ज़मानत मिलते ही भूमि अधिकार कार्यकर्ता पर लगा NSA, कांग्रेस का असम सरकार पर बड़ा आरोप

काजीरंगा में प्रस्तावित रिसॉर्ट का विरोध करने वाले कार्यकर्ता प्रणब डोले पर NSA की कार्रवाई को कांग्रेस ने बताया 'तानाशाही', जयराम रमेश बोले- यह असहमति को कुचलने की साजिश है।
Jairam Ramesh And Land rights activist Pranab Doley
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश और भूमि अधिकार कार्यकर्ता प्रणब डोले
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नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी ने रविवार, 2 अगस्त को असम की भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार पर हमला बोला है। पार्टी का आरोप है कि राज्य सरकार ने भूमि अधिकार कार्यकर्ता प्रणब डोले को जमानत मिलने के तुरंत बाद उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) लगाकर इसका घोर दुरुपयोग किया है। कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक असहमति को कुचलने का एक खुला और सुनियोजित प्रयास करार दिया है।

कांग्रेस के महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने इस पूरी कार्रवाई की कड़ी निंदा की। उन्होंने बताया कि एक जिला अदालत ने प्रणब डोले को जमानत दे दी थी, लेकिन इसके ठीक एक दिन बाद, 30 जुलाई को असम सरकार ने उन पर एनएसए लगा दिया। रमेश ने इस कदम को निवारक निरोध कानूनों का दुरुपयोग और राज्य सरकार की मनमानी बताया है।

गौरतलब है कि प्रणब डोले को काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के पास प्रस्तावित एक पांच सितारा रिसॉर्ट का विरोध कर रहे ग्रामीणों का समर्थन करने के कारण गिरफ्तार किया गया था। यह विवादित प्रोजेक्ट असम के मुख्यमंत्री द्वारा समर्थित है। गोलाघाट के मूल निवासी 2022 से ही इस परियोजना का कड़ा विरोध कर रहे हैं और उनका साफ तौर पर आरोप है कि इसके लिए उनकी जमीन जबरन छीनी जा रही है।

जयराम रमेश ने डोले को जमानत देने वाले सत्र न्यायालय के आदेश का भी विशेष तौर पर जिक्र किया। अदालत ने अपनी टिप्पणी में स्पष्ट कहा था कि जहां पर्यावरण संरक्षण और मूल निवासियों के अस्तित्व का सवाल हो, वहां स्थानीय लोगों की वाजिब चिंताओं को दबाने के लिए आपराधिक कानून का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। रमेश ने आरोप लगाया कि असम सरकार ने ठीक यही काम करने के लिए अंततः एनएसए का सहारा लिया।

कांग्रेस नेता ने कहा कि डोले पर लगाए गए एनएसए आदेश में संदिग्ध स्रोतों से विदेशी लेनदेन जैसे अस्पष्ट आरोप शामिल हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह मोदी सरकार की वही जानी-मानी पुरानी पटकथा है जिसका इस्तेमाल अक्सर विरोधियों पर होता है। इसे एक व्यापक पैटर्न का हिस्सा बताते हुए रमेश ने दावा किया कि भाजपा सरकारें विरोध के सुरों को दबाने के लिए एनएसए जैसे असाधारण कानूनों का लगातार इस्तेमाल कर रही हैं।

रमेश ने उत्तर प्रदेश में मजदूर कार्यकर्ताओं पर इस कानून के इस्तेमाल का भी उदाहरण पेश किया। उन्होंने कहा कि असम सरकार कानून के शासन और लोकतांत्रिक अधिकारों की पूरी तरह अनदेखी कर रही है। उन्होंने याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट और कई उच्च न्यायालय बार-बार यह चेतावनी दे चुके हैं कि निवारक कानूनों का इस्तेमाल न्यायिक आदेशों को दरकिनार करने या किसी की कैद की मियाद बढ़ाने के लिए हरगिज नहीं होना चाहिए।

असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने भी प्रणब डोले को इस तरह हिरासत में रखे जाने की कड़ी आलोचना की। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री के उस कथित बयान का भी जिक्र किया, जिसमें गुवाहाटी में दिवंगत गायक-संगीतकार जुबीन गर्ग के एक भित्ति चित्र (म्यूरल) को लेकर कलाकारों पर एनएसए लगाने की धमकी दी गई थी। गोगोई ने सरकार की इस पूरी कार्यप्रणाली और नीयत पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

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