क्या हर प्रेम संबंध का अंत शादी ही है? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज किया रेप केस, सुनाया अहम फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: हर प्रेम संबंध का अंत शादी नहीं, 'शादी के झूठे वादे' पर दर्ज रेप केस किया खारिज
इलाहाबाद हाईकोर्ट
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उत्तर प्रदेश: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में 'शादी के झूठे वादे' पर दर्ज एक बलात्कार के मामले को रद्द कर दिया है। अदालत ने इस दौरान एक बेहद अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि यह न तो अनिवार्य है और न ही सुनिश्चित कि हर रोमांटिक रिश्ते का अंजाम शादी ही हो।

न्यायालय का मानना है कि रिश्ते कई व्यक्तिगत, व्यावहारिक या परिस्थितिजन्य कारणों से खत्म हो सकते हैं। इनमें आपसी मतभेद या व्यक्तिगत प्राथमिकताओं में बदलाव भी शामिल है।

आपराधिक न्याय प्रणाली के दुरुपयोग पर चिंता

जस्टिस विवेक कुमार सिंह की सिंगल बेंच ने अपने आदेश में समाज में बढ़ते एक नए चलन पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि लंबी अवधि तक चलने वाले सहमति से बने संबंधों के खराब होने पर, अब उन्हें आपराधिक रूप देने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि एक शिक्षित और स्वतंत्र वयस्क को सहमति से किसी रिश्ते में प्रवेश करते समय यह समझना चाहिए कि रिश्ते की विफलता को अपराध ठहराने के लिए कानून का सहारा नहीं लिया जा सकता।

न्यायाधीश ने आगे कहा कि किसी भी रिश्ते का टूटना अपने आप में कोई आपराधिक जिम्मेदारी तय नहीं करता है। ऐसे मामलों में संवेदनशीलता, संयम और दोनों व्यक्तियों की स्वायत्तता और उनके व्यक्तिगत विकल्पों के प्रति उचित सम्मान के साथ विचार किया जाना चाहिए।

क्या है पूरा मामला?

इस विवाद की शुरुआत 10 अगस्त 2019 को हुई थी, जब एक महिला ने प्रयागराज जिले में शादी का झांसा देकर रेप, मारपीट और आपराधिक धमकी देने के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई थी।

शिकायत दर्ज होने के कुछ ही दिनों बाद, 27 अगस्त को प्रयागराज के आर्य समाज मंदिर में दोनों परिवारों की मौजूदगी में आरोपी ने उस महिला के साथ विवाह कर लिया।

शादी के बावजूद महिला ने अपनी पुलिस शिकायत वापस नहीं ली। उसने यह कहते हुए कानूनी मामले की पैरवी जारी रखी कि उसका पति उसे पत्नी का दर्जा नहीं दे रहा है और उसे वह सम्मान नहीं मिल रहा है जिसकी एक विवाहित महिला हकदार होती है।

मजिस्ट्रेट और पुलिस के सामने भी वह अपने पहले दिए गए बयानों पर पूरी तरह कायम रही। इसके आधार पर जांच अधिकारी ने जनवरी 2020 में आरोपी युवक के खिलाफ बलात्कार, मारपीट और आपराधिक धमकी के आरोपों में चार्जशीट दायर कर दी।

इसके जवाब में आरोपी पति ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उसने अदालत से चार्जशीट, इलाहाबाद के विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा चार्जशीट पर संज्ञान लेने के आदेश और मामले की पूरी कार्यवाही को रद्द करने की गुहार लगाई।

अपनी एफआईआर में महिला ने यह भी बताया था कि वह 2014 से प्रयागराज में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थी, जहां उसकी मुलाकात उस व्यक्ति से हुई थी।

उसका मुख्य आरोप था कि युवक ने शादी का वादा करके उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। जब वह शादी करने से लगातार इनकार करने लगा, तो मजबूरन उसे यह मामला दर्ज कराना पड़ा।

अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें

महिला द्वारा केस वापस लेने से इनकार करने के बाद, उसी साल पति ने अपने खिलाफ चल रहे मामले से बचने के लिए एक रिट याचिका दायर कर दी।

इसके बाद नवंबर 2019 में हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने अपने आदेश में पुलिस रिपोर्ट पेश होने तक व्यक्ति की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए उसे फौरी राहत प्रदान की थी।

मई में हुई इस मामले की अहम सुनवाई के दौरान पति के वकील ने अदालत के सामने मजबूती से अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि महिला पिछले पांच वर्षों से उनके मुवक्किल के संपर्क में थी और यह एफआईआर महज एक टूटे हुए रिश्ते की हताशा का नतीजा है।

वकील ने यह भी दलील दी कि पहली बार हुए कथित बलात्कार की किसी भी तारीख, समय और स्थान का कोई जिक्र नहीं किया गया है। इसके अलावा, अदालत को यह भी बताया गया कि शिकायतकर्ता महिला काफी पढ़ी-लिखी है और उसके पास एमए, एलएलबी और बीएड जैसी उच्च डिग्रियां हैं।

वहीं, दूसरी तरफ महिला के वकील और अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ता ने याचिकाकर्ता की मांग का कड़ा विरोध किया। उनका तर्क था कि पिछले पांच वर्षों तक महिला का शारीरिक शोषण किया गया और खुद को कानूनी कार्रवाई की आंच से बचाने के लिए ही उस व्यक्ति ने उससे शादी का नाटक रचा।

हाईकोर्ट का अंतिम निष्कर्ष

दोनों पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद जस्टिस सिंह की पीठ ने कहा कि शिकायतकर्ता महिला इतनी परिपक्व और समझदार है कि वह नैतिक और अनैतिक कार्यों के परिणामों को अच्छी तरह समझ सके।

अदालत ने कहा कि यह किसी भी तरह से नहीं माना जा सकता कि उसने किसी गलतफहमी के प्रभाव में आकर शारीरिक संबंधों के लिए अपनी सहमति दी थी।

कोर्ट ने माना कि पांच साल तक चला यह निरंतर रिश्ता इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि यह प्यार भरे संबंध के खटास में बदलने का एक सीधा मामला है।

पीठ ने अपने आदेश में साफ किया कि आवेदक के खिलाफ बलात्कार का कोई भी अपराध नहीं बनता है। एफआईआर केवल इसलिए दर्ज कराई गई थी क्योंकि महिला उसके व्यवहार से नाराज थी और वह उस पर शादी करने का भारी दबाव बनाना चाहती थी।

स्थानीय अदालत में लंबित बलात्कार के मामले की पूरी कार्यवाही को रद्द करते हुए हाईकोर्ट ने इसे अपनी तरह का एक अत्यंत दुर्लभ मामला बताया।

न्यायालय ने कहा कि इस केस में आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने के लिए अदालत के अंतर्निहित अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है, क्योंकि इसे आगे बढ़ाना पूरी तरह से निरर्थक होगा और यह आपराधिक न्याय प्रणाली का घोर दुरुपयोग कहलाएगा।

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