
नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी गांवों में 30 से अधिक बच्चों की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना के बीच 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रभावित इलाकों का दौरा कर जमीनी हकीकत का जायजा लिया। उन्होंने वहां के एक स्कूल की दयनीय स्थिति को उजागर किया और दावा किया कि स्थानीय आशा कार्यकर्ताओं को पिछले छह महीने से वेतन नहीं मिला है। इसके साथ ही उन्होंने गांवों में पीने के पानी की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
अपने दौरे के दौरान दिपके ने आदिवासी बच्चों के स्कूल का बारीकी से निरीक्षण किया और वहां परोसे जा रहे भोजन की गुणवत्ता की भी जांच की। प्रभावित आदिवासी क्षेत्रों की स्थिति को उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से दुनिया के सामने रखा। वहां की तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए उन्होंने नेताओं की मंशा और व्यवस्था पर तीखा तंज कसा।
उन्होंने अपने 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर लिखा कि यह बालाघाट के आदिवासी बच्चों का स्कूल है। इसके बाद उन्होंने सवाल किया कि क्या हमारे राजनेता कभी अपने बच्चों को ऐसी सुविधाओं वाले बदहाल स्कूल में पढ़ने के लिए भेजेंगे। इसी पोस्ट में उन्होंने यह भी उजागर किया कि इलाके की आशा कार्यकर्ताओं को पिछले छह महीनों से उनका मेहनताना तक नहीं दिया गया है।
एक अन्य पोस्ट में दिपके ने एक आदिवासी गांव के नल का वीडियो साझा किया, जिसमें वहां मिलने वाले पानी की असलियत दिखाई गई थी। उन्होंने सीधे तौर पर मंत्रियों और विधायकों से पूछा कि क्या वे अपने बच्चों को यह पानी पिलाने की हिम्मत जुटा पाएंगे, जहां 30 से ज्यादा मासूम अपनी जान गंवा चुके हैं।
यह सारा विवाद बालाघाट के सुदूर गांवों में, विशेषकर बैगा आदिवासी समुदाय के 30 से अधिक बच्चों की जान जाने के बाद और गहरा गया है। इन मौतों को लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पहले ही सवालों के घेरे में है। इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने भी सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार और बालाघाट के कलेक्टर से इन दुखद मौतों के संबंध में विस्तृत जवाब तलब किया है।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार द्वारा मौतों को लेकर की गई जांच में कई तरह के चिकित्सीय कारण सामने आए हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार, खसरा, मलेरिया, सह-संक्रमण, सांस लेने में तकलीफ, डिहाइड्रेशन, कुपोषण, एनीमिया और शॉक जैसी कई वजहों से इन बच्चों की जान गई है। केंद्र ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब तक किसी एक विशेष रोगजनक या वायरस को इन सभी मौतों का इकलौता जिम्मेदार नहीं पाया गया है।
इससे पहले भी दिपके ने प्रभावित गांवों का दौरा कर उन पीड़ित परिवारों से मुलाकात की थी, जिन्होंने अपने बच्चों को खो दिया है। उन्होंने प्रशासन से मौतों की जिम्मेदारी तय करने की पुरजोर मांग की थी। हालांकि, उनके इस दौरे का कुछ स्थानीय लोगों ने कड़ा विरोध भी किया। विरोध करने वालों का आरोप था कि दिपके इसका राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रहे हैं।
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