदाणी समूह पर सवाल उठाते हैं तो भाजपा नेताओं को आपत्ति होने लगती है।
इसके जवाब में भाजपा विधायक रामनिवास शाह ने कहा कि पेड़ कटाई से सिंगरौली का कोई आर्थिक नुकसान नहीं होगा। उन्होंने तर्क दिया कि कोयला बिजली उत्पादन के लिए आवश्यक है और बिना बिजली के पानी और उद्योग संभव नहीं हैं। उन्होंने कहा कि खदानें नीलामी प्रक्रिया के तहत मिलती हैं और अदाणी के अलावा एस्सार, जेपी और नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड जैसी कंपनियां भी वहां कार्यरत हैं। असली मुद्दा विस्थापन और मुआवजे का है, जिस पर सरकार गंभीरता से काम कर रही है।
इंदौर का मास्टर प्लान मुख्यमंत्री कार्यालय में अटका?
कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने इंदौर के मास्टर प्लान में हो रही देरी को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मंत्री स्वयं स्वीकार कर रहे हैं कि मास्टर प्लान तैयार कर मुख्यमंत्री को भेज दिया गया है और अब वह वहीं अटका हुआ है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि 1995 के बाद से इंदौर की जनता नए मास्टर प्लान का इंतजार कर रही है। इंदौर एक औद्योगिक और ऐतिहासिक शहर है, लेकिन मुख्यमंत्री और मंत्री के बीच समन्वय की कमी के कारण विकास की प्रक्रिया बाधित हो रही है।
उन्होंने कहा कि शहर का सुनियोजित विकास, यातायात प्रबंधन और आधारभूत संरचना की मजबूती मास्टर प्लान पर निर्भर करती है, लेकिन राजनीतिक खींचतान के कारण यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही।
टूटते पुलों पर सरकार घिरी, 90 डिग्री ब्रिज पर उठे सवाल
भोपाल में बने 90 डिग्री एंगल वाले पुल और प्रदेश में सामने आ रहे पुल टूटने के मामलों को लेकर कांग्रेस विधायक महेश परमार ने पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब से राकेश सिंह मंत्री बने हैं, पुल टूटने के मामलों में रिकॉर्ड बन रहा है। उन्होंने सवाल किया कि यदि 90 डिग्री ब्रिज तकनीकी रूप से सही था तो संबंधित अधिकारियों को सम्मानित क्यों नहीं किया गया? और यदि उसमें खामी थी तो फिर कार्रवाई क्यों की गई?
परमार ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और निगरानी की कमी के कारण आम जनता की जान जोखिम में डाली जा रही है। उन्होंने पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।
हंगामे के बीच अधूरी रही कई चर्चाएं
दिनभर चली तीखी बहसों और हंगामे के कारण कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा नहीं हो सकी। हालांकि स्पष्ट है कि बजट सत्र के आगामी दिनों में निराश्रित गोवंश, कोल माइंस, शहरी मास्टर प्लान और बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता जैसे मुद्दे सदन में फिर से गूंज सकते हैं। विपक्ष जहां इन विषयों को जनहित से जोड़कर सरकार को घेरने की रणनीति पर है, वहीं सरकार विकास, ऊर्जा जरूरतों और वैकल्पिक व्यवस्थाओं का हवाला देकर अपने कदमों को सही ठहराने में जुटी है।
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