विधानसभा में धिरौली कोल ब्लॉक पर हंगामा: 12,998 परिवारों के मुद्दे पर JPC मांग, विपक्ष का वाकआउट, जानिए पूरा मामला?

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और कांग्रेस विधायकों ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए विधानसभा की संयुक्त समिति (JPC) गठित करने की मांग की।
मध्य प्रदेश की विधानसभा (फाइल)
मध्य प्रदेश की विधानसभा (फाइल) फोटो- द मूकनायक
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भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के गुरुवार को प्रश्नकाल के दौरान सदन का माहौल उस समय गरमा गया जब नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सिंगरौली जिले के धिरौली स्थित अडानी ग्रुप के कोल ब्लॉक का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। सिंघार ने आरोप लगाया कि कोल ब्लॉक परियोजना के लिए आठ गांवों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है, जिससे हजारों परिवार प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन उन्हें न तो पूर्ण मुआवजा मिला है और न ही पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई गई है।

नेता प्रतिपक्ष ने कलेक्टर की सूची का हवाला देते हुए कहा कि कुल 12,998 परिवार इस परियोजना से प्रभावित बताए गए हैं। उन्होंने सदन में प्रश्न उठाया कि इतनी बड़ी संख्या में प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, मुआवजे और आजीविका के संबंध में सरकार की स्पष्ट योजना क्या है? उन्होंने कहा कि आदिवासी और ग्रामीण परिवारों को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है और प्रशासनिक स्तर पर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।

“मुआवजा वितरण में अनियमितता”, बाहरी लोगों को भुगतान का आरोप

सिंघार ने सदन में आरोप लगाया कि मुआवजा वितरण में पारदर्शिता नहीं बरती गई। उन्होंने दावा किया कि कई ऐसे लोगों को भी मुआवजा दिया गया है, जिनका भूमि अधिग्रहण से प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। उदाहरण प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा कि थाना प्रभारी जितेंद्र भदौरिया की पत्नी को 15 लाख रुपये से अधिक तथा यातायात प्रभारी दीपेंद्र सिंह कुशवाह की पत्नी स्वाति सिंह के नाम पर लगभग 14 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया।

नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि यदि ये नाम प्रभावित किसानों या भूमिधारकों की सूची में शामिल नहीं थे, तो फिर उन्हें किस आधार पर भुगतान किया गया? उन्होंने मांग की कि मुआवजा वितरण की पूरी सूची सदन के पटल पर रखी जाए और प्रत्येक भुगतान की जांच कराई जाए।

अडानी को लाभ पहुंचाने का आरोप, कार्य रोकने की मांग

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि कोल ब्लॉक परियोजना के नाम पर अडानी ग्रुप को लाभ पहुंचाया जा रहा है, जबकि स्थानीय लोगों के हितों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हो जाती और सभी प्रभावित परिवारों को संपूर्ण मुआवजा एवं पुनर्वास नहीं मिल जाता, तब तक धिरौली कोल ब्लॉक का कार्य तत्काल प्रभाव से रोका जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि सिंगरौली क्षेत्र पहले से ही खनन गतिविधियों के कारण पर्यावरणीय और सामाजिक दबाव झेल रहा है। ऐसे में बिना व्यापक जनसुनवाई और संतोषजनक पुनर्वास योजना के नई परियोजना शुरू करना स्थानीय निवासियों के साथ अन्याय है।

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को रोकने का आरोप

सिंघार ने सदन को बताया कि जब कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने गया, तो उसे प्रशासन द्वारा रोक दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि हजारों पुलिसकर्मियों की तैनाती कर प्रतिनिधिमंडल को गांवों तक पहुंचने से रोका गया। इस संबंध में वीडियो साक्ष्य उपलब्ध होने की बात भी उन्होंने कही।

उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए कहा कि यदि स्थिति सामान्य और पारदर्शी होती, तो विपक्षी प्रतिनिधिमंडल को दौरा करने से क्यों रोका जाता?

JPC गठन की मांग, जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस का वाकआउट

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और कांग्रेस विधायकों ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए विधानसभा की संयुक्त समिति (JPC) गठित करने की मांग की। उनका कहना था कि स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के बिना सच्चाई सामने नहीं आ पाएगी।

हालांकि सरकार की ओर से दिए गए जवाब से कांग्रेस विधायक संतुष्ट नहीं हुए। उनका आरोप था कि सरकार ने स्पष्ट और ठोस उत्तर देने से परहेज किया तथा जांच की मांग पर ठोस आश्वासन नहीं दिया। इसके विरोध में कांग्रेस विधायकों ने सदन से वाकआउट कर दिया।

विधानसभा में इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। धिरौली कोल ब्लॉक का मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का केंद्र बन गया है।

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