
नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना के एक जवान को छेड़छाड़ के एक ऐसे मामले में विशेष अदालत ने बरी कर दिया है, जिसकी सच्चाई जानकर हर कोई हैरान है। दरअसल, शिकायतकर्ता ने अदालत के सामने यह स्वीकार किया कि जिस कथित घटना को लेकर उसने मुकदमा दर्ज कराया था, वह हकीकत नहीं बल्कि सिर्फ एक बुरा सपना था। यह पूरा मामला महज एक गलतफहमी का नतीजा था।
यह मामला अगस्त 2019 में नौबस्ता पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता एक 15 वर्षीय किशोरी थी, जिसने अपने जीजा अनुराग शुक्ला पर आरोप लगाया था कि जब वह सो रही थी तब उसके साथ छेड़छाड़ की गई थी।
2019 की उस रात सपने में क्या हुआ था?
प्राथमिकी (एफआईआर) के अनुसार, यह कथित घटना 8 मार्च 2019 की रात को हुई थी। उस समय किशोरी नौबस्ता थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले खाड़ेपुर इलाके में अपनी बहन के घर रुकी हुई थी। हालांकि, मुकदमे की सुनवाई के दौरान इस कहानी में एक बड़ा मोड़ आ गया। किशोरी ने अदालत को बताया कि उस रात वह एंटीबायोटिक दवाएं ले रही थी और अर्ध-बेहोशी की हालत में थी। इसी मानसिक स्थिति में उसने एक सपना देखा, जिसमें उसे महसूस हुआ कि शुक्ला ने उसे पकड़ लिया है और उसके साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं।
इस डरावने सपने से वह अचानक घबराकर उठ गई और शोर मचा दिया। बचाव पक्ष के वकील करीम अहमद सिद्दीकी ने भी इस बात की पुष्टि की है कि यह पूरी घटना केवल एक भ्रम थी।
किशोरी के पिता विजय तिवारी और शुक्ला की पत्नी यानी किशोरी की बड़ी बहन शिवानी तिवारी ने भी अदालत के सामने गवाही दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह शिकायत केवल एक गलतफहमी के चलते आवेश में आकर दर्ज करा दी गई थी।
गौरतलब है कि अनुराग शुक्ला और शिवानी तिवारी की शादी 10 फरवरी 2019 को ही हुई थी। कथित घटना के समय यह दंपती खाड़ेपुर में रह रहा था, लेकिन बाद में वे बिठूर शिफ्ट हो गए।
जेल में बिताने पड़े 19 दिन
इस एक गलतफहमी की शुक्ला को बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ी। उन्हें 29 सितंबर 2019 को गिरफ्तार कर लिया गया और जमानत मिलने से पहले उन्होंने 19 दिन जेल की सलाखों के पीछे बिताए। 17 अक्टूबर 2019 को उन्हें जाकर जमानत मिल सकी। इसके बाद पुलिस ने चार्जशीट दायर की और नवंबर 2019 में विशेष अदालत ने पॉक्सो (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम के तहत आरोप तय कर दिए। इन आरोपों में नाबालिग के साथ छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न जैसी गंभीर धाराएं शामिल थीं।
गलतफहमी दूर होने पर मिला न्याय
सुनवाई के दौरान जब शिकायतकर्ता ने अपने पुराने आरोप वापस ले लिए और परिवार के अन्य सदस्यों ने भी इसे स्पष्ट रूप से गलतफहमी माना, तो अदालत ने अपना अंतिम फैसला सुनाया। विशेष अदालत की न्यायाधीश रश्मि सिंह ने 7 मार्च को शुक्ला को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में यह माना कि अभियोजन पक्ष इस मामले को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है।
भले ही अदालत से न्याय मिल गया हो, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने अनुराग शुक्ला को गहरा मानसिक तनाव दिया और उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को भारी ठेस पहुंचाई। इस मुक़दमे का सीधा और नकारात्मक असर उनके करियर पर भी पड़ा। साल 2020 में वे भारतीय वायुसेना में कॉर्पोरल के पद पर पदोन्नत होने से चूक गए और वर्तमान में वे लीडिंग एयरक्राफ्टमैन के रूप में ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
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