
उत्तर प्रदेश: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि नैतिकता और कानून को अलग-अलग रखा जाना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि आपसी सहमति से किसी वयस्क के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाला शादीशुदा पुरुष कोई अपराध नहीं कर रहा है।
अदालत ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी एक लिव-इन कपल की सुरक्षा संबंधी याचिका पर सुनवाई के दौरान की। इसके साथ ही, संबंधित पुलिस अधीक्षक (एसपी) को इस जोड़े की सुरक्षा सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
इस मामले की शुरुआत यूपी के शाहजहांपुर स्थित जैतीपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज एक एफआईआर से हुई। 18 वर्षीय युवती की मां ने 8 जनवरी को यह शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि 30 साल के एक पहले से शादीशुदा व्यक्ति ने शादी का झांसा देकर उनकी बेटी का अपहरण कर लिया है।
लड़की के परिवार के वकील ने दलील दी कि एक विवाहित व्यक्ति का किसी अन्य महिला के साथ लिव-इन में रहना कानूनी अपराध है। इस पर जस्टिस जे जे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने अपनी राय स्पष्ट की।
बेंच ने कहा कि ऐसा कोई अपराध नहीं है जहां आपसी सहमति से किसी वयस्क के साथ लिव-इन में रहने वाले विवाहित पुरुष पर मुकदमा चलाया जा सके। न्यायाधीशों ने जोर देकर कहा कि अगर कानून के तहत कोई अपराध नहीं बनता है, तो सामाजिक राय और नैतिकता अदालत के फैसलों को निर्देशित नहीं कर सकती।
25 मार्च को जारी अपने आदेश में, खंडपीठ ने युवती के परिवार वालों को इस जोड़े को किसी भी तरह का शारीरिक नुकसान पहुंचाने से रोक दिया है। परिवार को निर्देश दिया गया है कि वे न तो उनके घर में प्रवेश करें और न ही किसी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम या अन्य लोगों के जरिए उनसे संपर्क करने की कोशिश करें।
इसके अतिरिक्त, अदालत ने शाहजहांपुर के एसपी को याचिकाकर्ताओं की सुरक्षा के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया है। आदेश में साफ तौर पर कहा गया है कि अदालत के अगले निर्देश तक इस मामले में याचिकाकर्ताओं को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।
इस मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल के लिए तय की गई है। अदालत ने राज्य सरकार के वकील और युवती के परिवार के अधिवक्ता को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।
जैतीपुर थाने के एक अधिकारी ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि उस व्यक्ति की पत्नी और चार बच्चे अब अपने मायके में हैं। पुलिस अधिकारी के अनुसार, उस व्यक्ति के परिवार में अब केवल उसके 80 वर्षीय पिता हैं जो उसके साथ रहते हैं।
युगल ने अपनी याचिका में गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं। लिव-इन में रह रही युवती ने बताया कि उसके माता-पिता और अन्य रिश्तेदारों ने उसे जान से मारने की धमकी दी है, जिसके चलते उन्हें 'ऑनर किलिंग' का डर सता रहा है।
अदालत ने इस तथ्य पर भी गौर किया कि युवती ने शाहजहांपुर के एसपी को एक अर्जी देकर बताया था कि वह बालिग है और अपनी मर्जी से उस व्यक्ति के साथ रह रही है। अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जाहिर तौर पर एसपी ने इस आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं की।
अपने फैसले में खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के 'शक्ति वाहिनी बनाम भारत संघ और अन्य' मामले का हवाला दिया। अदालत ने कहा कि एक साथ रह रहे दो वयस्कों की सुरक्षा करना पुलिस का कर्तव्य है और इस संबंध में विशेष जिम्मेदारी पुलिस अधीक्षक की होती है।
लिव-इन में रहने वाली युवती के वकील शहंशाह अख्तर खान ने अदालत के समक्ष एक अहम कानूनी पहलू रखा। उन्होंने दलील दी कि कानून के अनुसार केवल उस व्यक्ति की पत्नी ही उसके किसी अन्य महिला के साथ रहने पर कानूनी आपत्ति जता सकती है। पत्नी के परिवार या किसी अन्य महिला के परिवार सहित किसी भी तीसरे व्यक्ति को यह अधिकार नहीं है।
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