नई दिल्ली: गुरुवार तड़के गिरफ्तार किए गए जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के 14 छात्रों को पटियाला हाउस कोर्ट से जमानत मिल गई है। इनमें जेएनयू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) के तीन पदाधिकारी और एक पूर्व अध्यक्ष शामिल हैं। फिलहाल दस्तावेजों के सत्यापन तक उन्हें पटियाला हाउस कोर्ट से तिहाड़ जेल भेज दिया गया है, जहां वे न्यायिक हिरासत में रहेंगे।
गिरफ्तार छात्रों के नाम और पेशी
एक लंबे मार्च के बाद गुरुवार शाम जेएनयू से जिन लोगों को हिरासत में लिया गया, उनमें छात्र संघ अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष गोपिका, संयुक्त सचिव दानिश अली, पूर्व अध्यक्ष नीतीश कुमार, आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा, राहुल राज, नेहा, मणिकांत पटेल, गौरी कोलाल, अंश पिल्लई, वर्की परक्कल, रणविजय सिंह, विक्की कुमार, श्याम ससी और स्वतंत्र पत्रकार विष्णु तिवारी शामिल हैं। इन सभी को शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे पटियाला हाउस कोर्ट में ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया।
क्यों हो रहा था प्रदर्शन?
इससे पहले गुरुवार दोपहर जेएनयूएसयू ने अपनी कई मांगों को लेकर एक "लॉन्ग मार्च" निकाला था। छात्रों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
कुलपति शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित का इस्तीफा (हाल ही में एक पॉडकास्ट में कथित जातिगत टिप्पणी के कारण)।
कुछ छात्रों का निष्कासन आदेश रद्द करना।
यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026 (UGC Equity Regulations 2026) को लागू करना।
सार्वजनिक संस्थानों के लिए फंड बढ़ाना।
रोहित वेमुला एक्ट लागू करना।
बढ़ती फीस और पुलिस कार्रवाई
अदिति मिश्रा ने बताया कि उन्होंने पीजी सीयूईटी (PG CUET) की बढ़ती फीस को लेकर शिक्षा मंत्रालय को एक मांग पत्र सौंपा था। उन्होंने कहा, "सामान्य वर्ग के लिए दो टेस्ट पेपर की फीस ₹1,400 है और हर अतिरिक्त पेपर के लिए ₹700 देने होते हैं।" कई अपीलों के बावजूद मंत्रालय ने कोई जवाब नहीं दिया।
दोपहर करीब 2:30 बजे शुरू हुए इस प्रदर्शन के दौरान वसंत कुंज के एसीपी वेद प्रकाश मौके पर मौजूद थे। प्रदर्शन के दौरान झड़प हुई, जिसके बाद छात्रों ने हिरासत में लिए गए साथियों की रिहाई, कुलपति के इस्तीफे और पुलिस द्वारा डॉ. बी.आर. अंबेडकर की तस्वीर तोड़ने पर माफी की मांग की। गिरफ्तार छात्रा गौरी कोलाल ने आरोप लगाया कि पुलिस ने डॉ. अंबेडकर की तस्वीरें तोड़ दीं, जिसके कांच चुभने से कुछ छात्र घायल भी हुए।
कैंपस में तनाव और हिरासत
छात्रों के अनुसार, पुलिस ने बिना पूर्व सूचना के कार्रवाई की। विश्वविद्यालय के सभी गेटों पर बैरिकेड्स लगा दिए गए थे और वहां आरएएफ (RAF) जवानों के साथ बम निरोधक दस्ता भी तैनात था। कैंपस में लगभग 300 पुलिसकर्मी मौजूद थे। गेट पर ताला लगा था, जिसे बाहर निकलने के लिए दोपहर 3:30 बजे छात्रों ने काट दिया।
पुलिस ने अलग-अलग चरणों में 51 लोगों को हिरासत में लिया, लेकिन गिरफ्तारी सिर्फ 14 की हुई। विष्णु तिवारी ने कहा, "एसीपी ने हमें बैठने को कहा और भरोसा दिया कि किसी को हिरासत में नहीं लिया जाएगा, लेकिन बाद में पुलिस आगे बढ़ी और बैठे हुए लोगों को ही पकड़ लिया।"
छात्रों का पुलिस पर बर्बरता का आरोप
अध्यक्ष अदिति मिश्रा (जिनके हाथ पर चोट के निशान हैं) ने बताया कि सादे कपड़ों में आए कुछ लोगों ने भीड़ में घुसकर उन्हें घसीटा। उन्होंने आरोप लगाया कि गौरी के साथ भी बदसलूकी की गई; उन्हें पैरों से खींचकर ले जाया गया जिससे उनके कपड़े फट गए और उन्हें पैंट के ऊपर शॉल लपेटनी पड़ी। इस दौरान कई अन्य छात्रों के कपड़े भी फटे।
शाम करीब 4:30 बजे छात्रों को कापसहेड़ा थाने ले जाया गया। छात्रों के मुताबिक उन्हें खाना तो मिला, लेकिन वहां की परिस्थितियों के बावजूद कंबल नहीं दिए गए।
कानूनी कार्यवाही और एफआईआर
सुबह शिक्षकों ने हिरासत में लिए गए 14 छात्रों के लिए 25-25 हजार रुपये की जमानत दी। एसएफआई-दिल्ली (SFI-Delhi) के अध्यक्ष सूरज एलामोन ने बताया, "जमानत का आदेश आज शाम तक आएगा। उन्हें कोर्ट से तिहाड़ जेल ले जाने की बात कही गई थी, लेकिन अब हमें नहीं पता कि वे कहां हैं। उनके पास फोन भी नहीं हैं।"
वहीं, साउथ वेस्ट के डीसीपी प्रवक्ता के अनुसार, "इस घटना के संबंध में थाना वसंत कुंज नॉर्थ में बीएनएस (BNS) की धारा 221/121(1)/132/3(5) के तहत 26 फरवरी 2026 को एफआईआर नंबर 76/26 दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।"
द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.