मध्य प्रदेश: छात्रा से रेप के बाद पुल से नीचे फेंका, रीढ़ और दोनों पैरों की हड्डियां टूटी, हालत नाजुक

नाबालिग से घटना पेश आने के बाद मध्य प्रदेश राज्य बाल सरंक्षण आयोग ने पुलिस अधीक्षक ग्वालियर को पत्र लिखा है।
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Stop RapeGraphic- The Mooknayak

भोपाल। मध्य प्रदेश में बच्चों के खिलाफ अपराध थमने का नाम नहीं ले रहे। हाल ही में ग्वालियर जिले के डबरा में एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म के बाद उसे आरोपियों ने पुल से 30 फीट नीचे फेंक दिया, जिससे उसकी रीढ़ और दोनों पैरों की हडि्डयां टूट गईं। नाबालिग की स्थिति नाजुक बताई जा रही है, जिसका उपचार अस्पताल में चल रहा है। 

डबरा शहर थाना क्षेत्र में रहने वाली नाबालिग सोमवार सुबह कोचिंग के लिए अपने घर से निकली थी। रास्ते में उसे उसके परिचित युवक बॉबी रावत और सतेंद्र कुशवाह मिले। इस दौरान वे नाबालिग को अगवा कर सहराई पुल के पास सुनसान इलाके में ले गए। यहां दोनों ने नाबालिग से दुष्कर्म किया और उसे पुल से नीचे फेंककर भाग निकले। 

स्थानीय लोगों ने जब पुल के नीचे बेहोश पड़ी बच्ची को देखा तो फौरन पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराया गया। बच्ची दो दिन बाद होश में आई तो उसने अपने साथ हुई घटना पुलिस को बताई। घटना सोमवार दोपहर की है और बुधवार को इलाज के दौरान होश आने पर बच्ची ने मामले की जानकारी दी। पुलिस ने मामले में दो युवकों के खिलाफ गैंगरेप, अपहरण, मारपीट और जान से मारने के प्रयास का मामला दर्ज किया है। फिलहाल दोनों आरोपी फरार हैं। 

प्रदेश में असुरक्षित है बेटियां: नेता प्रतिपक्ष

मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने ट्वीट कर सरकार पर कई सवाल खड़े किए हैं, उन्होंने ट्वीट कर कहा, "डेढ़-दो महीने की सराकर में एमपी पूरी तरह असुरक्षित बनता जा रहा है। ग्वालियर की ये घटना पूरे समाज को कलंकित करती है, 10वीं की छात्रा के साथ जो हुआ वो इस बात का संकेत है कि अपराध करने वालों को न तो पुलिस का और न ही प्रशासन का कोई डर नहीं रहा। वे बेखौफ हैं, क्योंकि सरकार लापरवाह है।

यह स्थिति तब है, जब मुख्यमंत्री मोहन यादव के पास गृह विभाग भी है। लेकिन, पिछले डेढ़-दो महीने में कभी नहीं लगा कि कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार सजग हुई है। क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार एमपी महिलाओं के साथ अपराध के मामले में देश में 5वें नंबर पर है। दुष्कर्म के मामलों में तो यह तीसरे पायदान पर है। 2022 के शुरुआती 6 महीने में जहां दुष्कर्म के 4160 मामले दर्ज हुए थे, वहीं साल 2023 में दुष्कर्म की 3450 घटनाएं हुई।

अपनी सरकार की झूठी उपलब्धियों का प्रचार करने वाली एमपी सरकार को कभी अपनी खामियों पर भी ध्यान देना चाहिए। जनता ने आपको सिर्फ उद्घाटन और भाषण के लिए नहीं चुना है। प्रदेश की जनता की सुरक्षा भी आपका ही दायित्व है, ये मत भूलिए! तत्काल अपराधियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही करें," ट्वीट में पढ़ा गया।  

इधर, कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्वीट कर लिखा, "मध्य प्रदेश के ग्वालियर में 10वीं कक्षा की मासूम बच्ची को अगवा कर सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने प्रदेश को शर्मिंदा और शर्मसार किया है। हमारी अल्पकालिक सरकार में हमने महिलाओं के विरूद्ध अपराधों की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाए थे और प्रदेश की बेटियों के लिये सुरक्षित व भयमुक्त मध्य प्रदेश बनाने में सफलता हासिल की थी। मध्य प्रदेश में जहां बेटियाँ फिर से असुरक्षित हुईं हैं, वहीं आये दिन घट रहीं घटनाओं ने क़ानून व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए है।"

बाल आयोग ने एसपी को लिखा पत्र

नाबालिग से घटना पेश आने के बाद मध्य प्रदेश राज्य बाल सरंक्षण आयोग ने पुलिस अधीक्षक ग्वालियर को पत्र लिखा है। द मूकनायक से बातचीत करते बाल आयोग के सदस्य ओंकार सिंह ने बताया कि घटना वेहद गंभीर है। आयोग ने इस संबंध में एसपी ग्वालियर  से जांच प्रतिवेदन मांगा है। प्रतिवेदन प्राप्त होने के बाद कार्रवाई करेंगे।

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