मध्य प्रदेश: बालाघाट जिले में 32 आदिवासी बच्चों की मौत के मामले के बीच एक बेहद चौंकाने वाला सच सामने आया है। यहां बिरसा ब्लॉक में सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए एक शख्स ने फर्जी एमबीबीएस (MBBS) दस्तावेजों का इस्तेमाल किया।
आरोपी डॉक्टर का नाम सुनील कुमार सिंह है, जिसकी अब तक गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। आधिकारिक तौर पर जिन 32 बच्चों की जान गई है, उनमें से कम से कम सात मौतें जून महीने में उसके छुट्टी पर जाने से पहले ही हो चुकी थीं।
अधिकारियों के अनुसार, बिरसा से हटाए जाने के बाद आरोपी को दमोह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) भेजा गया था। दमोह पीएचसी के अधिकार क्षेत्र में भी इन बच्चों में से दो की मौत होने की खबर सामने आई है।
सुनील कुमार सिंह ने जाली मेडिकल दस्तावेजों के सहारे इस आदिवासी ब्लॉक में लगभग 17 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं। उसे साल 2023 में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) के पद पर प्रमोट भी कर दिया गया था।
राज्य स्तरीय जांच में उसकी योग्यता में फर्जीवाड़ा पाए जाने के बाद उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। हालांकि, फिलहाल ऐसा कोई सीधा सबूत नहीं मिला है जो इन बच्चों की मौतों को सीधे तौर पर इस फर्जी डॉक्टर से जोड़ता हो।
बालाघाट के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. शत्रुघ्न सिंह दहिया ने बताया कि शुरुआत में 2009 में उसे संविदा के आधार पर नियुक्त किया गया था और बाद में नियमित कर दिया गया। उस समय भर्तियां जिला स्तर पर ही की जाती थीं।
सीएमएचओ ने यह भी स्पष्ट किया कि चूंकि अब इस मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है, इसलिए यह पूरी तरह से पुलिस की जांच का विषय बन गया है।
आरोपी के कार्यकाल में कितनी मौतें हुईं, इस सवाल पर डॉ. दहिया ने कहा कि 2009 से उसकी तैनाती थी, ऐसे में स्वाभाविक मौतें भी हुई होंगी। लेकिन अगर हालिया मामलों की बात करें, तो उसकी तैनाती वाले दमोह पीएचसी क्षेत्र से दो बच्चों की मौत दर्ज की गई है।
इस पूरे मामले ने प्रभावित क्षेत्र में खसरे (Measles) के टीकाकरण अभियान पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों का कहना है कि अपने कार्यकाल के दौरान आरोपी ने 75 प्रतिशत टीकाकरण पूरा होने की रिपोर्ट दी थी।
अब प्रशासन को इस इलाके में नए सिरे से टीकाकरण अभियान चलाना पड़ रहा है। कई बच्चों की मौत के पीछे खसरा भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है।
रिपोर्ट किए गए टीकाकरण के बावजूद खसरे के मामले सामने आने पर डॉ. दहिया ने बताया कि गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM) से पीड़ित बच्चों में कई बार वैक्सीन बेअसर हो जाती है। इसका मतलब यह नहीं है कि पहले टीकाकरण नहीं हुआ था।
बैगा जनजाति के बच्चों में गंभीर कुपोषण को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में लगातार कैंप कर रही हैं। फिलहाल, जाली दस्तावेजों का मामला और बच्चों की मौत दोनों अलग-अलग विषय माने जा रहे हैं और पुलिस सुनील सिंह की फर्जी डिग्रियों की गहनता से जांच कर रही है।
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