JNU में उमर खालिद की किताब पर चर्चा रद्द: प्रशासन ने बताया 'अधूरी जानकारी' तो भड़के छात्र, बाहर होगा कार्यक्रम

जेएनयू प्रशासन ने 'अधूरी जानकारी' का हवाला देते हुए उमर खालिद की किताब पर चर्चा को किया रद्द, भड़के छात्र संघ ने ऑडिटोरियम के बाहर आयोजन करने का किया ऐलान।
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जेएनयू में उमर खालिद की किताब 'फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज' पर चर्चा रद्द। विश्वविद्यालय प्रशासन पर झूठे कारण बताने का आरोप।
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नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) प्रशासन ने कैंपस में होने वाले एक पुस्तक चर्चा कार्यक्रम को रद्द कर दिया है। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र उमर खालिद की हाल ही में प्रकाशित किताब पर केंद्रित था। प्रशासन का कहना है कि आयोजकों ने कार्यक्रम के बारे में पूरी जानकारी साझा नहीं की थी। इस फैसले के बाद कैंपस में एक नया विवाद खड़ा हो गया है।

यह चर्चा खालिद की किताब "फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज: आदिवासी हिस्ट्रीज एंड द पॉलिटिक्स ऑफ पावर" पर होनी थी। यह किताब 2018 में जेएनयू के ऐतिहासिक अध्ययन केंद्र (CHS) में जमा की गई उनकी पीएचडी थीसिस पर आधारित है। मालूम हो कि साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की साजिश के आरोप में उमर खालिद सितंबर 2020 से हिरासत में हैं और उन पर कड़े गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज है।

तय कार्यक्रम के अनुसार, यह आयोजन 10 अगस्त 2026 को दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज-I (SSS-1) के ऑडिटोरियम में होना था। लेकिन विश्वविद्यालय ने रविवार को अपने आधिकारिक 'एक्स' (X) हैंडल पर जानकारी दी कि कार्यक्रम के बारे में पूरे तथ्य न बताने के कारण ऑडिटोरियम की बुकिंग रद्द कर दी गई है।

विश्वविद्यालय ने अपनी पोस्ट में लिखा कि जेएनयू एक लोकतांत्रिक और विकेंद्रीकृत संस्थान है। ऑडिटोरियम की अनुमति सोशल साइंसेज के डीन ने दी थी और उन्होंने ही इसे रद्द करने की कार्रवाई भी की है। अपनी इस सोशल मीडिया पोस्ट में जेएनयू प्रशासन ने प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति, केंद्रीय गृह मंत्री, विदेश मंत्री, वित्त मंत्री और शिक्षा मंत्री को भी टैग किया है।

कार्यक्रम के लिए जारी किए गए पोस्टर के मुताबिक, यह आयोजन 'विश्व आदिवासी दिवस' के मौके पर किया जा रहा था। इसमें वक्ता के तौर पर शिक्षाविद प्रोफेसर प्रभु महापात्रा, प्रोफेसर उमा चक्रवर्ती, लेखक शुद्धब्रत सेनगुप्ता, सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर और उमर खालिद की पार्टनर बानोज्योत्सना लाहिरी को शामिल होना था।

दस्तावेजों से पता चलता है कि ऑडिटोरियम की बुकिंग औपचारिक प्रक्रिया के तहत ही हुई थी। स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज को सौंपे गए बुकिंग फॉर्म में आयोजन का उद्देश्य 'आदिवासी दिवस पर सार्वजनिक चर्चा' बताया गया था। इसमें एसएसएस के प्रोफेसर अविनाश कुमार को फैकल्टी प्रतिनिधि के रूप में नामित किया गया था।

7 अगस्त को डीन ने बुकिंग को मंजूरी भी दे दी थी। आयोजकों ने अपने एक हस्तलिखित नोट में यह भी अनुरोध किया था कि चूंकि यह कार्यक्रम छात्रों द्वारा आयोजित किया जा रहा है, इसलिए आयोजन स्थल का शुल्क माफ कर दिया जाए। लेकिन 9 अगस्त को संयुक्त रजिस्ट्रार एम के पचौरी द्वारा एक नोटिस जारी कर बुकिंग रद्द कर दी गई। विश्वविद्यालय ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि बुकिंग अनुरोध में कौन सी जानकारी छिपाई गई थी।

इस बीच, जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) ने स्पष्ट कर दिया है कि वे आयोजन स्थल के बाहर इस चर्चा को जारी रखेंगे। छात्र संघ ने कहा कि कमरा रद्द करने से बातचीत रद्द नहीं होती। उन्होंने घोषणा की है कि यह कार्यक्रम अपने तय समय पर एसएएस-I इमारत के बाहर ही आयोजित किया जाएगा।

बुकिंग रद्द होने पर प्रोफेसर अविनाश कुमार ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन द्वारा दिया गया कारण पूरी तरह से झूठा है। उनके अनुसार, डीन को पहले ही बता दिया गया था कि चर्चा उमर खालिद की किताब पर होने जा रही है। छात्र संघ ने उनसे संपर्क करने से पहले ही डीन से मुलाकात की थी और उन्हीं की सलाह पर फॉर्म भरा गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर पूरी जानकारी नहीं दी गई थी, तो शुरुआत में बुकिंग को मंजूरी क्यों मिली।

प्रोफेसर कुमार ने प्रशासन से कार्यक्रम रद्द करने की असली वजह बताने की मांग की। उन्होंने पूछा कि जिस थीसिस के आधार पर जेएनयू ने ही उमर खालिद को पीएचडी की डिग्री दी है, उस पर आधारित किताब पर चर्चा क्यों नहीं हो सकती। इस मामले में जेएनयू की कुलपति शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित से जब जवाब मांगा गया, तो उन्होंने सवालों को डीन की तरफ बढ़ा दिया, जिन्होंने तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

बता दें कि उमर खालिद की यह किताब इसी साल जून में जगरनॉट द्वारा प्रकाशित की गई है। इसमें ब्रिटिश शासन के दौरान वर्तमान झारखंड के सिंहभूम क्षेत्र में आदिवासी समाज के इतिहास, स्थानीय शासन और उनके संघर्षों का विश्लेषण किया गया है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब कुछ दिन पहले ही छात्रों की आपत्ति के बाद जेएनयू में इस्कॉन (ISKCON) के एक प्रतिनिधि का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया था। विश्वविद्यालय की सेंट्रल लाइब्रेरी में 'एम्पावरिंग यूथ फॉर ए ब्राइटर फ्यूचर' नामक उस कार्यक्रम में 'बैलेंसिंग EQ, IQ और SQ' पर एक सत्र होना था। जेएनयू छात्र संघ ने कैंपस में धार्मिक आयोजनों को लेकर आपत्ति जताई थी। गौरतलब है कि पिछले साल भी छात्र संघ ने भगवद गीता पर इस्कॉन के एक कार्यक्रम का इसी तरह विरोध किया था।

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