
अगरतला: सीपीआई (एम) की पोलित ब्यूरो सदस्य वृंदा करात ने गुरुवार को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और टिपरा मोथा पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोला। अगरतला में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि इन दोनों दलों ने मिलकर त्रिपुरा में आदिवासी समुदायों के अधिकारों और हितों को कमजोर करने का काम किया है।
गलत सूचनाओं के प्रसार पर चिंता
गणमुक्ति परिषद के केंद्रीय सम्मेलन के शुभारंभ के अवसर पर आयोजित इस सभा में करात ने कहा कि जब से केंद्र में भाजपा सत्ता में आई है, सार्वजनिक विमर्श में गलत सूचनाओं और भ्रामक तथ्यों का बोलबाला बढ़ गया है। उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्य, पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देशों पर सक्रिय रूप से झूठी कहानियों (नैरेटिव) को बढ़ावा दे रहे हैं, जो समाज के लिए चिंताजनक है।
एंजेल चकमा की मौत और सामाजिक माहौल
एंजेल चकमा की दुखद मृत्यु का जिक्र करते हुए वामपंथी नेता ने कहा कि इस घटना ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है और इसे केवल एक पृथक घटना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनका तर्क था कि हत्या में सीधे तौर पर शामिल लोग तो दोषी हैं ही, लेकिन हमें उस व्यापक सामाजिक माहौल की भी गहराई से जांच करनी होगी जो जातीय अल्पसंख्यकों के खिलाफ नस्लीय दुर्व्यवहार को सामान्य बना रहा है।
करात के अनुसार, इस तरह की विभाजनकारी मानसिकता को भाजपा और उसके वैचारिक सहयोगियों द्वारा हवा दी जा रही है।
आदिवासी भावनाओं के शोषण का इतिहास
वृंदा करात ने राज्य की राजनीति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि त्रिपुरा में राजनीतिक ताकतों का चुनावी लाभ के लिए आदिवासी भावनाओं का शोषण करने का एक लंबा और पुराना इतिहास रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि यह प्रवृत्ति पहले त्रिपुरा उपजाति जुबा समिति (TUJS) और बाद में इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (IPFT) की कार्यशैली में स्पष्ट रूप से दिखाई देती थी। उनका दावा है कि अब टिपरा मोथा पार्टी भी ठीक उसी रास्ते पर चल रही है।
राजनीतिक दबाव और समझौते की राजनीति
पूर्व भाजपा सांसद रेवती त्रिपुरा के उस हालिया बयान पर भी करात ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें कथित तौर पर टिपरा मोथा के संस्थापक प्रद्योत किशोर देबबर्मा को जेल भेजने की बात कही गई थी। करात ने कहा कि इस तरह की बयानबाजी राजनीतिक दबाव और जबरदस्ती के इस्तेमाल को दर्शाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ पार्टियां सत्ता में बने रहने के लिए अपने वैचारिक सिद्धांतों और पुरानी स्थिति से समझौता करने में जरा भी संकोच नहीं कर रही हैं।
गठबंधन के भीतर विरोधाभास: जितेंद्र चौधरी
इस जनसभा को विपक्ष के नेता जितेंद्र चौधरी ने भी संबोधित किया। उन्होंने सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर मौजूद विरोधाभासों को उजागर करते हुए कहा कि इसने आदिवासी स्वायत्तता के मुद्दे पर जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है।
चौधरी ने बताया कि जहां आईपीएफटी (IPFT) लगातार 'टिपरालैंड' की मांग उठा रहा है, वहीं टिपरा मोथा पार्टी 'ग्रेटर टिपरालैंड' की बात कर रही है, जबकि भाजपा ऐसी किसी भी मांग का विरोध करती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि गठबंधन के सहयोगियों को अपनी सामूहिक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए ताकि जनता गुमराह न हो।
गौरतलब है कि यह बैठक गणमुक्ति परिषद के केंद्रीय सम्मेलन की शुरुआत के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों का एक अहम हिस्सा थी, जिसमें राज्य भर से पार्टी के नेताओं और समर्थकों ने भारी संख्या में हिस्सा लिया।
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