
रांची (झारखंड): श्रद्धानंद सेवाश्रम मिडिल स्कूल के शिक्षक अभिषेक कुमार सिन्हा को नाबालिग छात्राओं से अश्लील व्यवहार को लेकर एक मामले में रांची की पॉक्सो कोर्ट ने जमानत दे दी है। यह वही मामला है जिसे सबसे पहले 'द मूकनायक' ने उजागर किया था। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि स्कूल की किसी अन्य छात्रा ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ कोई शिकायत नहीं दी है, न ही स्कूल प्रशासन को कोई शिकायत मिली है। आरोपी 20 हजार रुपये के मुचलके और दो जमानतदारों के साथ रिहा किया गया।
रांची के सुखदेवनगर स्थित श्रद्धानंद सेवाश्रम मिडिल स्कूल में शिक्षक अभिषेक कुमार सिन्हा पर गंभीर आरोप लगे थे। दिसंबर 2023 में नियुक्त इस शिक्षक पर आरोप था कि वह स्कूल की नाबालिग छात्राओं को प्रेम जाल में फंसाकर अश्लील बातें करते थे, वीडियो कॉल पर खुद को नग्न दिखाते थे और एक छात्रा को होटल तक ले गए थे। एक पीड़ित बच्ची इतनी ट्रॉमा में थी कि उसने कई दिनों से स्कूल आना बंद कर दिया था।
एक गुमनाम शिकायतकर्ता ने इस मामले की लिखित शिकायत शिक्षा सचिव, और झारखंड महिला आयोग को दी। शिकायत में दावा किया है कि कम से कम 10-15 छात्राएं इस शिक्षक की हरकतों का शिकार बनी हैं और स्कूल प्रबंधन को इसकी पूरी जानकारी होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।
आरोपी शिक्षक ने एक नाबालिग छात्रा के साथ अश्लील चैट करते हुए उससे उसके प्राइवेट पार्ट्स, अंडरगारमेंट्स के रंग , वीडियो कॉल पर डीप नेक टॉप पहनकर आने और टॉप उठाने की माँग रखी। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि उसने छात्रा से सीधे पूछा – "तुम अपनी वर्जिनिटी मुझसे लूस करवाओगी?"
19 अगस्त 2025 को 'द मूकनायक' ने इस मामले को प्राथमिकता से प्रकाशित किया। रिपोर्ट में बताया गया कि स्कूल प्रिंसिपल अनुज कुमार सिंह को 18 अगस्त को इसकी जानकारी मिलने के बावजूद पुलिस में रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई। बल्कि शिक्षक को सिर्फ चेतावनी पत्र देकर मामले को दबाने की कोशिश की गई।
'द मूकनायक' की खबर का असर यह हुआ कि रांची डीसी मंजुनाथ भजंत्री ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला शिक्षा अधीक्षक को जांच के निर्देश दिए। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी। बाल कल्याण समिति (CWC) ने भी सुखदेवनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस जांच के बाद 17 मई को आरोपी शिक्षक अभिषेक कुमार सिन्हा को गिरफ्तार किया गया। 18 मई को उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। उसके खिलाफ सुखदेवनगर थाना कांड संख्या 451/2025 के तहत पॉक्सो एक्ट की धारा 12 और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 75 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
मामले की सुनवाई AJC-IV सह पॉक्सो विशेष न्यायाधीश बीरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की अदालत में हुई। एक बार अदालत ने आरोपी की जमानत नामंजूर करते हुए उसे जेल का आदेश किया। अगली बार कोर्ट ने BNSS-23 की धारा 483 के तहत दायर जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए बेल मंजूर की
आरोपी की ओर से एडवोकेट विक्रांत सिन्हा ने पैरवी की। अधिवक्ता ने बताया की आरोपी 18 मई से न्यायिक हिरासत में है। इससे पहले इसी अदालत में जमानत याचिका खारिज हो चुकी थी, उसके बाद कोई अन्य याचिका दायर नहीं की गई। यह एफआईआर बिना किसी पीड़िता का नाम बताए केवल एक अखबार में छपी खबर के आधार पर CWC द्वारा दर्ज कराई गई थी।
आरोपी का अपनी सहकर्मी निधि से अच्छा प्रोफेशनल रिश्ता था, लेकिन जब उसकी शादी तय हुई तो उसने निधि से दूरी बना ली। इससे नाराज होकर निधि ने अपने पति शिव तिवारी के साथ मिलकर झूठा केस किया। जांच में पूरा सहयोग किया, मोबाइल और लैपटॉप जांच के लिए दिए, लेकिन कोई अश्लील चैट बरामद नहीं हुई। स्कूल की किसी भी छात्रा की ओर से आरोपी के खिलाफ कोई मौखिक या लिखित शिकायत नहीं है।
स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (SPP) ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी एक शिक्षक है और उसने छात्राओं के साथ यौन उत्पीड़न किया है, जो बहुत ही घृणित अपराध है।एक पीड़ित छात्रा ने BNSS की धारा 183 के तहत अपना बयान दर्ज कराया है, जिसमें उसने अभियोजन पक्ष का समर्थन किया है। मामले की जांच अभी जारी है। सूचनाकर्ता (CWC चेयरपर्सन) ने भी जमानत का विरोध किया।
केस डायरी के पैरा 12 और 13 के मुताबिक स्कूल प्रशासन को शिक्षक के खिलाफ छात्राओं के यौन उत्पीड़न की कोई शिकायत नहीं मिली थी।
केस डायरी के पैरा 14 के अनुसार जांच अधिकारी ने स्कूल परिसर में आने वाली छात्राओं से पूछताछ की, लेकिन किसी भी छात्रा ने शिक्षक के व्यवहार के खिलाफ कोई शिकायत नहीं की।
एक छात्रा ने अपने बयान में यौन उत्पीड़न की बात तो कही है, लेकिन आरोपी की ओर से कुछ दस्तावेज पेश किए गए हैं, जिनमें उसी छात्रा ने माना है कि शिक्षक ने उसके साथ यौन उत्पीड़न नहीं किया और यह भी कि कुछ व्हाट्सएप चैट उसने किसी दूसरे व्यक्ति के नंबर का इस्तेमाल करके की थीं।
सभी तथ्यों को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि "केस डायरी के अद्यतन अवलोकन से यह भी पता चलता है कि किसी अन्य छात्रा ने आरोपी के खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया है और यहाँ तक कि स्कूल प्रशासन को भी छात्राओं के यौन उत्पीड़न की कोई शिकायत नहीं मिली है।" इन्हीं आधारों पर अदालत ने आरोपी अभिषेक कुमार सिन्हा को जमानत मंजूर की।
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