MP: दतिया में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी, नौकरी दिलाने के नाम पर डेढ़-डेढ़ लाख रुपये लेने का आरोप

नवरात्रि में देवी पंडालों के आसपास गंदगी से श्रद्धालु परेशान, नियमितीकरण की मांग पर अड़े कर्मचारी; नौकरी दिलाने के नाम पर डेढ़-डेढ़ लाख रुपये लेने का आरोप
MP: दतिया में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी, नौकरी दिलाने के नाम पर डेढ़-डेढ़ लाख रुपये लेने का आरोप
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भोपाल। मध्य प्रदेश के दतिया में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल लगातार दूसरे दिन भी जारी रही। हड़ताल के कारण शहर में कचरा उठाव ठप हो गया है और कई स्थानों पर कचरे के ढेर लगने लगे हैं। नवरात्रि के दौरान देवी पंडालों के आसपास भी कचरा जमा होने से श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सफाई व्यवस्था प्रभावित होने के बीच हड़ताल खत्म कराने के प्रयास भी जारी हैं, लेकिन नियमितीकरण की मांग को लेकर कर्मचारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

हड़ताल के बीच नगर पालिका अध्यक्ष के बेटे प्रशांत ढंगुला देर रात सफाई कर्मचारियों के बीच पहुंचे। उन्होंने कर्मचारियों से बातचीत कर उन्हें समझाने और हड़ताल समाप्त कराने की कोशिश की। इस दौरान कर्मचारियों ने अपनी समस्याएं, वेतन और नौकरी की सुरक्षा से जुड़े सवाल उनके सामने रखे। बातचीत के दौरान कुछ मुद्दों पर तीखी बहस भी हुई। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उनसे नौकरी पर रखने के नाम पर डेढ़-डेढ़ लाख रुपये तक लिए गए, जबकि उन्हें काम के बदले केवल 6 हजार रुपये वेतन दिया जा रहा है। हालांकि, रिश्वत या नौकरी के नाम पर पैसे लेने के इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

नौकरी के नाम पर डेढ़-डेढ़ लाख रुपये लेने का आरोप

सफाई कर्मचारियों ने बातचीत के दौरान आरोप लगाया कि नौकरी पर रखने के नाम पर उनसे बड़ी रकम ली गई। कर्मचारियों का दावा है कि उन्होंने नौकरी पाने के लिए डेढ़-डेढ़ लाख रुपये तक दिए, लेकिन इसके बावजूद उन्हें बेहद कम वेतन पर काम करना पड़ रहा है।

कर्मचारियों ने इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए सवाल उठाए कि जब उनसे नियमित रूप से काम कराया जा रहा है, तो उन्हें उचित वेतन और नौकरी की सुरक्षा क्यों नहीं मिल रही है।

यह आरोप सामने आने के बाद नगर पालिका की सफाई व्यवस्था और कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़े सवाल भी चर्चा में आ गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित दस्तावेजों, भुगतान के साक्ष्यों और नगर पालिका प्रशासन का पक्ष सामने आना जरूरी है।

रोजाना 8 घंटे काम, फिर भी उचित वेतन और सुरक्षा नहीं

हड़ताल कर रहे सफाई कर्मचारियों का कहना है कि उनसे रोजाना करीब 8-8 घंटे काम कराया जाता है। इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त वेतन नहीं मिलता और भविष्य में नौकरी जारी रहने को लेकर भी अनिश्चितता बनी रहती है।

कर्मचारियों के मुताबिक, सफाई जैसे जरूरी काम में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद भी उन्हें स्थायी रोजगार का भरोसा नहीं मिल पा रहा है। उनका कहना है कि कम वेतन में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। इसके अलावा, नौकरी की सुरक्षा नहीं होने के कारण उन्हें भविष्य की चिंता भी बनी रहती है।

इन्हीं समस्याओं को लेकर कर्मचारी लंबे समय से नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब उनसे लगातार काम लिया जा रहा है, तो उनकी सेवाओं को नियमित करने की दिशा में भी कदम उठाए जाने चाहिए।

रिक्त पदों पर नियमित करने की मांग

सफाई कर्मचारियों की प्रमुख मांग है कि नगर पालिका में रिक्त पदों पर उन्हें नियमित किया जाए। कर्मचारियों का कहना है कि केवल आश्वासन से उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा। वे चाहते हैं कि नियमितीकरण को लेकर ठोस निर्णय लिया जाए।

कर्मचारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी नियमितीकरण की मांग पूरी नहीं होती, तब तक वे हड़ताल समाप्त नहीं करेंगे। इससे नगर पालिका प्रशासन के सामने सफाई व्यवस्था को सामान्य करने की चुनौती बढ़ गई है।

कर्मचारियों का रुख बताता है कि फिलहाल विवाद केवल कचरा उठाव या ठेका व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें रोजगार की स्थिरता, वेतन और काम की शर्तें भी प्रमुख मुद्दे हैं।

हड़ताल खत्म कराने के लिए कर्मचारियों से बातचीत करने पहुंचे नगर पालिका अध्यक्ष के बेटे प्रशांत ढंगुला ने सफाई व्यवस्था को पूरी तरह ठेके पर दिए जाने की बात से इनकार किया।

उन्होंने कहा कि नगर पालिका की ओर से केवल घर-घर जाकर कचरा कलेक्शन करने का काम ठेके पर सौंपा गया है। उनके मुताबिक, इस व्यवस्था का उद्देश्य कर्मचारियों को हटाना नहीं है और इससे किसी की नौकरी नहीं जाएगी।

प्रशांत ढंगुला ने कर्मचारियों को समझाने की कोशिश की कि ठेका व्यवस्था लागू होने का मतलब यह नहीं है कि मौजूदा कर्मचारियों को काम से बाहर कर दिया जाएगा। हालांकि, बातचीत के बावजूद कर्मचारी अपनी नियमितीकरण की मांग पर अड़े रहे।

कर्मचारियों का कहना है कि पहले उनकी नौकरी और भविष्य को लेकर स्पष्ट निर्णय लिया जाना चाहिए। इसके बाद ही ठेका व्यवस्था को लेकर आगे की प्रक्रिया अपनाई जाए।

ठेका व्यवस्था को लेकर कर्मचारियों की आशंकाएं

सफाई कर्मचारियों की नाराजगी के पीछे ठेका व्यवस्था को लेकर उनकी आशंकाएं भी एक प्रमुख कारण हैं। कर्मचारियों को डर है कि व्यवस्था में बदलाव होने पर उनकी नौकरी, वेतन और काम की शर्तों पर असर पड़ सकता है।

दूसरी ओर, प्रशांत ढंगुला ने भरोसा दिलाने का प्रयास किया कि केवल घर-घर कचरा कलेक्शन का काम ठेके पर दिया गया है और कर्मचारियों को हटाने का कोई फैसला नहीं लिया गया है।

ऐसे में विवाद के समाधान के लिए नगर पालिका प्रशासन की ओर से ठेका व्यवस्था, कर्मचारियों की वर्तमान स्थिति और नियमितीकरण की मांग पर स्पष्ट जानकारी देना महत्वपूर्ण होगा। इससे कर्मचारियों की आशंकाओं को दूर करने और हड़ताल समाप्त कराने में मदद मिल सकती है।

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